गिरिडीह के बगोदर में नशे की गिरफ्त में आ रहे लड़के, चोरी की घटनाओं को दे रहे अंजाम

बगोदर में इन दिनों कम उम्र के लड़के नशे की गिरफ्त में फंसते जा रहे हैं. नशा का समान सस्ता और सहज तरीके से मिलने से दिनों-दिन इन लड़कों की संख्या भी बढ़ रही है. ऐसे लड़के इलाके में छोटी-मोटी चोरी की घटनाओं को अंजाम भी दे रहे हैं.

बगोदर में इन दिनों कम उम्र के लड़के नशे की गिरफ्त में फंसते जा रहे हैं. नशा का समान सस्ता और सहज तरीके से मिलने से दिनों-दिन इन लड़कों की संख्या भी बढ़ रही है. ऐसे लड़के इलाके में छोटी-मोटी चोरी की घटनाओं को अंजाम भी दे रहे हैं. यह नशा फ्लूड का है. जो व्हाइटनर इरेज के रूप में मिलता है. यह जनरल स्टोर, स्टेशनरी आदि की दुकानों पर आसानी से मिल जाता है. इसको खरीदने पर किसी को शक भी नहीं होता है.

प्लास्टिक में डाल करते हैं इस्तेमाल

फ्लूड जो व्हाइटनर इरेज की शीशी के साथ थिनर के रूप में मिलता है. यह पानी की तरह शीशी में व्हाइट फ्लूड को पतला करने के लिए आता है. इसकी शीशी 40 रुपये से लेकर 60 रुपये तक में आसानी से मिल जाती है. वहीं कुछ बच्चे डेनड्रॉइड का भी इस्तेमाल नशे के लिए करते हैं. यह आसनी से महज दस से 20 रुपये मिल जाता है. डेन्ड्रॉइट एक तरह का चिपकाने वाला पदार्थ होता है, लेकिन उसे प्लास्टिक की थैली में डाल कर सूंघने से नशा लगता है.

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फ्लूड नशा करने वालों पर इसका असर

फ्लूड का नशा दिलो-दिमाग पर छा जाता है. इस प्रकार के नशे के आदि युवक पागलों की तरह हरकतें करने लगते है. धीरे धीरे नशे की लत उन्हें किसी काम का नहीं छोड़ती है. उनके सोचने समझने की शक्ति कम हो जाती है. इसके बाद नशे के आदी युवक गलत काम करने लगते हैं.

पीड़ित दुकानदारों ने की प्रशासन से कार्रवाई की मांग

विगत दो माह के भीतर ऐसे लड़के दो-तीन स्थानों पर छिटपुट खाने-पीने के फुटपाथी दुकानों को निशाना बना चुके हैं. भुक्तभोगी दुकानदारों ने इस तरह के सामान की बिक्री करने वाले दुकानों पर लगाम लगाने की बात कही है. इधर शाम ढलते ही बस पड़ाव, बगोदर स्टेडियम में भी मयखाने में तब्दील हो जाता है. स्थानीय लोगों ने प्रशासन से ऐसे युवकों पर कार्रवाई की मांग की है.

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