इस्लामाबाद : परवेज मुशर्रफ की कानूनी दिक्कतों को बढ़ाते हुए पाकिस्तानी जांचकर्ताओं ने वर्ष 2007 में हुई पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो की हत्या के मामले में पूर्व राष्ट्रपति और सैन्य शासक का नाम हत्या की साजिश के मुख्य आरोपियों की सूची में आज शामिल किया. फेडरल जांच एजेंसी (एफआईए) ने इस संबंध में पूर्व शासक का नाम मुख्य आरोपियों की सूची में शामिल करते हुए 69 वर्षीय मुशर्रफ के खिलाफ रावलपिंडी की आतंकवाद-निरोधी अदालत :एटीसी: में आज आरोपपत्र दाखिल किया.
एफआईए ने मुशर्रफ के खिलाफ एटीसी में चार बिन्दुओं पर आधारित आरोपपत्र दाखिल करते हुए उनपर भुट्टो की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया. चुनावी रैली को संबोधित करने के बाद रावलपिंडी के बाहर 27 दिसंबर 2007 को एक आत्मघाती हमले में 54 वर्षीय भुट्टो की मौत हो गई थी. आरोपपत्र में अमेरिकी पत्रकार मार्क सेगल और स्वयं भुट्टो सहित चार लोगों के बयान शामिल हैं. एफआईए अधिकारियों का कहना है कि आरोपपत्र मार्क के बयान पर आधारित है. मार्क का दावा है कि जिस वक्त वह भुट्टो के साथ बैठे थे उसी दौरान मुशर्रफ ने फोन कर पूर्व प्रधानमंत्री को धमकी दी थी. अमेरिका में भुट्टो के लिए लॉबिस्ट का काम करने वाले मार्क ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री ने उन्हें बताया कि उन्हें पहुंचे किसी भी नुकसान के लिए मुशर्रफ जिम्मेदार होंगे.
आरोपपत्र में कहा गया है कि अमेरिकी नागरिक के बयान से यह स्थापित होता है कि मुशर्रफ बेनजीर भुट्टो की हत्या के मुख्य आरोपी हैं. आरोपपत्र में पूर्व राष्ट्रपति के खिलाफ आतंकवाद के आरोप भी लगाए गए हैं. दस्तावेज में कहा गया है कि मुशर्रफ इस मामले में स्वयं को निदरेष साबित करने में असफल रहे हैं. एटीसी ने पिछले वर्ष मार्क को व्यक्तिगत तौर पर अदालत में उपस्थित होकर बयान देने का सम्मन भेजा था. हालांकि वह अभी तक इस संबंध में अदालत में नहीं आए हैं. एटीसी के न्यायाधीश चौधरी हबीब-उर-रहमान ने मुशर्रफ को दो जून को अदालत में उपस्थित होने का आदेश दिया है. इस मामले में अदालत में सुनवायी इसी दिन से शुरु होनी है.
अदालत ने पुलिस से पूर्व राष्ट्रपति की सुरक्षा की समुचित व्यवस्था करने को कहा. सुरक्षा कारणों से मुशर्रफ आज अदालत में उपस्थित नहीं थे. मुशर्रफ को स्वनिर्वासन से देश वापस लौटते ही गिरफ्तार कर लिया गया था.
