Sawan 2023, Shivji Ki Chalisa: आज है सावन का पहला सोमवार, जरूर करें शिव चालीसा का पाठ

Sawan 2023, Shivji Ki Chalisa: सावन का महीना भगवान देवाधिदेव महादेव को समर्पित होता है. ऐसे में यदि आप भी शिव मंदिर जा रहे हैं तो शिव जी की पूजा और जलाभिषेक के बाद वहीं खड़े होकर शिव चालीसा का पाठ करें. इससे विशेष मनोकामना की पूर्ति होती है. शिव जी की चालीसा इस प्रकार हैं-

Sawan 2023, Shivji Ki Chalisa: 4 जुलाई से प्रारंभ सावन का महीना 31 अगस्त को समाप्त होगा. आज सावन मास का पहला सोमवार है. सावन के महीने में कई दिव्य संयोग भी बन रहे हैं.सावन का महीना भगवान देवाधिदेव महादेव को समर्पित होता है. ऐसे में यदि आप भी शिव मंदिर जा रहे हैं तो शिव जी की पूजा और जलाभिषेक के बाद वहीं खड़े होकर शिव चालीसा का पाठ करें. इससे विशेष मनोकामना की पूर्ति होती है. शिव जी की चालीसा इस प्रकार हैं-

शिव चालीसा

॥ दोहा ॥जय गणेश गिरिजा सुवन,मंगल मूल सुजान।कहत अयोध्यादास तुम,देहु अभय वरदान॥

चौपाई

जय गिरिजा पति दीन दयाला।सदा करत सन्तन प्रतिपाला॥भाल चन्द्रमा सोहत नीके।कानन कुण्डल नागफनी के॥

अंग गौर शिर गंग बहाये।मुण्डमाल तन क्षार लगाए॥वस्त्र खाल बाघम्बर सोहे।छवि को देखि नाग मन मोहे॥

मैना मातु की हवे दुलारी।बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥कर त्रिशूल सोहत छवि भारी।करत सदा शत्रुन क्षयकारी॥

नन्दि गणेश सोहै तहँ कैसे।सागर मध्य कमल हैं जैसे॥कार्तिक श्याम और गणराऊ।या छवि को कहि जात न काऊ॥

देवन जबहीं जाय पुकारा।तब ही दुख प्रभु आप निवारा॥किया उपद्रव तारक भारी।देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी॥

तुरत षडानन आप पठायउ।लवनिमेष महँ मारि गिरायउ॥आप जलंधर असुर संहारा।सुयश तुम्हार विदित संसारा॥

त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई।सबहिं कृपा कर लीन बचाई॥किया तपहिं भागीरथ भारी।पुरब प्रतिज्ञा तासु पुरारी॥

दानिन महँ तुम सम कोउ नाहीं।सेवक स्तुति करत सदाहीं॥वेद माहि महिमा तुम गाई।अकथ अनादि भेद नहिं पाई॥

प्रकटी उदधि मंथन में ज्वाला।जरत सुरासुर भए विहाला॥कीन्ही दया तहं करी सहाई।नीलकण्ठ तब नाम कहाई॥

पूजन रामचन्द्र जब कीन्हा।जीत के लंक विभीषण दीन्हा॥सहस कमल में हो रहे धारी।कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी॥

एक कमल प्रभु राखेउ जोई।कमल नयन पूजन चहं सोई॥कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर।भए प्रसन्न दिए इच्छित वर॥

जय जय जय अनन्त अविनाशी।करत कृपा सब के घटवासी॥दुष्ट सकल नित मोहि सतावै।भ्रमत रहौं मोहि चैन न आवै॥

त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो।येहि अवसर मोहि आन उबारो॥लै त्रिशूल शत्रुन को मारो।संकट ते मोहि आन उबारो॥

मात-पिता भ्राता सब होई।संकट में पूछत नहिं कोई॥स्वामी एक है आस तुम्हारी।आय हरहु मम संकट भारी॥

धन निर्धन को देत सदा हीं।जो कोई जांचे सो फल पाहीं॥अस्तुति केहि विधि करैं तुम्हारी।क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥

शंकर हो संकट के नाशन।मंगल कारण विघ्न विनाशन॥योगी यति मुनि ध्यान लगावैं।शारद नारद शीश नवावैं॥

नमो नमो जय नमः शिवाय।सुर ब्रह्मादिक पार न पाय॥जो यह पाठ करे मन लाई।ता पर होत है शम्भु सहाई॥

ॠनियां जो कोई हो अधिकारी।पाठ करे सो पावन हारी॥पुत्र होन कर इच्छा जोई।निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई॥

पण्डित त्रयोदशी को लावे।ध्यान पूर्वक होम करावे॥त्रयोदशी व्रत करै हमेशा।ताके तन नहीं रहै कलेशा॥

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By Shaurya punj

मैं धर्म, ज्योतिष और आध्यात्मिक विषयों पर लेखन में विशेषज्ञता रखता हूं. हस्तरेखा शास्त्र, राशिफल, ग्रह-नक्षत्र, धार्मिक परंपराओं और पौराणिक कथाओं से जुड़े विषयों पर मेरी विशेष रुचि और गहरी समझ है. रांची के सेंट जेवियर्स कॉलेज से मास कम्युनिकेशन में स्नातक करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया और कंटेंट राइटिंग के क्षेत्र में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव हासिल किया है. धर्म और ज्योतिष के अलावा एंटरटेनमेंट, लाइफस्टाइल और शिक्षा जैसे विषयों पर भी लगातार लेखन करता रहा हूं. मेरी कोशिश रहती है कि जटिल विषयों को आसान, रोचक और भरोसेमंद तरीके से पाठकों तक पहुंचाया जाए.

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