Women’s day 2020 : जानिए इंटरटेनमेंट जगत की उन महिला निर्देशकों को जिन्होंने बनायी अपनी पहचान…

Women’s day 2020 : भले ही महिलाओं को आज भी अपने अधिकारों के लिए जंग लड़नी पड़ रही है, बात अगर मनोरंजन जगत की करें, तो कई ऐसी महिला निर्देशकों का नाम सामने आता है, जिन्होंने पुरुषों के क्षेत्र में अपना दमखम दिखाया और अपने लिए जगह बनायी.

भले ही महिलाओं को आज भी अपने अधिकारों के लिए जंग लड़नी पड़ रही है, लेकिन एक सच्चाई यह भी है कि कई महिलाओं ने अपनी क्षमता और प्रतिभा से अपने-अपने क्षेत्र में अपना लोहा मनवाया है. बात अगर मनोरंजन जगत की करें, तो कई ऐसी महिला निर्देशकों का नाम सामने आता है, जिन्होंने पुरुषों के क्षेत्र में अपना दमखम दिखाया और अपने लिए जगह बनायी.

जोया अख्तर : जोया अख्तर, आज के समय की चर्चित महिला निर्देशक हैं. उन्होंने लक बाइ चांस फिल्म से 2009 में अपने कैरियर की शुरुआत की थी. ‘उन्होंने जिंदगी न मिलेगी दोबारा’ जैसी सफल फिल्मों का निर्देशन भी किया और फिल्मफेयर का सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार भी जीता. वे 46 साल की हैं और प्रसिद्ध पटकथा जावेद अख्तर और हनी ईरानी की बेटी हैं.

अर्पणा सेन : अर्पणा सेन एक ऐसी महिला निर्देशक हैं, जिन्होंने एक से बढ़कर एक फिल्मों का निर्देशन किया और कई पुरस्कार जीते. उन्होंने मिस्टर एंड मिसेस अय्यर, जेपीनिज वाइफ, चौरंगी लेन, पेरोमा एवं 15 पार्क जैसी फिल्मों का निर्देशन किया. अर्पणा सेन बंगाली फिल्मों की सफल अभिनेत्री रही हैं.

मेघना गुलजार : मेघना गुलजार ने भी बॉलीवुड में एक महिला निर्देशक के रूप में अपनी पहचान बना ली है. उनकी फिल्में ना सिर्फ पुरस्कार जीते हैं, बल्कि करोड़ो कमाये भी हैं. मेघना की फिल्म छपाक हाल ही में रिलीज हुई और काफी चर्चा में भी रही. यह एसिड अटैक पीड़ित लड़की लक्ष्मी पर बनी फिल्म थी. इससे उनकी फिल्म राजी भी चर्चा में रही है. उनकी फिल्म तलवार भी काफी चर्चित रही है. मेघना गुलजार और राखी की बेटी हैं.

गौरी शिंदे : इंग्लिश-विंग्लिश फिल्म बनाकर बॉलीवुड में धमाकेदार दस्तक देने वाली गौरी शिंदे आज इंडस्ट्री में अपनी पहचान बना चुकी हैं. उन्होंने डियर जिंदगी भी बनायी, जो खासी चर्चित रही. डियर जिंदगी में आलिया भट्ट ने काम किया था.

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By Rajneesh anand

रजनीश आनंद प्रभात खबर में सीनियर चीफ कंटेंट राइटर के पद पर कार्यरत हैं और पत्रकारिता के क्षेत्र में 25 वर्षों से अधिक का अनुभव रखती हैं.फिलहाल वे प्रभात खबर के ओरिजिनल, नेशनल, इंटरनेशनल और खेल कैटेगरी के लिए राइटिंग का काम करती हैं. उनकी पहचान फैक्ट बेस्ट रिपोर्टिंग, रिसर्च बेस्ड स्टोरी और एक्सप्लेनर लेखन के लिए है.

राजनीति, सामाजिक सरोकार, ग्रामीण विकास, महिला मुद्दों, इतिहास, खेल, जनजातीय समाज और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि रही है. वैसे मुद्दे जो समाज के हाशिये पर मौजूद समुदायों और आम लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं, लेकिन मुख्यधारा की बहस में अपेक्षाकृत कम जगह पाते हैं, ऐसे विषयों पर भी लेखन में रुचि रखती हैं.

रजनीश आनंद कई प्रतिष्ठित पत्रकारिता फेलोशिप से जुड़ी रही हैं. इन्क्लूसिव मीडिया–यूएनडीपी फेलोशिप के तहत उन्होंने झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम (चाईबासा) जिले में माहवारी स्वच्छता और किशोरियों एवं महिलाओं के स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर अध्ययन एवं रिपोर्टिंग की. झारखंड सरकार मीडिया फेलोशिप के दौरान महिला सशक्तिकरण, सरकारी योजनाओं के प्रभाव और सामाजिक बदलाव के विभिन्न आयामों पर काम किया. इसके अलावा सेव द चिल्ड्रन फेलोशिप के तहत बच्चों के अधिकार, शिक्षा, सुरक्षा और बाल कल्याण से जुड़े मुद्दों पर गहन रिपोर्टिंग की है.

आदिवासी समाज, विशेषकर मुंडा जनजाति के इतिहास, संस्कृति और समकालीन चुनौतियों पर उनका काम उल्लेखनीय माना जाता है. उन्होंने भूमि, पहचान, परंपरा, सामाजिक बदलाव और आदिवासी समुदायों के अधिकारों से जुड़े विषयों पर व्यापक फील्ड रिपोर्टिंग की है.हाल के वर्षों में उन्होंने झारखंड में ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और जस्ट ट्रांजिशन की अवधारणा पर भी काम किया है. विशेष रूप से कोयला आधारित अर्थव्यवस्था वाले क्षेत्रों में रोजगार, आजीविका और सामाजिक प्रभावों से जुड़ी चुनौतियों पर उनकी रिपोर्टिंग ने महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं.

रजनीश आनंद झारखंड की राजधानी रांची में रहती हैं और इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक हैं. उन्होंने वर्ष 2000 में पत्रकारिता की शुरुआत झारखंड जागरण दैनिक से की. इसके बाद प्रभात खबर, हिंदुस्तान, रांची एक्सप्रेस और दैनिक जागरण सहित कई प्रमुख समाचार संस्थानों के लिए रिपोर्टिंग और स्वतंत्र लेखन किया. प्रिंट मीडिया के दैनिक, साप्ताहिक, पाक्षिक और सांध्य प्रकाशनों में काम करने के साथ-साथ वे वर्ष 2012 से डिजिटल पत्रकारिता में सक्रिय हैं.

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