इस्लामाबाद : पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के इस्तीफे एंव नए सिरे से चुनावों को लेकर मांग करने वाले दो बड़े सरकार-विरोधी रैलियों से पहले राजधानी की सुरक्षा कड़ी कर दी गयी है. पाकिस्तान में आज स्वतंत्रता दिवस के मौके पर हिंसा होने का अंदेशा है.
क्रिकेटर से नेता बने इमरान खान और कनाडा निवासी धार्मिक नेता ताहिर-उल-कादरी के नेतृत्व वाले दो समूहों की योजना इस्लामाबाद की ओर जाने की है ताकि जल्दी चुनाव करवाने के लिए शरीफ पर दबाव बनाया जा सके. शरीफ को चुनावों में जीत हासिल किए हुए अभी एक साल से कुछ ही समय ज्यादा हुआ है.
खान और कादरी दोनों ने अपने प्रदर्शनकारियों को पूर्वी शहर लाहौर से राजधानी की ओर ले जाने और सरकार के इस्तीफे तक धरना प्रदर्शन करने की घोषणा की है.
खान पिछले साल हुए चुनावों में कथित हेरफेर को ले कर सरकार को बेदखल करना चाहते हैं. इन चुनावों में उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ हार गई थी. कादरी देश में एक क्रांति लाना चाहते हैं.
इन विरोध प्रदर्शनों से निपटने की तैयारी करते हुए शरीफ की सरकार ने राजधानी को एक किले के रुप में बदल दिया है. राजधानी को बडे-बडे अवरोधकों (शिपिंग कंटेनरों), कंटीली तारों और गहरे गड्ढों की मदद से सील कर दिया गया है.
इस्लामाबाद में लगभग हर प्रवेश स्थल को पुलिसबल और अर्धसैन्य बलों के करीब 25 हजार जवानों ने अवरुद्ध कर रखा है ताकि सरकार-विरोधी प्रदर्शनकारियों को राजधानी में प्रवेश से रोका जा सके. भारी सुरक्षा से लैस ‘रेड जोन’ को बडे अवरोधकों एवं कंटीली तारों से अवरुद्ध किया गया है. यह वह इलाका है, जहां संसद, राष्ट्रपति एवं प्रधानमंत्री के आवास और विदेशी दूतावास हैं.
कल लगभग सभी कार्यालय और दुकानें बंद रहीं और इस्लामाबाद की सडकें सुनसान रहीं. झडपों की आशंका के बीच प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए लाहौर के कुछ हिस्सों को भी कंटेनरों की मदद से अवरुद्ध किया गया है.
सरकार ने इस्लामाबाद के कई हिस्सों में मोबाइल फोन सेवाओं और तार रहित इंटरनेट सेवाओं को अनिश्चितकाल के लिए निलंबित कर दिया है. इसके अलावा इस्लामाबाद राजधानी क्षेत्र में पुलिस के लगभग 5 हजार और अर्धसैन्य बलों के हजारों जवान तैनात किए गए हैं.
संविधान के अनुच्छेद 245 का इस्तेमाल करते हुए विवादास्पद आदेश जारी करके सेना को पहले ही इस्लामाबाद में बुला लिया गया है. यह अनुच्छेद नागरिक सरकार को अधिकार देता है कि वह प्रशासन की मदद के लिए सशस्त्र बलों को समन कर सकती है.
प्रदर्शनकारियों को विमुख करने के अंतिम प्रयास के तहत शरीफ ने मंगलवार रात को यह घोषणा की थी चुनावों में हुई धोखाधडी की जांच के उच्चतम न्यायालय के तीन सदस्यीय आयोग का गठन किया जाएगा लेकिन खान ने पीछे हटने से इंकार कर दिया था.
विश्लेषकों का मानना है कि इस टकराव में सरकार बच जाएगी क्योंकि सरकार की जगह लनेके लिए बहुत कम ही विकल्प हैं और इसलिए सेना उसे गिराने के लिए तैयार नहीं है. अगले चुनावों से पहले सुधार करने के लिए खान ने तकनीकविदों की एक सरकार को नियुक्त करने के लिए कहा था. उनके इस सुझाव का विरोध उन्हीं के साथियों ने किया और पार्टी के एक वरिष्ठ नेता जावेद हाशमी ने विरोध प्रदर्शन में शामिल होने से इंकार कर दिया.
बाद में खान ने उनके पास एक प्रतिनिधिमंडल इस प्रतिबद्धता के साथ भेजा कि वह नहीं चाहते कि सत्ता की कमान सेना के पास जाए. हरहाल, ऐसी आशंकाएं हैं कि यदि हजारों समर्थकों ने अवरोधक तोडने और राजधानी में जबरन घुसने की कोशिश की तो झडपें हो सकती हैं.
मीडिया में आई खबरों में कहा गया कि शरीफ के छोटे भाई शाहबाज शरीफ, गृहमंत्री निसार अली खान और सेना प्रमुख राहील शरीफ ने कल रावलपिंडी में राजनैतिक हालात पर चर्चा की. इसी बीच सरकार ने राजधानी में एक परेड आयोजित करके स्वतंत्रता दिवस के समारोहों की शुरुआत कर दी.
तीनों सेनाओं के प्रमुख उस समय मौजूद थे, जब शरीफ ने सलामी ली और परेड में भाग लेने वालों को संबोधित किया. पने संबोधन में उन्होंने कहा, ‘‘आइए एकसाथ मिलकर संकल्प लें कि हम किसी को भी संविधान की सर्वोच्चता, कानून के शासन और लोकतंत्र की निरंतरता को नुकसान नहीं पहुंचाने देंगे.’’
