पाकुड़ में रामनवमी जुलूस की नहीं मिली अनुमति, भड़के पूर्व सीएम चंपाई सोरेन, कह दी ये बड़ी बात

Ram Navami: झारखंड और बंगाल की सीमा पर स्थित पाकुड़ जिले में रामनवमी आयोजन समिति को ग्रामीण इलाके में रामनवमी जुलूस निकालने की अनुमति नहीं दिये जाने पर पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने नाराजगी जतायी है. उन्होंने सरकार पर हमला बोला है. पूछा है कि क्या सरकार यह बताना चाहती है कि जहां कहीं भी हिंदू अल्पसंख्यक होंगे, वहां उनके धार्मिक/ संवैधानिक अधिकारों को इसी प्रकार छीन लिया जायेगा?

Ram Navami in Pakur| पाकुड़ के ग्रामीण इलाकों में रामनवमी जुलूस निकालने की अनुमति देने से प्रशासन ने इनकार कर दिया है. इस पर झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. वहीं, पाकुड़ के एसपी ने कहा है कि जिले में जितने भी लाइसेंसधारी पारंपरिक अखाड़े हैं, सभी शांतिपूर्वक जुलूस निकाल रहे हैं. कहीं कोई दिक्कत नहीं है. सभी क्षेत्रों में दंडाधिकारी और पुलिस पदाधिकारियों की तैनाती की गयी है.

मैंने पहले भी कहा था कि पाकुड़ में आदिवासी/ हिंदू समाज अल्पसंख्यक हो चुका है, जबकि एक समुदाय विशेष की आबादी दो-तिहाई के करीब है. क्या सरकार यह बताना चाहती है कि जहां कहीं भी हिंदू अल्पसंख्यक होंगे, वहां उनके धार्मिक/ संवैधानिक अधिकारों को इसी प्रकार छीन लिया जायेगा?

चंपाई सोरेन, पर्व मुख्यमंत्री, झारखंड

रामनवमी जुलूस पर रोक सरकार की हिंदू विरोधी मानसिकता को दर्शाता है – चंपाई

उधर, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता और झारखंड के पूर्व सीएम चंपाई सोरेन ने कहा है कि पाकुड़ में प्रशासन की ओर से ग्रामीणों के रामनवमी जुलूस पर रोक लगाना राज्य सरकार की हिंदू विरोधी मानसिकता को दर्शाता है. उन्होंने कहा कि हिंदू/मूलवासी समाज वैसे भी शांतिप्रिय होता है, लेकिन अगर सरकार को लगता है कि वे रामनवमी शोभायात्रा को सुरक्षा तक नहीं दे सकते, तो फिर क्या कहें?

पाकुड़ के 9 गांवों में रामनवमी जुलूस नहीं निकालने संबंधी आदेश की कॉपी.

पाकुड़ में आदिवासी/हिंदू हो चुके हैं अल्पसंख्यक – चंपाई सोरेन

चंपाई सोरेन ने ‘एक्स’ पर आगे लिखा, ‘मैंने पहले भी कहा था कि पाकुड़ में आदिवासी/ हिंदू समाज अल्पसंख्यक हो चुका है, जबकि एक समुदाय विशेष की आबादी दो-तिहाई के करीब है. क्या सरकार यह बताना चाहती है कि जहां कहीं भी हिंदू अल्पसंख्यक होंगे, वहां उनके धार्मिक/ संवैधानिक अधिकारों को इसी प्रकार छीन लिया जायेगा?’

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क्या झारखंड में हिंदू होना अपराध है?- चंपाई

चंपाई सोरेन ने लिखा, ‘क्या झारखंड में हिंदू होना अपराध है? क्या राज्य सरकार किसी अन्य धर्म के पर्व-त्योहारों पर ऐसा ही तुगलकी फरमान जारी करने का साहस दिखा सकती है?’ दरअसल, पाकुड़ सदर अनुमंडल पदाधिकारी-सह-अनुमंडल दंडाधिकारी कार्यालय से रामनवमी आयोजन समिति ने पाकुड़ के 9 गांवों से रामनवमी जुलूस निकालने की अनुमति मांगी थी. साथ ही सुरक्षा देने की भी मांग की थी.

रामनवमी आयोजन समिति ने इन 9 गांवों में जुलूस निकालने की मांगी थी अनुमति

समिति ने पाकुड़ के कोलाजोड़ा, समसेरा, शहरकोल, गोकुलपुर, नगरनवी, झिकरहार्टी, पिरलीपुर, बहिरग्राम और चोंगाडांगा के लोगों की मौजूदगी में पारंपरिक अस्त्र-शस्त्र, धार्मिक ध्वज के साथ शोभायात्रा निकालने की अनुमति मांगी थी. साथ ही कहा था कि इस दौरान ध्वनि विस्तारक यंत्र का भी इस्तेमाल किया जायेगा. समिति ने 4 अप्रैल 2025 को यह आवेदन दिया था. इस आवेदन को प्रशासन ने मंजूरी नहीं दी.

पाकुड़ जिले में जितने भी पारंपरिक और लाइसेंसधारी अखाड़े हैं, सभी शांतिपूर्वक जुलूस निकाल रहे हैं. कहीं कोई दिक्कत नहीं है. सभी क्षेत्रों में दंडाधिकारी और पुलिस पदाधिकारियों की तैनाती की गयी है.

एसपी, पाकुड़

एसडीओ ने अनुमति नहीं देने के बताये ये कारण

एसडीओ कार्यालय से 5 अप्रैल 2025 को जारी ज्ञापांक संख्या 403 में कहा गया है कि रामनवमी आयोजन समिति पाकुड़ से मिलने आवेदन में यह नहीं बताया गया है कि शोभायात्रा में कितने लोग शामिल होंगे. साथ ही लाइसेंस संबंधी कागजात भी प्रस्तुत नहीं किया गया. इसलिए रामनवमी आयोजन समिति को कार्यक्रम की अनुमति नहीं दी जायेगी.

एसडीओ ने कहा- कार्यक्रम करेंगे, तो होगी कार्रवाई

एसडीओ ने समिति से कहा कि वह अपना कार्यक्रम न करें. साथ ही कहा कि अगर इस आदेश की अवहेलना हुई, तो भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत कार्रवाई की जायेगी. आदेश की रामनवमी आयोजन समिति के प्रसन्ना मुश्रा, पाकुड़ नगर के थाना प्रभारी और अंचल अधिकारी को भी भेज दी गयी. थाना प्रभारी और अंचल अधिकारी से कहा गया है कि वे इस आदेश का पालन कराना सुनिश्चित करें.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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