अजब-गजब की कार : AI बेस्ड होवर कार बनाने जा रहा है China, जानें कब आएगी बाजार में

एआई ने 2073 में आने वाली सुपरकार के बारे में भविष्यवाणी की है. इस कार में ऐसे फीचर्स होंगे, जो लोगों को हैरान कर देंगे. हालांकि, आज के समय में कार निर्माता कंपनियों की ओर से पेश की जाने वाली कारों में एक से बढ़कर एक एडवांस्ड फीचर्स मौजूद हैं.

Ajab-Gajab Ki Car : दुनिया करिश्माई खोजों का जखीरा है. रोजाना आदमी कोई न कोई ऐसी खोज कर ही डालता है, जो लोगों को चौंका देती है और लोग सोचने के लिए मजबूर हो जाते हैं. आज आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) या कृत्रिम मेधा का जमाना है. यह न केवल शोधकर्ताओं को आसानी से कंटेंट मुहैया कराता है, बल्कि वैज्ञानिक शोधों में भी मदद करने का दावा किया जा रहा है. इस एआई के माध्यम से आप वे सारे सपनों को अपनी आंखों के सामने साकार होते हुए देख सकते हैं, जिसे कभी आप रात में सोते समय देखते होंगे. अक्सरहां, बचपन में या किसी भी उम्र में आप खुद को हवा में उड़ते हुए देखते होंगे या फिर आप वैसी कार को चला रहे होंगे, जो जमीन से कुछ फुट की ऊंचाई पर उड़ रही होगी. चलिए, आपने अपने रात के सपनों में ये सब नहीं देखा, लेकिन हॉलीवुड की जेम्स बॉन्ड की जासूसी पिक्चर को तो देखी ही होगी, जिसमें जेम्स बॉन्ड कभी पानी पर तो कभी हवा में कार चलाते हुए दिखाई देते हैं? अब यह सब फिल्मों या सपनों का करिश्मा बनकर नहीं रहेगा, बल्कि एआई के माध्यम से इन पर काम भी शुरू हो गया है और अब भविष्य की होवर कार बनाने पर शोध शुरू हो गया है. यह शोध भारत के पड़ोसी देश चीन में शुरू हुआ है.

मीडिया की रिपोर्ट की मानें, तो एआई ने 2073 में आने वाली सुपरकार के बारे में भविष्यवाणी की है. इस कार में ऐसे फीचर्स होंगे, जो लोगों को हैरान कर देंगे. हालांकि, आज के समय में कार निर्माता कंपनियों की ओर से पेश की जाने वाली कारों में एक से बढ़कर एक एडवांस्ड फीचर्स मौजूद हैं, लेकिन जिन फीचर्स के बारे में एआई ने भविष्यवाणी की है, उसके बारे में हम आप सोच भी नहीं सकते. एआई की भविष्यवाणी को मानें, तो आज से करीब 50 साल बाद वर्ष 2073 तक दुनिया में होवर कारें आ जाएंगी. एआई बताता है कि इनकी स्पीड ऐसी होगी कि पलक झपकते ये आपकी नजरों से दूर हो जाएंगी.

होवर कार पर काम कर रहा है चीन

एआई ने 50 साल बाद आने वाली जिस होवर कार की भविष्यवाणी की है, चीन ठीक उसी प्रकार की कारों पर काम करना शुरू कर दिया है. मीडिया की रिपोर्ट में कहा जा रहा है कि ये ऐसी कारें होंगी, जिनमें चक्के नहीं होंगे. ये कारें स्टार्ट होते ही हवा में उड़ने लगेगी. ये बिना किसी ड्राइवर के फुल स्पीड में दौड़ेगी. लोग इस कार में बैठते ही अपने गंतव्य तक पहुंच जाएंगे. दावा यह भी किया जा रहा है कि चीन में बनने वाली ये कारें हवा से बात करेंगी.

कैसी होती है होवर कार

होवर कार एक ऐसी गाड़ी है, जो जमीन से कुछ मीटर की ऊंचाई पर उड़ती है. इसका इस्तेमाल प्राइवेट ट्रांसपोर्ट के तौर पर किया जाता है. हालांकि, यह विज्ञान की कथाओं जैसी लगती है, लेकिन पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल के विपरीत काम करते हुए हवा में सफर करती है. इसमें ऐसे यंत्रों का इस्तेमाल किया जाता है, जो गुरुत्वाकर्षण बल के विपरीत काम करते हैं और कार को हवा में ऊपर उठाने में मदद करते हैं. ऐसी गाड़ियां सड़कों के किनारे कतार में लगे मैग्नेटिक प्लेटों इर्द-गिर्द मंडराते रहते हैं, जो मैग्लेव के समान सिद्धांत पर काम करते हैं. इससे जमीन के ऊपर मंडराने के लिए टायरों की जरूरत नहीं पड़ती.

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सबसे पहले कब आया था कॉन्सेप्ट

एआई के माध्यम से आज जिस होवर कार को बनाने की बात की जा रही है, उसकी अवधारणा को वर्ष 1958 में ही पेश किया गया था. मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल 1958 में फोर्ड इंजीनियरों ने ग्लाइड-एयर का प्रदर्शन किया था, जिसमें चक्के नहीं लगाए गए थे और यह करीब एक मीटर यानी तीन फुट लंबा मॉडल था. यह अपने टेबल टॉप रोडबेड से केवल 76.2 यूएम ( 3⁄1000 इंच) ऊपर हवा की एक पतली परत पर सफर करता है. इसके बाद फोर्ड ने वर्ष 1959 में एक होवरक्राफ्ट कॉन्सेप्ट कार और फोर्ड लेवाकर मैक I को प्रदर्शित किया था.

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लेखक के बारे में

By KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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