थर्मल स्कैनिंग व सोशल डिस्टैंसिंग के साथ चल रहीं बसें, कोरोना के खौफ से कम निकल रहे यात्री

सरायकेला (प्रताप मिश्रा) : कोरोना के बढ़ते प्रकोप के बीच जारी लॉकडाउन के लगभग पांच महीने बाद एक सितंबर से सरायकेला जिला मुख्यालय से यात्री वाहनों परिचालन शुरू हुआ. कोरोना के संक्रमण को देखते हुए राज्य की हेमंत सरकार द्वारा जारी नियमों का पालन करते हुए सरायकेला से टाटा, खरसावां, चाईबासा व रांची के लिए बसों का परिचालन किया जा रहा है.

सरायकेला (प्रताप मिश्रा) : कोरोना के बढ़ते प्रकोप के बीच जारी लॉकडाउन के लगभग पांच महीने बाद एक सितंबर से सरायकेला जिला मुख्यालय से यात्री वाहनों परिचालन शुरू हुआ. कोरोना के संक्रमण को देखते हुए राज्य की हेमंत सरकार द्वारा जारी नियमों का पालन करते हुए सरायकेला से टाटा, खरसावां, चाईबासा व रांची के लिए बसों का परिचालन किया जा रहा है.

Also Read: Coronavirus In Jharkhand : कोरोना का टीका आने के बाद ही झारखंड में खोले जाएं स्कूल, सर्वाधिक अभिभावकों ने दी ये राय

झारखंड की हेमंत सरकार के वाहनों के परिचालन के आदेश के पहले दिन इक्के दुक्के ही वाहन चले. यात्रियों की संख्या भी कम रही. सरायकेला से जमशेदपुर के लिए दो बड़ी बसें चलीं, जबकि बाकी छोटा हाथी वाहनों का ही परिचालन हुआ. किराया दोगुना लेकर यात्री बसों का परिचालन किया जा रहा है. सरायकेला से टाटा के लिए जहां 100 रूपये किराया रखा गया है, वहीं रांची के लिए 250 रूपये किराया रखा गया है. बसों में यात्रियों के बीच सोशल डिस्टैंसिंग का पालन कर बैठाया जा रहा है. पहले दिन रांची के लिए बस दो यात्रियों को लेकर रवाना हुई, जबकि जमशेदपुर के लिए तीन यात्रियों के साथ दो बसें सरायकेला से रवाना हुईं.

Also Read: Jharkhand News : दरिंदों ने जमशेदपुर में पांच साल की मासूम को मार डाला, जंगल में मिला हाथ कटा शव, मेडिकल बोर्ड करेगा पोस्टमार्टम

दूसरे दिन यानी आज एकाध यात्री वाहन चले. कोरोना संक्रमण के भय से लोग आवाजाही से कतरा रहे हैं. वाहन स्टैंड में एकाध यात्री ही आये. वाहन संचालकों को कोरोना के नियमों का पालन करते हुए भी देखा गया. मैक्सी टैक्सी संघ के जिलाध्यक्ष छोटराय किस्कु ने बताया कि धीरे-धीरे वाहनों का परिचालन शुरू किया जा रहा है. इस बात का ख्याल भी रखा जा रहा है कि कहीं संक्रमण नहीं फैले. इसके लिए वाहनों को सैनिटाइज किया जा रहा है. इसके साथ ही यात्रियों की थर्मल स्कैनिंग की जा रही है.

Also Read: आदिम जनजाति बिरहोर आज भी आजीविका के लिए सरकारी योजनाओं से हैं कोसों दूर, कोरोना काल में परिवार का गुजारा हुआ मुश्किल

Posted By : Guru Swarup Mishra

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >