Rath Yatra 2022: हेरा पंचमी पर मां लक्ष्मी ने निभाई प्रभु जगन्नाथ के रथ भंगिनी की परंपरा, ये है मान्यता

Rath Yatra 2022: मां लक्ष्मी के चंद भक्त मंगलवार की रात जगन्नाथ मंदिर के निकटवर्ती लक्ष्मी मंदिर से पूजा अर्चना कर मां लक्ष्मी के कांस्य प्रतिमा को एक पालकी पर लेकर गुंडिचा मंदिर पहुंचे. यहां मंदिर के चौखट पर दस्तक देने के बाद सभी रस्मों को निभाया गया.

By Prabhat Khabar Digital Desk | July 6, 2022 6:55 AM

Rath Yatra 2022: झारखंड के सरायकेला खरसावां जिले में रथ यात्रा के पांचवें दिन हेरा पंचमी पर मां लक्ष्मी द्वारा प्रभु जगन्नाथ के रथ भंगिनी की परंपरा निभायी गयी. रथ यात्रा के पांचवें दिन हेरा पंचमी के मौके पर पूरी की तर्ज पर सरायकेला-खरसावां में रथ भंगिनी अनुष्ठान का आयोजन किया जाता है. इस अनुष्ठान में मां लक्ष्मी के भक्तों की विशेष भूमिका रहती है. इसमें अधिकतर महिलायें होती हैं. मंगलवार की रात मां लक्ष्मी के चंद भक्त जगन्नाथ मंदिर के निकटवर्ती लक्ष्मी मंदिर से पूजा अर्चना कर मां लक्ष्मी के कांस्य प्रतिमा को एक पालकी पर लेकर गुंडिचा मंदिर पहुंचे. यहां मंदिर के चौखट पर दस्तक देने के बाद सभी रस्मों को निभाया गया. इसके बाद श्रद्धालु मां लक्ष्मी की प्रतिमा को पालकी पर लेकर प्रभु जगन्नाथ के रथ नंदिघोष के पास पहुंचे तथा रथ के एक के हिस्से की कुछ लकड़ियों को तोड़ कर वापस अपने मंदिर में पहुंचे.

क्या है धार्मिक मान्यता

धार्मिक मान्यता है कि भाई-बहन के साथ गुंडिचा मंदिर गये प्रभु जगन्नाथ के पांच दिन बाद भी श्रीमंदिर वापस नहीं लौटने पर मां लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं. रथ यात्रा के पांचवें दिन मां लक्ष्मी स्वंय सखियों संग गुंडिचा मंदिर जा कर प्रभु जगन्नाथ से वापस श्री मंदिर लौटने का आग्रह करती हैं. जब प्रभु जगन्नाथ तत्काल गुंडिचा मंदिर से श्रीमंदिर वापस नहीं लौटते हैं, तो नाराज मां लक्ष्मी प्रभु जगन्नाथ को कोसते हुए प्रभु जगन्नाथ के रथ ‘नंदिषोघ’ को तोड़ देती हैं. मंगलवार को देर शाम इस धार्मिक परंपरा को खरसावां व हरिभंजा में निभाया गया. इस धार्मिक अनुष्ठान को भी काफी महत्वपूर्ण माना जाता है. माना जाता है कि इसके बाद ही बाहुड़ा रथ यात्रा (वापसी रथ यात्रा) की तैयारी होती है.

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खरसावां राजवाड़ी में ओड़िशी नृत्य प्रदर्शनी

खरसावां के राजवाड़ी परिसर में हेरा पंचमी के मौके पर ओड़िशी नृत्य प्रदर्शनी का आयोजन किया गया. ओड़िशा सरकार के ओड़िया भाषा, साहित्य व संस्कृति विभाग की ओर से ये कार्यक्रम किया गया. ओड़िशा की राजधानी भुवनेश्वर से आये हुए कलाकारों ने यहां ओड़िशी नृत्य पेश किया.

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रिपोर्ट : शचिंद्र कुमार दाश, सरायकेला-खरसावां

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