नयी दिल्ली: संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम की मानव विकास सूचकांक रपट यूएनडीपी के मुताबिक वर्ष 2013 के लिए भारत का मानव विकास सूचकांक में 135वें नम्बर पर है. भारत का मानव विकास सूचकांक मूल्य 0.586 रहा. पिछले साल भी भारत इसी स्थान पर था.
यह इस बात का संकेत है कि देश को अभी भी अपनी जनता के स्वास्थ्य, शिक्षा और अन्य नागरिक सुविधाओं और जीवन स्तर में सुधार के लिये कड़ी मेहनत करनी होगी. और इसके लिये अभी एक लंबा फासला तय करना बाकी है.संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम की मानव विकास सूचकांक रपट यूएनडीपी में कहा गया है वर्ष 2013 में भारत का मानव विकास सूचकांक मूल्य 0.586 रहा.जो मानव विकास के मध्यम वर्ग में आता है.
187 देशों की इस सूची में भारत को 135वें स्थान पर रखा गया है.1980 से 2013 के बीच भारत का मानव विकास सूचकांक मूल्य 0.369 से सुधर कर 0.586 पर पहुंचा है ब्रिक्स के ब्राजील, रुस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के बीच भारत का मानव विकास सूचकांक मूल्य सबसे कम है.
रपट में कहा गया भारत जीवन प्रत्याशा को छोडकर मानव विकास सूचकांक की सभी कसौटियों में अन्य ब्रिक्स देशों की तुलना में सबसे नीचे है.एचआईवी-एड्स के कारण ब्रिक्स देशों में दक्षिण अफ्रीका में जीवन प्रत्याशा कम है. ब्रिक्स देशों में रुस ब्राजील और चीन उच्च मानव विकास सूचकांक वर्ग में क्रमश: 57वें,79वें और 91वें स्थान पर हैं. दक्षिण अफ्रीका 118वें और भारत 135वें स्थान के साथ मध्यम वर्ग में है.
रपट में 1980 से 2013 के बीच भारत की प्रगति की समीक्षा पेश करते हुए कहा गया भारत का सूचकांक 0.614 के स्तर से कम 0.586 पर रहा जो दक्षिण एशिया के औसत सूचकांक 0.588 से भी नीचे है.रपट में भारत के पडोसी बांग्लादेश और पाकिस्तान क्रमश: 142वें और 146वें स्थान पर हैं.
स्त्री-पुरष के बीच असमानता संबंधी सूचकांक के लिहाज से भारत 152 देशों में 127वें स्थान पर रहा.रपट में बताया गया है कि भारत में 10.9 फीसदी महिला सांसद हैं.26.6 फीसदी वयस्क महिलाएं माध्यमिक शिक्षा प्राप्त हैं.इसी स्तर की शिक्षा प्राप्त करने वाले पुरुषों का अनुपात 50.4 प्रतिशत है.भारत में श्रम बाजार में स्त्रियों की भागीदारी 28.8 प्रतिशत है जबकि पुरुषों की हिस्सेदारी 80.9 प्रतिशत है.
एक नया सूचकांक, सी-पुरष विकास सूचकांक जीडीआई पेश किया गया है जो मानव विकास सूचकाक में पुरुषों के मुकाबले महिलाओं के विकास का अनुपात है. 2013 के दौरान भारत में महिला मानव विकास सूचकांक मूल्य 0.519 और पुरुष मानव विकास सूचकांक 0.627 रहा। कुल 148 देशों में जीडीआई का आकलन किया गया है.
मानव विकास सूचकांक किसी देश के मानव जीवन के तीन मुख्य आयामों की दीर्घकालिक प्रगति की रिपोर्ट होती है.इसमें लंबा एवं स्वस्थ जीवन, शिक्षा सुविधा और अच्छा जीवन स्तर शामिल है.2013 में 2012 और 2011 की ही तरह अध्ययन में 187 देश शामिल किए गए थे.पिछले साल 15 नवंबर तक उपलब्ध आंकडों के आधार पर तैयार रपट में कहा गया कि सूची में एक साल के अंदर कुछ देशों का स्थान बदला है.
