ऐसे हुई थी शून्य की खोज, यहां से जानें जीरो का इतिहास

Zero in hindi: आर्यभट्ट का शून्य के अविष्कार में क्या योगदान हैं?, जीरो के अविष्कार से पहले गणना कैसे होती थी, जीरो की खोज भारत में कब और कैसे हुई?

जब भी शून्य के अविष्कार की बात आती हैं, तब हमारे दिमाग में ऐसे कई सवाल उठते है. की जीरो का आविष्कार किसने किया?, जीरो का अविष्कार कब हुआ?, जीरो क्या हैं? zero in hindi, आर्यभट्ट का शून्य के अविष्कार में क्या योगदान हैं?, जीरो के अविष्कार से पहले गणना कैसे होती थी, जीरो(zero) की खोज भारत में कब और कैसे हुई?

जानें शून्य की खासियत

शून्य की खासियत है कि इसे किसी संख्या से गुणा करें अथवा भाग दें, परिणाम शून्य ही रहता है.  भारत का ‘शून्य’ अरब जगत में ‘सिफर’ (अर्थ- खाली) नाम से प्रचलित हुआ फिर लैटिन, इटैलियन, फ्रेंच आदि से होते हुए इसे अंग्रेजी में ‘जीरो’ (zero) कहते हैं.

बख्शाली पांडुलिपि और शून्य का इतिहास

बोडेलियन पुस्तकालय (आक्सफोर्ड विश्वविद्यालय) ने बख्शाली पांडुलिपि की कार्बन डेटिंग के जरिए शून्य के प्रयोग की तिथि को निर्धारित किया है. पहले ये माना जाता रहा है कि आठवीं शताब्दी (800 AD) से शून्य का इस्तेमाल किया जा रहा था. लेकिन बख्शाली पांडुलिपि की कार्बन डेटिंग से पता चलता है कि शून्य का प्रयोग चार सौ साल पहले यानि की 400 AD से ही किया जा रहा था. बोडेलियन पुस्तकालय में ये पांडुलिपि 1902 में रखी गई थी.

‘फाइंडिंग जीरो’ एक मनोरंजक कहानी

‘फाइंडिंग जीरो’ एक मनोरंजक कहानी हो सकती है. यह कोई बौद्घिक खोज नहीं है बल्कि एक व्यक्तिगत खोज है. इसलिए शायद डॉ. एक्जेल को अंकों को लेकर बचपन से जिज्ञासा रही है.
डॉ. एक्जेल ने फ्रेंच आर्कियोलॉजिस्ट जार्ज कोइ‌ड्स से काफी कुछ सीखा. जार्ज कोइड्स ने 683 ईसा पूर्व से 605 ईसा पूर्व के बीच कंबोडिया के मंदिर के खंडहर शिलालेख का अनुवाद किया था. यह एक सराहनीय प्रयास था. पर इसके कुछ तथ्यों को नष्ट भी कर दिया गया था. जिसकी खोज के लिए बाद में डॉ. एक्जेल बाहर ने अपना काम शुरू किया था. इसके लिए उन्होंने थाइलैंड, कंबोडिया, लाओस और वियतनाम तक सुराग ढूंढने की कोशिश की.

इस बुक के क्लाइमेटिक दृश्य में बताया गया है कि कैसे और कहां पर डॉ. एक्जेल ने कितनी मेहनत और घंटों तक भटकने के बाद एक ऐसे शिलालेख के पास पहुंचते हैं, जहां एक शिलालेख के साथ एक बड़ा पत्‍थर आता है. यहीं वह शून्य है जो कहीं खो गया था. माना जाता है कि करीब एक सदी से यह खोया हुआ था.

डॉ एक्जेल की शून्य को खोजने की यात्रा काफी रोचक है. पर इस पर कही सवाल उठते हैं. उनकी कहानी संख्याओं को लेकर उनके जुनून को बताने के साथ-साथ कई आश्चर्य भी पैदा कर देती है. न्यूयॉर्क टाइम्स ने इस पर सवाल उठाए कि जो किताब में लिखा है वह अंतिम सत्य नहीं है. कहानी थोड़ी संदिग्‍ध लगती है.

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लेखक के बारे में

Author: Shaurya Punj

शौर्य पुंज डिजिटल मीडिया में पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर हैं. उन्हें न्यूज वर्ल्ड में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. शौर्य खबरों की नब्ज को समझकर उसे आसान और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. साल 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांसिंग की. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में दो महीने की इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन के लिए कार्य करना शुरू किया. उस समय उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस बिजनेस और एंटरटेनमेंट गॉसिप जैसी खबरों पर काम किया. साल 2020 में कोरोना काल के दौरान उन्हें लाइफस्टाइल, धर्म-कर्म, एजुकेशन और हेल्थ जैसे नॉन-न्यूज सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. उन्होंने लाइफस्टाइल कैटेगरी के कई महत्वपूर्ण सेक्शनों में योगदान दिया. Health & Fitness सेक्शन में डाइट, योग, वेट लॉस, मानसिक स्वास्थ्य और फिटनेस टिप्स से जुड़े उपयोगी कंटेंट पर कार्य किया. Beauty & Fashion सेक्शन में स्किन केयर, हेयर केयर, मेकअप और ट्रेंडिंग फैशन विषयों पर लेख तैयार किए. Relationship & Family कैटेगरी में पति-पत्नी संबंध, डेटिंग, पैरेंटिंग और दोस्ती जैसे विषयों पर जानकारीपूर्ण कंटेंट लिखा. Food & Recipes सेक्शन में हेल्दी फूड, रेसिपी और किचन टिप्स से संबंधित सामग्री विकसित की. Travel सेक्शन के लिए घूमने की जगहों, बजट ट्रिप और ट्रैवल टिप्स पर लेखन किया. Astrology / Vastu में राशिफल, वास्तु टिप्स और ज्योतिष आधारित कंटेंट पर काम किया. Career & Motivation सेक्शन में सेल्फ-इम्प्रूवमेंट, मोटिवेशन और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट विषयों पर योगदान दिया. Festival & Culture सेक्शन में त्योहारों की परंपराएं, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त से संबंधित कंटेंट पर कार्य किया. इसके अलावा Women Lifestyle / Men Lifestyle और Health Education & Wellness जैसे विषयों पर भी मर्यादित एवं जानकारीपूर्ण लेखन के माध्यम से योगदान दिया. साल 2023 से शौर्य ने पूरी तरह से प्रभातखबर.कॉम के धर्म-कर्म और राशिफल सेक्शन में अपना योगदान देना शुरू किया. इस दौरान उन्होंने दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों पर विशेष फोकस किया. साथ ही पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए सरल, सहज और जानकारीपूर्ण धार्मिक कंटेंट तैयार करने पर लगातार कार्य किया. रांची में जन्मे शौर्य की प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एण्ड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की. यह शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें हिंदी पत्रकारिता की वह विशेषज्ञता प्रदान करती है, जो पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे — के आधार पर प्रभावी और तथ्यपूर्ण समाचार लेखन के लिए आवश्यक मानी जाती है.

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