मुख्य बातें
Deepawali 2020 Date: 14 नवंबर 2020 को कार्तिक मास की अमावस्या के दिन दीपावली देशभर में मनाया जा रहा है. हिन्दू पंचांग के अनुसार दिवाली के दिन शुभ मुहूर्त में ही लक्ष्मी और गणेश की पूजा करने से सर्वसिद्धि की प्राप्ति होती है.
Deepawali 2020 Date: 14 नवंबर 2020 को कार्तिक मास की अमावस्या के दिन दीपावली देशभर में मनाया जा रहा है. हिन्दू पंचांग के अनुसार दिवाली के दिन शुभ मुहूर्त में ही लक्ष्मी और गणेश की पूजा करने से सर्वसिद्धि की प्राप्ति होती है.

दिवाली/लक्ष्मी पूजन की तिथि: 14 नवंबर 2020
अमावस्या तिथि प्रारंभ: 14 नवंबर 2020 को दोपहर 02 बजकर 17 मिनट से
अमावस्या तिथि समाप्त: 15 नवंबर 2020 को सुबह 10 बजकर 36 मिनट तक
लक्ष्मी पूजा मुहुर्त: 14 नवंबर 2020 को शाम 05 बजकर 28 मिनट से शाम 07 बजकर 24 मिनट तक
कुल अवधि: 01 घंटे 56 मिनट
– लक्ष्मी-गणेश जी के चांदी के सिक्के
– 5 सुपारी
– मां लक्ष्मी को अर्पित करने के लिए 21 कमलगट्टे
– प्रसाद के लिए पीले और सफेद रंग की मिठाई
– 5 पान के पत्ते, कटे-फटे न हो
– लौंग
– कपूर
– रोली और अक्षत
– फूल-माला
– फलों में शरीफा सबसे उत्तम रहता है
– नारियल और मां लक्ष्मी को अर्पित करने के लिए गंगा जल
– कुछ पैसों के सिक्के
– धूप-दीप
– चंदन, हल्दी, शहद इत्यादि.
धनतेरस के दिन मां लक्ष्मी और भगवान कुबेर को प्रसन्न करने के लिए पूजन के बाद रात को 21 चावल के दाने लाल कपड़े में बांधकर तिजोरी या पैसे रखने वाली जगह पर रखना चाहिए. कहते हैं कि ऐसा करने से समृद्धि आती है.
धनतेरस के दिन सोना खरीदने का शुभ मुहूर्त होता है. इस साल आप धनतेरस के दिन सुबह 06:42 बजे से शाम के 05:59 बजे तक सोना खरीद सकते है. इस बार सोना खरीदने के लिए कुल 11 घंटे 16 मिनट का समय है. इस समय पर सोना खरीदने से पूरे साल घर में शुभ कार्य संपन्न होते हैं. साथ ही घर में सुख-शांति और समृद्धि भी आती है.
धनतेरस के दिन अकाल मृत्यु से बचने के लिए प्रदोष काल में घर के बाहर यमराज के नाम एक दिया जलाया जाता है, जिसे ‘यम दीप’ या यम का दीपक भी कहते हैं. लोगों में ऐसी मान्यता है कि इससे यमराज प्रसन्न होते हैं और वे उस परिवार के सदस्यों की अकाल मृत्यु से रक्षा करते हैं.
धनतेरस के दिन दीपक जलाने का खास तरीका है. यदि आपके घर का मुख्य द्वार पश्चिम दिशा की तरफ है तो आपको तिल के तेल का दीपक जलाना चाहिए. साथ ही इस दीपक में काली किशमिश जरूर डालें.
धनत्रयोदशी (धनतेरस) से दीपोत्सव पर्व का प्रारंभ होता है. दिवाली पूजा हेतु लक्ष्मी-गणेश, खील-बतासे आदि इसी दिन खरीदे जाते हैं. कार, दोपहिया, सोने-चांदी के सिक्के खरीदना अत्यंश शुभ माना जाता है. इस दिन किसी को वस्तु उधार नहीं दी जानी चाहिए.
इस साल धनतेरस की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 28 मिनट से लेकर शाम 5 बजकर 59 मिनट के बीच है. इस शुभ मुहूर्त में भगवान धनवंतरि और धन के देवता कुबेर जी की पूजा की जाती है. भगवान धनवंतरि को विष्णु जी का वह रूप माना जाता है, जिनके हाथ में अमृत कलश हो.
अगर आपके घर का मुख्य द्वार दक्षिण दिशा में है तो आपको सोने या तांबे से बना सामान खरीदना चाहिए. वहीं अगर आपके घर का मुख्य द्वार अगर नैरेत्य कोण (Nairutya Kon) यानी दक्षिण-पश्चिम की तरफ है तो आपको चांदी या तांबे से बनी वस्तुएं खरीदनी चाहिए.
धनतेरस की खरीदारी में रंगों का भी बहुत महत्व होता है. काले रंग की वस्तुओं की खरीदारी सर्वथा वर्जित है। इस दिन गहरे नीले रंग से भी परहेज करें.
धनतेरस की खरीदारी में रंगों का भी बहुत महत्व होता है. काले रंग की वस्तुओं की खरीदारी सर्वथा वर्जित है। इस दिन गहरे नीले रंग से भी परहेज करें.
धनतेरस के दिन लोग भूल से कांच, प्लास्टिक या चीनी मिट्टी की वस्तुएं खरीद लेते हैं। ऐसा न करें। ये वस्तु शुभता का प्रतीक नहीं होती हैं।
दिवाली प्रकाश का पर्व है. ऐसे में धनतेरस के दिन मिट्टी के दीपक खरीदें. इसके बिना आपकी दिवाली पूरी नहीं होगी. बाजार में मिट्टी के दीपक में भी कई गुणवत्ता वाले दीपक हैं, जो आपकी जेब के अनुरुप हो, वे खरीदें.
धनतेरस के दिन झाड़ू जरूर खरीदें. झाड़ू को माता लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है. इससे दरिद्रता का नाश होता है. घर में सकारात्मकता का संचार होता है.
समुद्र मंथन के समय जब भगवान धन्वंतरि प्रकट हुए थे तब उनके हाथों में पीतल के कलश में अमृत था. ऐसी मान्यता है कि धन्वंतरि को पीतल बहुत प्रिय है, इसलिए धनतेरस के दिन पीतल की वस्तुएं खरीदना शुभ होता है.
धनतेरस के दिन आपको दिवाली के दिन होनी वाली लक्ष्मी पूजा के लिए माता लक्ष्मी तथा गणेश जी की मूर्ति खरीदनी चाहिए। यह आपके लिए सौभाग्य, सुखदायक और शुभता प्रदान करने वाला होगा। माता लक्ष्मी की धन वर्षा करती हुई मूर्ति दिवाली के लिए उपयुक्त मानी जाती है।
हिंदू मान्यताओं के अनुसार, धनतेरस या धन त्रयोदशी के दिन लोहा या उससे बनी सामग्री नहीं खरीदनी चाहिए. लोहा खरीदना अशुभ माना गया है.
अकाल मृत्यु से बचने के लिए धनतेरस के दिन प्रदोष काल में घर के बाहर यमराज के लिए एक दीपक जलाया जाता है. इसे यम दीपम या यम का दीपक भी कहा जाता है. ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से यमराज प्रसन्न होते हैं और वे उस परिवार के सदस्यों की अकाल मृत्यु से रक्षा करते हैं.
मां लक्ष्मी और भगवान गणेश की प्रतिमा, रोली, कुमुकम, अक्षत (चावल), पान, सुपारी, नारियल, लौंग, इलायची, धूप, कपूर, अगरबत्तियां, मिट्टी, दीपक, रूई, कलावा, शहद, दही, गंगाजल, गुड़, धनिया, फल, फूल, जौ, गेहूं, दूर्वा, चंदन, सिंदूर, पंचामृत, दूध, मेवे, खील, बताशे, जनेऊ, श्वेस वस्त्र, इत्र, चौकी, कलश, कमल गट्टे की माला, शंख, आसन, थाली. चांदी का सिक्का, चंदन, बैठने के लिए आसन, हवन कुंड, हवन सामग्री, आम के पत्ते प्रसाद.
सूर्यास्त के बाद यमराज के लिए दीपदान जरूर करना चाहिए.
पूजा में लगाए गए दीपक में गाय के घी का इस्तेमाल करना चाहिए.
भगवान धन्वंतरि को कृष्णा तुलसी, गाय का दूध और उससे बने मक्खन का भोग लगाना चाहिए
भगवान धन्वंतरि को पूजा सामग्री के साथ औषधियां चढ़ानी चाहिए. औषधियों को प्रसाद के तौर पर खाने से बीमारियां दूर होती हैं.
धनतेरस के दिन झाड़ू जरूर खरीदें. झाड़ू को माता लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है. इससे दरिद्रता का नाश होता है. मान्यता है कि धनतेरस के दिन झाड़ू खरीदने पर घर में सकारात्मकता का संचार होता है.
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समुद्र मंथन के समय जब भगवान धन्वंतरि प्रकट हुए थे तब उनके हाथों में पीतल के कलश में अमृत था. ऐसी मान्यता है कि धन्वंतरि को पीतल बहुत प्रिय है, इसलिए धनतेरस के दिन पीतल की वस्तुएं खरीदना शुभ होता है.
धनतेरस की खरीदारी आज रात से शुरू हो जाएगी, क्योंकि आज रात में त्रयोदशी तिथि लग जाएगी. इस दिन चांदी के सिक्के, आभूषण आदि की खरीदारी करना शुभ होता है. लक्ष्मी पूजा के दिन चांदी के इन वस्तुओं की पूजा करना चाहिए.
इस साल धनतेरस पूजा का अति शुभ मुहूर्त केवल 27 मिनट ही है. शाम 5:32 से 5:59 मिनट तक आप पूजा कर लें. इस दौरान पूजा करना फलदायी साबित होगा. यदि कोई इस समय दीपदान करता है तो अति शुभ होगा.
यदि आपके घर का मुख्य द्वार पश्चिम दिशा की तरफ है तो आपको तिल के तेल का दीपक जलाना चाहिए. साथ ही इस दीपक में काली किशमिश जरूर डालें.
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अकाल मृत्यु से बचने के लिए धनतेरस के दिन प्रदोष काल में घर के बाहर यमराज के लिए एक दीपक जलाया जाता है. इसे यम दीपम या यम का दीपक भी कहा जाता है. ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से यमराज प्रसन्न होते हैं और वे उस परिवार के सदस्यों की अकाल मृत्यु से रक्षा करते हैं.
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ऐसी मान्यता है कि धनतेरस के शुभ दिन पर सोना, चांदी और बर्तन खरीदने से पूरे साल संपन्नता बनी रहती है
धनतेरस पर संभलकर करें खरीददारी
लोहे के सामान खरीदने से बचें
कांच के सामान भूलकर भी न खरीदें
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धनतेरस पर बर्तन खरीदने की परंपरा काफी समय से चली आ रही है. स्टील भी लोहा का ही दूसरा रूप है इसलिए कहा जाता है कि स्टील के बर्तन भी धनतेरस के दिन नहीं खरीदने चाहिए. स्टील के बजाए कॉपर या ब्रॉन्ज के बर्तन खरीदे जाने चाहिए.
कांच का सामान का संबंध भी राहु ग्रह से होता है इसलिए धनतेरस के दिन कांच की चीजें नहीं खरीदनी चाहिए.
धनतेरस के दिन आपको दिवाली के दिन होनी वाली लक्ष्मी पूजा के लिए माता लक्ष्मी तथा गणेश जी की मूर्ति खरीदनी चाहिए. यह आपके लिए सौभाग्य, सुखदायक और शुभता प्रदान करने वाला होगा. माता लक्ष्मी की धन वर्षा करती हुई मूर्ति दिवाली के लिए उपयुक्त मानी जाती है.
धनतेरस के दिन अगर आप खरीदारी करने निकले हैं तो चाकू, कैंची व दूसरे धारदार हथियारों को खरीदने से बचना चाहिए.
शुक्रवार 13 नवंबर को शाम 05 बजकर 28 मिनट से शाम 05 बजकर 59 मिनट तक धनतेरस पूजा का शुभ मुहूर्त है. इस 30 मिनट की अवधि में आपको धनतेरस की पूजा कर लेनी चाहिए.
हिन्दी पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को धनतेरस का त्योहार होता है. इस वर्ष कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी तिथि का प्रारंभ 12 नवंबर दिन गुरुवार को रात 09 बजकर 30 मिनट से हो रहा है, जो 13 नवंबर दिन शुक्रवार को शाम 05 बजकर 59 मिनट तक है.
12 नंवबर को : सुबह 11:20 से 12:04 तक अभिजीत मुहूर्त
13 नंवबर को : सुबह 11:20 से 12:04 तक अभिजीत मुहूर्त
धनतेरस के दिन काले रंग की चीजों को घर लाने से बचना चाहिए. धनतेरस एक बहुत ही शुभ दिन है, जबकि काला रंग हमेशा से दुर्भाग्य का प्रतीक माना गया है. इसलिए धनतेरस पर काले रंग की चीजें खरीदने से बचें.
धनतेरस पर कुछ लोग प्लास्टिक की बनी चीजें घर ले आते हैं. बता दें कि प्लास्टिक बरकत नहीं देता है. इसलिए धनतेरस पर प्लास्टिक से बना किसी भी तरह का सामान घर न लेकर आएं.
ज्योतिष के अनुसार, लोहे को शनिदेव का कारक माना जाता है. इसलिए लोहे से बनी चीजों को धनतेरस पर भूलकर भी खरीदने की गलती न करें. ऐसा करने से त्योहार पर धन कुबेर की कृपा नहीं होती है.
धनतेरस पर कुछ लोग एल्यूमिनियम के बर्तन या सामान भी खरीद लेते हैं. इस धातु पर भी राहु का प्रभाव अधिक होता है. एल्यूमिनियम को दुर्भाग्य का सूचक माना गया है. त्योहार पर एल्यूमिनियम की कोई भी नई चीज घर में लाने से बचें.
वास्तु के अनुसार आर्थिक समृद्धि के लिए घर की उत्तर दिशा में धनतेरस के दिन कलश में जल और उसमें एक चांदी का सिक्का डाल दें. इससे धन की बचत होती है.
धनतेरस में कलश,हल्दी की गांठ, झाड़ू खरीदना बहुत शुभ होता है। झाड़ू खरीदने के पीछे कहा जाता है कि धनतेरस के दिन घर की सफाई कर पुरानी झाड़ू की जगह नई झाड़ू लानी चाहिए. इसलिए इस दिन झाड़ू खरीदना शुभ माना जाता है। इस दिन धनिया के बीज, सोना-चांदी, धातु के बर्तन खासकर पीतल के बर्तन खरीदना भी बहुत शुभ होता है. इस दिन कलश खरीदना भी अच्छा रहता है. धनतेरस के दिन अगर आप बर्तन लाते हैं तो उन्हें खाली नहीं रखना चाहिए. पूजा से पहले उनमें जलभरकर रखना चाहिए.
धनतेरस के दिन यदि आप कोई बर्तन या इस्तेमाल करने का सामान खरीद रहे हैं तो ध्यान रखें कि उसे घर में खाली न लेकर आएं. घर में बर्तन लाने से पहले इसे पानी, चावल या किसी दूसरी सामग्री से भर लें.
इस दिन शीशे की भी खरीदारी नहीं करनी चाहिए. ऐसी मान्यता है कि इससे राहु की दृष्टि आप पर बनी रहती है जिससे घरेलू परेशानियां बढ़ सकती है. धनतेरस के दिन शीशे का बर्तन भूलकर भी नहीं खरीदना चाहिए.
लोहे को शनिदेव का कारक माना जाता है. इसलिए लोहे से बनी चीजों को धनतेरस पर भूलकर भी खरीदने की गलती न करें. ऐसा करने से धन पर कुबेर की कृपा नहीं होती है.
धनतेरस के दिन चित्रा नक्षत्र और आयुष्मान योग भी बन रहा है. धनतेरस के दिन आयुष्मान योग में भगवान धनवंतरि की पूजा करना बहुत फलदायी माना गया है. इस बार धनतेरस पर मृदु और मित्र संज्ञक नक्षत्र का योग बन रहा है. इस नक्षत्र में सोना, चांदी और बर्तन खरीदना बहुत शुभ रहेगा.
धनतेरस के दिन खील-बताशे की खरीदारी करना भी बेहद शुभ माना जाता है. इन खील-बताशे का प्रयोग दिवाली के दिन पूजा में किया जाता है.
धनतेरस के दिन विवाहित महिलाओं को सोलह श्रृंगार का तोहफा देना शुभ माना जाता है. इसके अलावा लाल रंग की साड़ी और सिंदूर देना भी अच्छा माना जाता है. इससे भी लक्ष्मी मां प्रसन्न होती हैं.
धनतेरस पर कुछ लोग प्लास्टिक की बनी चीजें घर ले आते हैं. बता दें कि प्लास्टिक बरकत नहीं देता है. इसलिए धनतेरस पर प्लास्टिक से बना किसी भी तरह का सामान नहीं खरीदना चाहिए.
धनतेरस के दिन काले रंग की चीजों को घर लाने से बचना चाहिए. धनतेरस एक बहुत ही शुभ दिन है, जबकि काला रंग हमेशा से दुर्भाग्य का प्रतीक माना गया है. इसलिए धनतेरस पर काले रंग की चीजें खरीदने से बचें.
धनतेरस पर कुछ लोग कांच के बर्तन या दूसरी चीजें खरीदते हैं. कांच का संबंध राहु से माना जाता है, इसलिए धनतेरस के दिन इसे खरीदने से बचना चाहिए. इस दिन कांच की चीजों का इस्तेमाल भूलकर भी नहीं करना चाहिए.
धनतेरस के दिन यदि आप तेल या घी जैसी चीजें खरीदने जा रहे हैं तो थोड़ा सतर्क रहिए. ऐसी चीजों में मिलावट हो सकती है और इस दिन अशुद्ध चीजें खरीदने से बचना चाहिए. यदि आप घर में रिफाइंड का इस्तेमाल करते हैं तो वो भी इस दिन खरीदने से बचें.
धनतेरस के दिन धारदार वस्तुएं खरीदने से बचें. इस दिन चाकू, कैंची या कोई धारदार हथियार की खरीदारी नहीं करनी चाहिए. धनतेरस पर इन चीजों को खरीदना शुभ नहीं माना जाता है.
धनतेरस पर कुछ लोग एल्यूमिनियम के बर्तन या सामान भी खरीद लेते हैं. इस धातु पर भी राहु का प्रभाव अधिक होता है. एल्यूमिनियम को दुर्भाग्य का सूचक माना गया है, इसलिए धनतेरस पर एल्यूमिनियम की कोई भी नई चीज घर में नहीं लानी चाहिए.
धनतेरस के दिन कुछ न कुछ सामान की खरीदारी करने की मान्यता है. इस दिन बहुत से लोग स्टील के बर्तनों की खरीदारी करते है, जबकि ऐसा करने से बचना चाहिए. स्टील शुद्ध धातु नहीं है. इस पर राहु का प्रभाव भी ज्यादा होता है. आपको सिर्फ प्राकृतिक धातुओं की ही खरीदारी करनी चाहिए. मानव निर्मित धातु में से केवल पीतल खरीदा जा सकता है.
धनतेरस के दिन नकली मूर्तियों की पूजा भूलकर भी नहीं करना चाहिए. इस दिन सोने, चांदी या मिट्टी की बनी हुई मां लक्ष्मी की मूर्ति की पूजा करें. स्वास्तिक और ऊं जैसे प्रतीकों को कुमकुम, हल्दी या किसी शुभ चीज से बनाएं. नकली प्रतीकों को घर में ना लाएं.
धनतेरस के दिन किसी भी व्यक्ति को उधार नहीं देना चाहिए. मान्यता है कि इस दिन अपने घर से लक्ष्मी का प्रवाह बाहर नहीं होने देना चाहिए. ऐसा करने से आप पर देनदारी और कर्ज का भार पड़ सकता है.
धनतेरस के दिन शीशे का बर्तन भूलकर भी नहीं खरीदना चाहिए. मान्यता है कि इस दिन शीशे के बर्तन खरीदने पर काफी नुकसान होता है. धनतेरस के दिन सोने चांदी की कोई चीज या नए बर्तन खरीदने पर अत्यंत शुभ माना जाता है और घर में सुख-समृद्धि आती है.
अगर आप धनतेरस पर सिर्फ कुबेर की पूजा करने वाले हैं तो ये गलती ना करें, क्योंकि ऐसा करने पर आप पूरे साल परेशान रह सकते है. धनतेरस के दिन कुबेर के साथ माता लक्ष्मी और भगवान धन्वंतरि की भी उपासना जरूर करें वरना पूरे साल बीमार रहेंगे.
धनतेरस का पर्व धन और आरोग्य से जुड़ा हुआ है. धन के लिए इस दिन कुबेर की पूजा की जाती है और आरोग्य के लिए धनवन्तरि की पूजा की जाती है. इस दिन मूल्यवान धातुओं, नए बर्तनों और आभूषणों की खरीदारी का विशेष विधान होता है. धनतेरस पर कुछ सावधानियां बरतनी जरूरी हैं.
धनतेरस के दिन कुबेर देवता के साथ धन की देवी लक्ष्मी और भगवान गणेश की पूजा की जाती है. इस दिन किसी भी वस्तु को खरीदना शुभ माना जाता है. कुबेर देवता लोगों को धन और समृद्धि प्रदान करने वाले हैं.
इस साल धनरेसत की पूजा का शुभ मुहूर्त शाम 5 बजकर 32 मिनट से शुरू होकर 5 बजकर 59 मिनट तक रहेगा. इस बार महज 27 मिनट के इस शुभ मुहूर्त में पूजा करना फलदायी माना जाएगा. इसी वक्त अगर कोई दीपदान करता है तो भी शुभ होगा. जानकारी के लिए बता दें कि 13 नवंबर को धनतेरस पर खरीदारी के लिए पहला मुहूर्त सुबह 7 से 10 बजे तक है. जबकि दूसरा शुभ मुहूर्त दोपहर 1 से 2.30 बजे तक रहेगा.
निर्धनता दूर करने के लिए अपने पूजाघर में धनतेरस की शाम को अखंड दीपक जलाना चाहिए, जो दीपावली की रात तक जरूर जलता रहे. अगर दीपक भैयादूज तक अखंड जलता रहे तो घर के सारे वास्तुदोष भी समाप्त हो जाते हैं और आपके घर से सारी नेगेटिव एनर्जी दूर हो जाती है.
धनतेरस के दिन प्रसाद में और भगवान को अर्पित करने के लिए खील-बताशे, फल, मेवा, मिष्ठान आदि पूजन में शामिल कर लें.
सुबह 06.01 से 7.30 बजे तक शुभ
सुबह 07.31 से 9.00 बजे तक रोग
सुबह 09.01 से 10.30 बजे तक उद्वेग
सुबह 10.31 से 12.00 बजे तक चर
दोपहर 12.01 से 1.30 बजे तक लाभ
दोपहर 01.31 से 03.00 बजे तक अमृत
दोपहर 03.01 से 04.30 बजे तक काल
शाम 04.31 से 06.00 बजे तक शुभ
प्रात: 06:00 से 07:30 तक चर
प्रातः 07:30 से 09:00 तक लाभ
प्रातः 09:00 से 10:30 बजे तक अमृत
प्रातः10:30 बजे से 12:00 बजे तक काल
दोपहरः 12:00 से 01:30 बजे तक शुभ
दोपहरः 01:30 से 03:00 बजे तक रोग
दोपहरः 03:00 से 04:30 बजे तक उद्वेग
शामः 04:30 से 06:00 तक चर
कल रात में त्रयोदशी तिथि लग जाएगी. कल शाम के समय धनतेरस की खरीदारी की जा सकती है. वहीं, 13 नवंबर दिन शुक्रवार को धनतेरस का पर्व मनाया जाएगा.
धनतेरस के दिन शाम के समय उत्तर दिशा में कुबेर, धन्वंतरि भगवान और मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है. पूजा के समय घी का दीपक जलाएं. कुबेर को सफेद मिठाई और भगवान धन्वंतरि को पीली मिठाई चढ़ाएं. पूजा करते समय “ॐ ह्रीं कुबेराय नमः” मंत्र का जाप करें. इसके बाद “धन्वन्तरि स्तोत्र” का पाठ करें. धन्वान्तारी पूजा के बाद भगवान गणेश और माता लक्ष्मी की भी पूजा करें. भगवान गणेश और माता लक्ष्मी के लिए मिट्टी का दीपक जलाएं. उन्हें फूल चढ़ाएं और मिठाई का भोग लगाएं.
धनतेरस के दिन यम के नाम दीप जलाया जाता है. इस दिन दीपक जलाने से पहले पूजा की जाती है. किसी लकड़ी के बेंच या जमीन पर तख्त रखकर रोली से स्वास्तिक का निशान बनायें. फिर मिट्टी या आटे के चौमुखी दीपक को उस पर रख दें. दीप पर तिलक लगाएं. चावल और फूल चढ़ाएं. चीनी डालें. इसके बाद 1 रुपये का सिक्का डालें और परिवार के सदस्यों को तिलक लगाएं. दीप को प्रणाम कर उसे घर के मुख्य द्वार पर रख दें. ये ध्यान दें कि दीपक की लौ दक्षिण दिशा की तरफ हो. क्योंकि ये यमराज की दिशा मानी जाती है. ऐसा करने से अकाल मृत्यु टल जाती है.
21 कमल बीज, ग्यारह दीपक, मणि पत्थर के 5 प्रकार, 5 सुपारी, लक्ष्मी-गणेश के सिक्के ये 10 ग्राम या अधिक भी हो सकते हैं, पत्र, अगरबत्ती, चूड़ी, तुलसी, पान, सिक्के, काजल, चंदन, लौंग, नारियल, दहीशरीफा, धूप, फूल, चावल, रोली, गंगा जल, माला, हल्दी, शहद, कपूर, खील, बताशे, मिठाई, वस्त्र, आभूषण, चन्दन का लेप, सिन्दूर, कुंकुम, सुपारी, पान फूल, दुर्वा, चावल, लौंग, इलायची, केसर-कपूर, हल्दी-चूने का लेप, सुगंधित पदार्थ, धूप, अगरबत्ती, एक दीपक पूजा थाली में रखें.
इस बार धनतेरस 13 नवंबर को मनाई जाएगी. कल रात में त्रयोदशी तिथि शुरू हो जाएगी. धनतेरस पर व्यापारी लोग भी अपनी दुकान और व्यापार की जगह में पूजा कर मां लक्ष्मी की अराधना करते हैं. इस दिन कुछ खास चीजों को घर में खरीदकर लाना बहुत ही शुभ होता है. माना जाता है कि इस दिन इन चीजों को खरीदने से घर में सुख-समृद्धि आती है.
धनतरेस के दिन घर में झाड़ू खरीदकर लाएं एवं शुभ मुहूर्त में पूजन करें. इसके साथ ही रात में घर, दुकान और ऑफिस में दीप जलाने चाहिए. इस दिन लोग बर्तन, आभूषण आदि भी खरीदकर लाते हैं. इस दिन लोहे का सामान नहीं खरीदना चाहिए. इस दिन अपने सामर्थ्य के अनुसार धातु के बर्तन एवं कलश ही खरीदना चाहिए. इस दिन घर, आफिस, दुकान, प्रतिष्ठान को को साफ कर अच्छे से दीपक जलाना चाहिए. धनतेरस पर शुभ मुहूर्त में सूखे धनिए के बीज खरीदकर घर मे रखने से परिवार में धन संपदा बढ़ती है. इस दिन सुबह सवेरे उठकर माता लक्ष्मी, कुबेर एवं धन्वन्तरि महाराज की पूजा करें.
13 नवंबर दिन शुक्रवार की सुबह 5 बजकर 59 मिनट से 10 बजकर 06 मिनट तक
13 नवंबर दिन शुक्रवार की सुबह 11 बजकर 08 मिनट से दोपहर 12 बजकर 51 मिनट तक
13 नवंबर दिन शुक्रवार की दोपहर 3 बजकर 38 मिनट से शाम 05 बजे तक
News posted by : Radheshyam kushwaha
Deepawali 2020 Date: 14 नवंबर 2020 को कार्तिक मास की अमावस्या के दिन दीपावली देशभर में मनाया जा रहा है. हिन्दू पंचांग के अनुसार दिवाली के दिन शुभ मुहूर्त में ही लक्ष्मी और गणेश की पूजा करने से सर्वसिद्धि की प्राप्ति होती है.