Pitchers 2 Review: युवा सपनों के पिच पर एक बार फिर से एंट्री ली है पिचर्स ने... पढ़ें रिव्यू

जिस दौर में पिचर्स पहली बार दर्शकों के सामने आई थी, उस दौर में युवाओं के लिए यह शानदार और नई कहानी थी. कुछ युवा जो सबकुछ छोड़ कर अपना स्टार्ट अप करने की कोशिश में जुटे होते हैं. उस दौर में जाहिर है युवा शार्क टैंक जैसे शो से वाकिफ नहीं थे.

वेब सीरीज: पिचर्स सीजन 2

कलाकार: अरुणभ, नवीन कस्तूरिया, रिद्धि डोगरा, अभिषेक बनर्जी एवम अन्य

निर्देशक: अरुणभ

चैनल: जी 5

रेटिंग: तीन स्टार

जिस दौर में पिचर्स पहली बार दर्शकों के सामने आई थी, उस दौर में युवाओं के लिए यह शानदार और नई कहानी थी. कुछ युवा जो सबकुछ छोड़ कर अपना स्टार्ट अप करने की कोशिश में जुटे होते हैं. उस दौर में जाहिर है युवा शार्क टैंक जैसे शो से वाकिफ नहीं थे. उनके लिया यह शो एकदम फ्रेश अप्रोच था. यही वजह थी कि दर्शकों ने इस शो से काफी कनेक्ट किया. लेकिन इस बार जब इसी शो का सेकेंड सीजन आया है तो यह इंडिपेंडेंट शो के रूप में भले ही अच्छी कहानी साबित हुई है.

पिक्चर्स 2 में चुनौतियां भी बड़ी हो गई हैं

लेकिन अगर आप पहले सीजन के ग्राफ से मेल कराने बैठेंगे तो आपको थोड़ी निराशा होगी. यकीनन मेकर्स के लिए यह आसान नहीं होगा कि आज के दौर को ध्यान में रखते हुए प्रासंगिक बनाया जाए. कहानी इस बार प्रगति को और आगे बड़े वेंचर में ले जाने से शुरू होती है, यानी इनके स्टार्ट अप से, जहां नवीन, योगी और मंडल हैं. जीतू इस बार नहीं हैं. इस बार भी एक जंग है कि उन्हें अपनी कंपनी बचानी है. टीम बड़ी हुई है, अब बात चार नहीं 24 की है. तो चुनौतियां भी बड़ी हो गई हैं.

पूरी सीरीज का रोमांच

ऐसे में उनके जीवन में एक महिला प्राची मीना, जो कि बहुत बड़ी पूंजीपति हैं, उनकी एंट्री होती है और यहां से तीनों की जिंदगी में क्या बदलाव आते हैं, यह पूरी सीरीज का रोमांच है. क्या तीनों अपने स्टार्ट अप को आकार दे पाते हैं, यह सब देखना काफी दिलचस्प है. इस सीजन में बीयर से बात विस्की तक आ पहुंची है. इस बार एपिसोड पांच रखे गए हैं. कुछ हिस्सों में तो कहानी बिल्कुल कनेक्ट करती है और वास्तविकता के करीब है. जो सपने देखते हैं और अपना कुछ करना चाहते हैं, निश्चित तौर पर उन्हें यह सीरीज इंस्पायर करेगी, क्योंकि कुछ जबरदस्त लाइफ लेशन दिए गए हैं.

महिला किरदारों को भी तवज्जो दी गई ह

वहीं इस बार सीरीज की यह भी खूबी है कि महिला किरदारों को भी तवज्जो दी गई है. इस बार भी सीजन में इस बात के लेशन है कि बिजनेस करते हुए आपको प्रैक्टिकल होना कितना जरूरी है. लेकिन साथ ही आपको उन लोगों के साथ इमोशन को नहीं भूलना चाहिए, जो लगातार आपके साथ रहे हैं. किस तरह बड़ा पद आने के बाद किसी एक को ऐसा लगने लगने लगता है कि उन्होंने ही अकेले के दम पर कंपनी खड़ी की है और फिर किस तरह वह अपने दोस्तों को लेकर फॉर ग्रांटेड कर देता है. इस कंट्रास्ट को भी शो में बखूबी दिखाया गया है.

कैसा है अभिनय?

अभिनय की बात की जाए, तो नवीन पहले सीजन की तरह ही कांफिडेंट दिखे हैं, जो हर जोखिम को लेने के लिए तैयार रहते हैं. अरुणभ ने भी बेहतर काम किया है. अभय के वन लाइनर कमाल के हैं. इस बार रिद्धि ने बाजी मारी है. सिकंदर खेर, आशीष विद्यार्थी ने कम दृश्यों में भी आकर्षित किया है.

फिल्म देखें या नहीं

कुलमिलाकर इस सीरीज से चूंकि अपेक्षा ज्यादा थी इसलिए थोड़ी निराशा होती है. लेकिन इस सीरीज को एक बार जरूर देखा जाना चाहिए, क्योंकि युवाओं को यह सपने देखने के लिए तो प्रोत्साहित करती है.

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लेखक के बारे में

Author: कोरी

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