लाहौर: पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की सरकार ने जमात उल दावा (जेयूडी) के सबसे बड़े केंद्र को 6 . 1 करोड़ रुपये से अधिक के आवंटन का बचाव करते हुए कहा है कि लोगों को उपलब्ध कराई जा रही सेवाओं को बनाये रखने के लिए धन की जरुरत है.
पंजाब सरकार के एक प्रवक्ता ने कहा कि पंजाब सरकार ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्तावों के अनुसार जेयूडी द्वारा संचालित कल्याणकारी संस्थानों का प्रशासनिक नियंत्रण अपने हाथ में लिया है.
प्रवक्ता ने एक बयान में कहा कि इन संस्थानों का नियंत्रण लेने के दो उददेश्य यह हैं कि जेयूडी का कोई सदस्य अपने क्रियाकलाप जारी नहीं रख सके और यह सुनिश्चित हो कि स्थानीय लोगों को दवाखाने, अस्पताल, स्कूल जैसी सुविधाओं से वंचित नहीं होना पडे.
प्रवक्ता ने कहा कि पंजाब सरकार ने एक अधिकारी को प्रशासक नियुक्त किया है ताकि स्थानीय लोगों को मूलभूत सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित हो.उन्होंने कहा कि पंजाब सरकार वर्ष 2008 के आखिर से इन संस्थानों के लिए ये व्यवस्थाएं कर रही है.पंजाब की पीएमएल एन सरकार ने वित्तीय वर्ष 2013 . 14 के अपने बजट में जेयूडी के मरकज ए तैयबा के प्रशासक के लिए 6 . 135 करोड़ रुपये का अनुदान मंजूर करने की घोषणा की है.
पंजाब सरकार के वार्षिक बजट बयान की पृष्ठ संख्या 31 पर इस आवंटन को सूचीबद्ध किया गया है. बजट में मुरीदकेय में एक नालेज पार्क और पंजाब में विभिन्न विकास पहलों के लिए 35 करोड़ रुपये का आवंटन भी किया गया है. हालांकि प्रवक्ता का कहना है कि इस आवंटन का जेयूडी से कोई संबंध नही है.
खास बात यह है कि प्रवक्ता ने बयान में जेयूडी को ‘प्रतिबंधित संगठन’ लिखा है जबकि पंजाब सरकार के सहायक महाधिवक्ता ने लाहौर उच्च न्यायालय में अक्तूबर 2009 में कहा था कि जेयूडी को प्रतिबंधित संगठन बताने को लेकर कोई अधिसूचना जारी नहीं हुई है.
