Guru Gobind Singh Jayanti 2024: इस गुरु गोबिंद सिंह जयंती पर जान लें खालसा पंथ के स्थापक से जुड़ी अनसुनी बातें

Guru Gobind Singh Jayanti 2024: हर साल पौष महीने के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को गुरु गोबिंद सिंह जी की जयंती मनाई जाती है. आज हम आपको गुरु गोबिंद सिंह के जीवन से जुड़ी 10 बड़ी बातें बताने वाले हैं, जिनके बारे में शायद आप अंजान हों

Guru Gobind Singh Jayanti 2022: नानकशाही कैलेंडर के अनुसार हर साल पौष महीने के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को गुरु गोबिंद सिंह जी की जयंती मनाई जाती है. आज हम आपको गुरु गोबिंद सिंह के जीवन से जुड़ी 10 बड़ी बातें बताने वाले हैं, जिनके बारे में शायद आप अंजान हों

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गुरु गोबिंद सिंह के जीवन से जुड़ी 10 बड़ी बातें –

  • गुरु गोबिंद सिंह का जन्‍म सिख धर्म के 9वें गुरु, गुरु तेग बहादुर और माता गुजरी के घर तख्त श्री पटना साहिब में हुआ था.

  • अपने पिता गुरु तेग बहादुर की शहादत के बाद मात्र 9 साल की उम्र में गुरु गोबिंद सिंह ने गुरु की जिम्मेदारी ली. धनुष- बाण, तलवार, भाला आदि चलाने की कला भी सीखी और फिर अपना पूरा जीवन लोगों की सेवा में गुजार दिया.

  • गुरु गोविंद सिंह ने पंच प्यारे और 5 ककार शुरु किए थे. खालसा पंथ में ही गुरु ने जीवन के पांच सिद्धांत बताए थे, इन्हीं को पांच ककार कहा जाता है – केश, कृपाण, कंघा, कड़ा और कच्छा. कहते हैं कि हर खालसा सिख को इसका पालन करना जरूरी है.

  • गुरु गोविंद सिंह जी ने ही खालसा वाणी, ‘वाहे गुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतह’ दिया था. गुरु की गरिमा बनाए रखने के लिए इन्होंने कई भाषाएं सीखी थी, जिन्में संस्कृत, फारसी, पंजाबी और अरबी शामिल है

  • गुरु गोबिंद सिंह दक्षिण सिरमुर, हिमाचल प्रदेश में यमुना नदी के किनारे एक शहर पांवटा गए थे. यहां पर उन्होंने पांवटा साहिब गुरुद्वारा की स्थापना की और सिख सिद्धांतों के बारे में प्रचार किया. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि पांवटा साहिब आज भी सिखों के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है. गुरु गोबिंद सिंह ने यहां 3 साल बिताए थे. इस दौरान उन्होंने कई ग्रंथ लिखे और अपने अनुयायियों की पर्याप्त संख्या भी एकत्र की.

  • सितंबर 1688 में गुरु गोबिंद सिंह ने भीम चंद, गढ़वाल के राजा फतेह खान और शिवालिक पहाड़ियों के अन्य स्थानीय राजाओं की एक संयुक्‍त सेना के खिलाफ भंगानी की लड़ाई लड़ी थी. उस समय उनकी उम्र सिर्फ 19 साल थी. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि लड़ाई एक दिन तक चली और हजारों लोगों की जान इस दौरान चली गई. एक और अहम बात आपको बता दें कि गुरु गोबिंद सिंह ने संयुक्‍त सेना को मात दी.

  • बिलासपुर की रानी के निमंत्रण पर गुरु गोबिंद सिंह नवंबर 1688 में आनंदपुर लौट आए थे, जो फिर बाद में चक नानकी के नाम से जाना जाने लगा.

  • गुरु गोबिंद सिंह ने 30 मार्च 1699 को अपने अनुयायियों को आनंदपुर में अपने घर पर इकट्ठा किया. उन्‍होंने एक स्वयंसेवक से अपने भाइयों के लिए अपना सिर बलिदान करने के लिए कहा. ये सुनकर एक अनुयायी जिनका नाम दया राम था फौरन इसके लिए तैयार हो गए. गुरु उन्हें एक तंबू के अंदर लेकर गए और एक खूनी तलवार के साथ बाहर निकले. उन्होंने फिर से एक स्वयंसेवक को बुलाया और फिर ऐसा ही किया. 5 बार ऐसा करने के बाद, आखिर में गुरु 5 स्वयंसेवकों के साथ तम्बू से निकले और तम्बू में 5 सिर कटी बकरियां मिलीं. इन 5 सिख स्वयंसेवकों को गुरु ने ‘पंज प्यारे’ या ‘पांच प्यारे’ के रूप में नामित किया.

  • साल 1699 की सभा में गुरु गोबिंद सिंह ने ‘खालसा वाणी’ की स्थापना की – “वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतेह”. उन्होंने अपने सभी अनुयायियों का नाम ‘सिंह’ रख दिया जिसका मतलब है शेर. उन्होंने खालसा के ‘5 ककार’ या सिद्धांतों की भी स्थापना की. ये हैं- केश, कंघा, कच्‍छा, कड़ा, कृपाण.

  • आपको मालूम हो कि गुरु गोबिंद सिंह ने खालसा और सिखों के धार्मिक ग्रंथ ‘गुरु ग्रंथ साहिब’ को ही सिखों के अगले गुरु के रूप में नामित किया था. बता दें कि गुरु गोबिंद सिंह ने 07 अक्टूबर 1708 को अपना शरीर छोड़ दिया था.

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लेखक के बारे में

Author: Shaurya Punj

शौर्य पुंज डिजिटल मीडिया में पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभातखबर.कॉम में सीनियर कंटेंट राइटर हैं. उन्हें न्यूज वर्ल्ड में 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है. शौर्य खबरों की नब्ज को समझकर उसे आसान और प्रभावी भाषा में पाठकों तक पहुंचाने में माहिर हैं. साल 2008 में ग्रेजुएशन के दौरान उन्होंने दैनिक हिंदुस्तान, प्रभात खबर, दैनिक जागरण और तरंग भारती (हिंदी पाक्षिक समाचार पत्र) के लिए फ्रीलांसिंग की. वर्ष 2011 में उन्होंने दैनिक जागरण के टैब्लॉइड समाचार पत्र iNext में दो महीने की इंटर्नशिप की. इसी दौरान उन्हें प्रभात खबर के डिजिटल सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. अप्रैल 2011 से उन्होंने प्रभातखबर.कॉम के एंटरटेनमेंट सेक्शन के लिए कार्य करना शुरू किया. उस समय उन्होंने बॉलीवुड फिल्म रिव्यू, बॉक्स ऑफिस बिजनेस और एंटरटेनमेंट गॉसिप जैसी खबरों पर काम किया. साल 2020 में कोरोना काल के दौरान उन्हें लाइफस्टाइल, धर्म-कर्म, एजुकेशन और हेल्थ जैसे नॉन-न्यूज सेक्शन में काम करने का अवसर मिला. उन्होंने लाइफस्टाइल कैटेगरी के कई महत्वपूर्ण सेक्शनों में योगदान दिया. Health & Fitness सेक्शन में डाइट, योग, वेट लॉस, मानसिक स्वास्थ्य और फिटनेस टिप्स से जुड़े उपयोगी कंटेंट पर कार्य किया. Beauty & Fashion सेक्शन में स्किन केयर, हेयर केयर, मेकअप और ट्रेंडिंग फैशन विषयों पर लेख तैयार किए. Relationship & Family कैटेगरी में पति-पत्नी संबंध, डेटिंग, पैरेंटिंग और दोस्ती जैसे विषयों पर जानकारीपूर्ण कंटेंट लिखा. Food & Recipes सेक्शन में हेल्दी फूड, रेसिपी और किचन टिप्स से संबंधित सामग्री विकसित की. Travel सेक्शन के लिए घूमने की जगहों, बजट ट्रिप और ट्रैवल टिप्स पर लेखन किया. Astrology / Vastu में राशिफल, वास्तु टिप्स और ज्योतिष आधारित कंटेंट पर काम किया. Career & Motivation सेक्शन में सेल्फ-इम्प्रूवमेंट, मोटिवेशन और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट विषयों पर योगदान दिया. Festival & Culture सेक्शन में त्योहारों की परंपराएं, पूजा विधि और शुभ मुहूर्त से संबंधित कंटेंट पर कार्य किया. इसके अलावा Women Lifestyle / Men Lifestyle और Health Education & Wellness जैसे विषयों पर भी मर्यादित एवं जानकारीपूर्ण लेखन के माध्यम से योगदान दिया. साल 2023 से शौर्य ने पूरी तरह से प्रभातखबर.कॉम के धर्म-कर्म और राशिफल सेक्शन में अपना योगदान देना शुरू किया. इस दौरान उन्होंने दैनिक राशिफल, साप्ताहिक एवं मासिक भविष्यफल, पूजा-पाठ, व्रत-त्योहार, शुभ मुहूर्त, ज्योतिषीय उपाय, वास्तु टिप्स और धार्मिक मान्यताओं से जुड़ी खबरों पर विशेष फोकस किया. साथ ही पाठकों की रुचि को ध्यान में रखते हुए सरल, सहज और जानकारीपूर्ण धार्मिक कंटेंट तैयार करने पर लगातार कार्य किया. रांची में जन्मे शौर्य की प्रारंभिक शिक्षा डीएवी पब्लिक स्कूल, हेहल, रांची से हुई. इसके बाद उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची से मास कम्यूनिकेशन एण्ड वीडियो प्रोडक्शन में बी.ए. ऑनर्स की डिग्री प्राप्त की. यह शैक्षणिक पृष्ठभूमि उन्हें हिंदी पत्रकारिता की वह विशेषज्ञता प्रदान करती है, जो पत्रकारिता के मूल सिद्धांत 5Ws और 1H — क्या, कौन, कहां, कब, क्यों और कैसे — के आधार पर प्रभावी और तथ्यपूर्ण समाचार लेखन के लिए आवश्यक मानी जाती है.

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