Chaitra Navratri 2021 Puja Timing, Vidhi: अमृतसिद्धि और सर्वार्थसिद्धि योग कुछ घंटों में हो जाएगा समाप्त, ऐसे करें कलश स्थापना, जानें मां शैलपुत्री पूजा विधि, मंत्र, आरती
Chaitra Navratri 2021, Ma Durga Puja Vidhi, Kalash Sthapana Vidhi, Samagri List: हिंदू पंचांग के मुताबिक इस बार नौ दिनों का चैत्र नवरात्र 13 अप्रैल, मंगलवार से शुरू हो रहा है. हर वर्ष चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से बासंतिक या चैत्र नवरात्रि के आरंभ होने की परंपरा है. इस दौरान मां दुर्गा के सभी नौ स्वरूपों का नौ दिनों तक व्रत रखा जाता है. पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा से पहले घटस्थापना या कलश स्थापना होता है. ऐसे में आइये जानते है. कलश स्थापना विधि, शुभ मुहूर्त, मंत्र, सभी स्वरूपों की तिथि, व पूजन विधि व अन्य डिटेल्स...
By Prabhat Khabar Digital Desk | Updated at :
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11:30 AM. 13 Apr 2111:30 AM. 13 Apr
देवी ब्रह्मचारिणी स्त्रोत
तपश्चारिणी त्वंहि तापत्रय निवारणीम्.
ब्रह्मरूपधरा ब्रह्मचारिणी प्रणमाम्यहम्॥
शङ्करप्रिया त्वंहि भुक्ति-मुक्ति दायिनी.
शान्तिदा ज्ञानदा ब्रह्मचारिणी प्रणमाम्यहम्॥
11:30 AM. 13 Apr 2111:30 AM. 13 Apr
देवी ब्रह्मचारिणी ध्यान
वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्.
जपमाला कमण्डलु धरा ब्रह्मचारिणी शुभाम्॥
गौरवर्णा स्वाधिष्ठानस्थिता द्वितीय दुर्गा त्रिनेत्राम्.
या देवी सर्वभूतेषु माँ शैलपुत्री रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥
11:30 AM. 13 Apr 2111:30 AM. 13 Apr
मां शैलपुत्री प्रार्थना
वन्दे वाञ्छितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥
11:30 AM. 13 Apr 2111:30 AM. 13 Apr
देवी ब्रह्मचारिणी प्रार्थना
दधाना कर पद्माभ्यामक्षमाला कमण्डलू.
देवी प्रसीदतु मयि ब्रह्मचारिण्यनुत्तमा॥
11:30 AM. 13 Apr 2111:30 AM. 13 Apr
देवी ब्रह्मचारिणी मंत्र
ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥
Om Devi Brahmacharinyai Namah॥
11:30 AM. 13 Apr 2111:30 AM. 13 Apr
क्या है ब्रह्मचारिणी पूजा का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार जिसकी कुंडली में मंगल की स्थिति खराब होती है उन्हें देवी ब्रह्मचारिणी की विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए. जैसा कि ज्ञात हो मंगल कमजोर होने शादी-ब्याह में भी दिक्कतें आती है.
11:30 AM. 13 Apr 2111:30 AM. 13 Apr
मां ब्रह्मचारिणी का इतिहास
धार्मिक मान्यताओं की मानें तो मां कुष्मांडा रूप के बाद जब देवी माता पार्वती ने दक्ष प्रजापति के घर जन्म लिया था तो उनके अविवाहित रूप को ही मां ब्रह्मचारिणी माना गया.
11:30 AM. 13 Apr 2111:30 AM. 13 Apr
मां शैलपुत्री पूजा विधि और महत्व
मां शैलपुत्री को सफेद वस्तुएं पसंद होती हैं,
ऐसे में पूजा करते समय उन्हें सफेद वस्त्र या सफेद फूल जरूर अर्पित करें
भोग के तौर पर भी उन्हें सफेद मिष्ठान अर्पित करना बेहद फलदायी माना गया है
मां शैलपुत्री की पूजा विधि पूर्वक करने से मनोवांछित फल मिलते है.
कुंवारी कन्याओं को विशेष तौर पर इनकी पूजा करनी चाहिए, इससे उत्तम वर की प्राप्ति होती है
शैल का अर्थ होता है पत्थर या पहाड़ होता है
इनका व्रत रखने से जीवन में स्थिरता और दृढ़ता आती है
11:30 AM. 13 Apr 2111:30 AM. 13 Apr
सती और शैलपुत्री की पूरी कहानी
पौराणिक कथाओं की मानें तो एक बार राजा दक्ष के स्वागत के लिए सभी लोग सम्मान में खड़े हो गए. लेकिन, भगवान शिव शंकर अपने स्थान पर खड़े नहीं हुए. यह देखकर राजा दक्ष को अपमानित महसूस हुआ. आपको बता दें कि दक्ष की पुत्री सती थी. दक्ष ने इस अपमान का बदला लेने की ठानी और घर पर एक बड़े यज्ञ का आयोजन किया, जिसमें सभी देवी-देवताओं को बुलाया, लेकिन शिव जी नहीं.
बावजूद इसके सती की जिद्द पर भगवान शिव ने उन्हें यज्ञ में जाने की अनुमति दे दी. जब वहां पहुंचीं, तो मां के अलावा किसी ने ध्यान नहीं दिया, सबने अनदेखा किया और पिता दक्ष ने भगवान शंकर के लिए अपमानजनक शब्द बोला. जिसे सुन मां सती को रहा नहीं गया और वे यज्ञ वेदी में कूदकर अपने प्राण त्याग दी. इसके बाद उनका अगला जन्म शैलराज हिमालय की पुत्री के रूप में हुआ जहां उनका नाम शैलपुत्री रखा गया.
11:30 AM. 13 Apr 2111:30 AM. 13 Apr
जय अम्बे गौरी (Jai Ambe Gauri)
जय अम्बे गौरी मैया जय मंगल मूर्ति ।
तुमको निशिदिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिव री ॥टेक॥
मांग सिंदूर बिराजत टीको मृगमद को ।
उज्ज्वल से दोउ नैना चंद्रबदन नीको ॥जय॥
कनक समान कलेवर रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गल माला कंठन पर साजै ॥जय॥
केहरि वाहन राजत खड्ग खप्परधारी ।
सुर-नर मुनिजन सेवत तिनके दुःखहारी ॥जय॥
कानन कुण्डल शोभित नासाग्रे मोती ।
कोटिक चंद्र दिवाकर राजत समज्योति ॥जय॥
शुम्भ निशुम्भ बिडारे महिषासुर घाती ।
धूम्र विलोचन नैना निशिदिन मदमाती ॥जय॥
चौंसठ योगिनि मंगल गावैं नृत्य करत भैरू।
बाजत ताल मृदंगा अरू बाजत डमरू ॥जय॥
भुजा चार अति शोभित खड्ग खप्परधारी।
मनवांछित फल पावत सेवत नर नारी ॥जय॥
कंचन थाल विराजत अगर कपूर बाती ।
श्री मालकेतु में राजत कोटि रतन ज्योति ॥जय॥
श्री अम्बेजी की आरती जो कोई नर गावै ।
कहत शिवानंद स्वामी सुख-सम्पत्ति पावै ॥जय॥
11:30 AM. 13 Apr 2111:30 AM. 13 Apr
अम्बे तू है जगदम्बे काली…(Maa Durga Aarti Lyrics)
अम्बे तू है जगदम्बे काली, अम्बे तू है जगदम्बे काली।।
जय दुर्गे खप्पर वाली, तेरे ही गुण गाये भारती ।।
ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती ॥
तेरे भक्त जनो पर, भीर पड़ी है भारी मां।।
दानव दल पर टूट पड़ों, मां करके सिंह सवारी।।
सौ-सौ सिंहो से बलशाली, अष्ट भुजाओ वाली।।
दुष्टो को पलमे संहारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती ॥
मां बेटे का है इस जग में, बड़ा ही निर्मल नाताद्ध।।
पूत कपूत सुने है पर न, माता सुनी कुमाता ॥
सब पे करूणा दरसाने वाली, अमृत बरसाने वाली।।
दुखियो के दुखडे निवारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती ॥
नहीं मांगते धन और दौलत, न चांदी न सोना मां ।।
हम तो मांगे मां तेरे मन में, इक छोटा सा कोना ॥
सबकी बिगड़ी बनाने वाली, लाज बचाने वाली।।
सतियों के सत को सवांरती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती ॥
चरण शरण मे खड़े तुम्हारी, ले पूजा की थाली ।।
वरद हस्त सर पर रख दो, मां सकंट हरने वाली ।।
मं भर दो भक्ति रस प्याली, अष्ट भुजाओ वाली ।।
भक्तों के कारज तू ही सारती, ओ मैया हम सब उतारे तेरी आरती ॥
11:30 AM. 13 Apr 2111:30 AM. 13 Apr
कौन है मां शैलपुत्री
हिमालय पर्वत पूत्री के रूप में जन्मी देवी ही मां शैलपुत्री है. दरअसल, शैल का संस्कृत में अर्थ होता है पर्वत. जो उनके पिता थे. अत: उन्हीं के नाम पर देवी शैलपुत्री का नामांकरण हुआ.
11:30 AM. 13 Apr 2111:30 AM. 13 Apr
देवी शैलपुत्री का मंत्र जाप
ॐ देवी शैलपुत्र्यै नमः॥
(Om Devi Shailaputryai Namah॥)
11:30 AM. 13 Apr 2111:30 AM. 13 Apr
नमो नमो दुर्गे सुख करनी….यहां से पढ़ें दुर्गा चालीसा
नमो नमो दुर्गे सुख करनी।
नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी॥
निरंकार है ज्योति तुम्हारी।
तिहूं लोक फैली उजियारी॥
शशि ललाट मुख महाविशाला।
नेत्र लाल भृकुटि विकराला॥
रूप मातु को अधिक सुहावे।
दरश करत जन अति सुख पावे॥
तुम संसार शक्ति लै कीना।
पालन हेतु अन्न धन दीना॥
अन्नपूर्णा हुई जग पाला।
तुम ही आदि सुन्दरी बाला॥
प्रलयकाल सब नाशन हारी।
तुम गौरी शिवशंकर प्यारी॥
शिव योगी तुम्हरे गुण गावें।
ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें॥
रूप सरस्वती को तुम धारा।
दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा॥
धरयो रूप नरसिंह को अम्बा।
परगट भई फाड़कर खम्बा॥
रक्षा करि प्रह्लाद बचायो।
हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो॥
लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं।
श्री नारायण अंग समाहीं॥
क्षीरसिन्धु में करत विलासा।
दयासिन्धु दीजै मन आसा॥
हिंगलाज में तुम्हीं भवानी।
महिमा अमित न जात बखानी॥
मातंगी अरु धूमावति माता।
भुवनेश्वरी बगला सुख दाता॥
श्री भैरव तारा जग तारिणी।
छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी॥
केहरि वाहन सोह भवानी।
लांगुर वीर चलत अगवानी॥
कर में खप्पर खड्ग विराजै।
जाको देख काल डर भाजै॥
सोहै अस्त्र और त्रिशूला।
जाते उठत शत्रु हिय शूला॥
नगरकोट में तुम्हीं विराजत।
तिहुंलोक में डंका बाजत॥
शुंभ निशुंभ दानव तुम मारे।
रक्तबीज शंखन संहारे॥
महिषासुर नृप अति अभिमानी।
जेहि अघ भार मही अकुलानी॥
रूप कराल कालिका धारा।
सेन सहित तुम तिहि संहारा॥
परी गाढ़ संतन पर जब जब।
भई सहाय मातु तुम तब तब॥
अमरपुरी अरु बासव लोका।
तब महिमा सब रहें अशोका॥
ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी।
तुम्हें सदा पूजें नर-नारी॥
प्रेम भक्ति से जो यश गावें।
दुःख दारिद्र निकट नहिं आवें॥
ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई।
जन्म-मरण ताकौ छुटि जाई॥
जोगी सुर मुनि कहत पुकारी।
योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी॥
शंकर आचारज तप कीनो।
काम अरु क्रोध जीति सब लीनो॥
निशिदिन ध्यान धरो शंकर को।
काहु काल नहिं सुमिरो तुमको॥
शक्ति रूप का मरम न पायो।
शक्ति गई तब मन पछितायो॥
शरणागत हुई कीर्ति बखानी।
जय जय जय जगदम्ब भवानी॥
भई प्रसन्न आदि जगदम्बा।
दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा॥
मोको मातु कष्ट अति घेरो।
तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो॥
आशा तृष्णा निपट सतावें।
रिपू मुरख मौही डरपावे॥
शत्रु नाश कीजै महारानी।
सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी॥
करो कृपा हे मातु दयाला।
ऋद्धि-सिद्धि दै करहु निहाला।
जब लगि जिऊं दया फल पाऊं ।
तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊं ॥
दुर्गा चालीसा जो कोई गावै।
सब सुख भोग परमपद पावै॥
देवीदास शरण निज जानी।
करहु कृपा जगदम्ब भवानी॥
॥ इति श्री दुर्गा चालीसा सम्पूर्ण ॥
11:30 AM. 13 Apr 2111:30 AM. 13 Apr
कन्या राशि वाले अति सुगंधित पुष्प करें अर्पित
इस नवरात्रि कन्या राशि के जातक अति सुगंधित पुष्प मां को अर्पित करें. जिससे माता की विशेष कृपा आपको मिलेगी. इसके लिए गुड़हल, गेंदा, गुलाब, हरसिंगार से भी आराधना कर सकते हैं.
11:30 AM. 13 Apr 2111:30 AM. 13 Apr
कितने से कितने बजे तक अमृतसिद्धि और सर्वार्थसिद्धि योग
आपको बता दें कि 13 अप्रैल, मंगलवार यानी आज कलश स्थापना का बेहद शुभ मुहूर्त आरंभ हो चुका है. अमृतसिद्धि योग सुबह 06 बजकर 11 मिनट से शुरू हो चुका है जो दोपहर 02 बजकर 19 मिनट तक रहेगा और सर्वार्थसिद्धि योग सुबह 06 बजकर 11 मिनट से शुरू हुआ है यह भी दोपहर 02 बजकर 19 मिनट तक समाप्त हो जाएगा.
11:30 AM. 13 Apr 2111:30 AM. 13 Apr
गुड़हल का फूल चढ़ाएं सिंह राशि वाले
चैत्र नवरात्रि के पहले दिन मां को सिंह राशि वाले गुड़हल का पुष्प चढ़ाएं इसके अलावा कनेर, कमल, गुलाब पूष्प भी आप अर्पित कर सकते हैं. कहा जाता है कि भगवान सूर्य और मां दुर्गे को ये फूल बेहद पसंद होते हैं.
11:30 AM. 13 Apr 2111:30 AM. 13 Apr
कर्क राशि के जातक मां को अर्पित करें श्वेत या गुलाबी फूल
कर्क राशि के जातक संभव हो तो श्वेत कमल, श्वेत कनेर फूल चढ़ाएं इसके अलावा आप गेंदा, गुडहल, सदाबहार, चमेली फूल भी चढ़ा सकते हैं. कोशिश करें कि श्वेत या गुलाबी पुष्प ही आप माता को अर्पित करें. ज्यादा लाभकारी होगा. इससे चन्द्र दोष से मुक्ति मिलेगी.
11:30 AM. 13 Apr 2111:30 AM. 13 Apr
कलश स्थापना विधि (Kalash Sthapana Vidhi)
स्नानादि कर लें और स्वच्छ वस्त्र पहनें
फिर मंदिर को अच्छी तरह साफ करके गंगा जल से शुद्ध कर लें
अब लकड़ी का पाटा लें, उसपर लाल अथवा सफेद रंग का कपड़ा बिछा दें
कपड़े पर थोड़ा अक्षत रखें
उसपर मिट्टी के बर्तन रखकर जौ बोएं
अब बर्तन के ऊपर कलश रख दें फिर इसमें स्वास्तिक बना लें
कलावा या मौली से इसे चारो ओर बांधें
अब कलश में थोड़ा अक्षत डालें और सुपाड़ी व सिक्का भी डाल दें
इसके ऊपर से आम या अशोक के पत्ते डाल दें
अब कलश के ऊपर एक नारियल रखें. इससे पहले उसे चुनरी से लपेट दें और कलावा से अच्छी तरह बांध दें
फिर मां दुर्गा के सभी स्वरूपों का आव्हान करें, कलश स्थापना मंत्र पढ़ें, दीपक जलाएं
11:30 AM. 13 Apr 2111:30 AM. 13 Apr
घटस्थापना के अन्य शुभ मुहूर्त
अमृतसिद्धि योग: 13 अप्रैल, सुबह 06 बजकर 11 मिनट से शुरू हो चुका है जो दोपहर 02 बजकर 19 मिनट तक
सर्वार्थसिद्धि योग: 13 अप्रैल, सुबह 06 बजकर 11 मिनट से दोपहर 02 बजकर 19 मिनट तक
अभिजीत मुहूर्त: 13 अप्रैल, दोपहर 12 बजकर 02 मिनट से 12 बजकर 52 मिनट तक
अमृत काल मुहूर्त: 13 अप्रैल, सुबह 06 बजकर 15 मिनट से 08 बजकर 03 मिनट तक
ब्रह्म मुहूर्त: 13 अप्रैल, सुबह 04 बजकर 35 मिनट से सुबह 05 बजकर 23 मिनट तक
11:30 AM. 13 Apr 2111:30 AM. 13 Apr
जानें घटस्थापना के सभी शुभ मुहूर्त
घटस्थापना तिथि: 13 अप्रैल 2021, मंगलवार को
घटस्थापना शुभ मुहूर्त: सुबह 05 बजकर 28 मिनट से 10 बजकर 14 मिनट तक
कुल घटस्थापना अवधि: 04 घंटे 15 मिनट तक
घटस्थापना का दूसरा शुभ मुहूर्त आरंभ: सुबह 11 बजकर 56 मिनट से
घटस्थापना का दूसरा शुभ मुहूर्त समाप्त: दोपहर 12 बजकर 47 मिनट तक
11:30 AM. 13 Apr 2111:30 AM. 13 Apr
मिथुन राशि
चैत्र नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री को पीले पुष्प चढाना चाहिए. इसके लिए आप कनेर, गुड़हल, गेंदा, द्रोणपुष्पी या केवड़ा के फूल से पूजा कर सकते हैं.
11:30 AM. 13 Apr 2111:30 AM. 13 Apr
अखंड ज्योति के लिए आपको इन सामग्री
नौ दिनों तक अखंड ज्योति जलाए रखना चाहिए. इसके लिए आपको पर्याप्त मात्रा में शुद्ध घी, बड़ा मिट्टी या पीतल दीपक, बाती और थोड़ा अक्षत की जरूरत भी पड़ेगी. साथ ही साथ दीपक बुझे न इसके लिए कांच के शीशा का ढक्कन भी जरूरत पड़ेगा.
11:30 AM. 13 Apr 2111:30 AM. 13 Apr
वृषभ राशि
वृषभ राशि के जातकों को चैत्र नवरात्रि के दिन श्वेत कमल, सदाबहार, श्वेत कनेर, हरसिंगार, गुडहल, बेला आदि सफेद रंग पुष्पों से मां दुर्गा को अर्पित करें.
11:30 AM. 13 Apr 2111:30 AM. 13 Apr
मेष राशि
चैत्र नवरात्रि के पहले दिन मेष राशि के जातकों को गुड़हल, लाल कमल, गुलाब, लाल कनेर या अन्य तरह के लाल पुष्प से मां भगवती को प्रसन्न करना चाहिए.
11:30 AM. 13 Apr 2111:30 AM. 13 Apr
चैत्र नवरात्र शुरू, आज मां दुर्गे के इस स्वरूप की करें पूजा
आज, 13 अप्रैल, मंगलवार से चैत्र नवरात्रि (Chaitra navratri 2021) पर्व की शुरूआत हो चुकी है. नवरात्रि में मां दुर्गा (Maa Durga) के सभी 9 स्वरूपों की पूजा करने की परंपरा होती है. वहीं, नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री (Mata Shailputri) की पूजा करने का विधान होता है और नवमी को माता सिद्धिदात्री की पूजा होती है. पर्वतराज हिमालय के घर पुत्री रूप में जन्म लेने के कारण इनका नाम मां शैलपुत्री पड़ा था.
11:30 AM. 13 Apr 2111:30 AM. 13 Apr
कब है महानिशा पूजा
नवरात्र में महानिशा पूजा सप्तमी युक्त अष्टमी या मध्य रात्रि में निशीथ व्यापिनी अष्टमी में की जाती है. इस साल चैत्र नवरात्रि में महानिशा पूजा 20 अप्रैल को की जानी है.
11:30 AM. 13 Apr 2111:30 AM. 13 Apr
पूजा सामग्री का है विशेष महत्व
नवरात्रि में प्रतिपदा (Navratri First Day) यानी कि पहले दिन प्रातः जौ-बोने , कलश स्थापना और दिया प्रज्वलित करने के साथ मां नव दुर्गा की पूजा का शुभारम्भ होता है. नवरात्रि पूजा में अलग-अलग तरह की पूजा सामग्री का विशेष महत्व है.
7:17 PM. 12 Apr 217:17 PM. 12 Apr
नवरात्रि 2021 में इस्तेमाल में लाएं ये 9 पौधों की पत्तियां
केले का पत्र
दारूहलदी (कवी) पत्र
हल्दी पत्र
बेल पत्र
अनार पत्र
अशोक पत्र
जयंती पत्र
धान पत्र
अमलतास पत्र
7:17 PM. 12 Apr 217:17 PM. 12 Apr
मां दुर्गा का वाहन (Maa Durga Vahan)
इस चैत्र नवरात्रि पर मां दुर्गा घोड़े की सवारी करके आयेंगी और नर वाहन पर सवार होकर विदा हो जायेंगी.
6:33 PM. 12 Apr 216:33 PM. 12 Apr
मां ब्रह्मचारिणी का इतिहास
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां कुष्मांडा रूप के पश्चात देवी पार्वती ने दक्ष प्रजापति के घर में एक नए रूप में जन्म लिया. यह स्वरूप ही मां ब्रह्मचारिणी के नाम से प्रसिद्ध हुआ. इन्हें सती के रूप में भी जाना जाता है.
5:57 PM. 12 Apr 215:57 PM. 12 Apr
कलश स्थापना मुहूर्त
कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त 13 अप्रैल को प्रातः 5:45 बजे से प्रातः 9:59 तक और अभिजीत मुहूर्त पूर्वाह्न 11: 41 से 12:32 तक का होगा.
5:57 PM. 12 Apr 215:57 PM. 12 Apr
नौ दिनों में मां के नौ रूपों की पूजा- अर्चना
नवरात्रि के नौ दिनों में मां के नौ रूपों की पूजा- अर्चना की जाती है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि के नौ दिनों में व्रत रखने का बहुत अधिक महत्व होता है. इन नौ दिनों में व्रत रखने से मां की विशेष कृपा प्राप्त होती है. इसके लिए विशेष तरह की पूजन विधि है. नवरात्रि के पहले दिन मां दुर्गा के शैलपुत्री (Mata Shailputri) स्वरूप की पूजा अर्चना की जाती है. नवरात्रि में प्रतिपदा (Navratri First Day) के दिन प्रातः जौ-बोने , कलश स्थापना और दिया प्रज्वलित करने के साथ मां नव दुर्गा की पूजा का शुभारम्भ होता है.
5:57 PM. 12 Apr 215:57 PM. 12 Apr
Chaitra Navratri 2021 पर कैसे करें कलश स्थापना और क्या है शुभ मुहूर्त
5:57 PM. 12 Apr 215:57 PM. 12 Apr
पूजा की क्या-क्या सामग्री है जरूरी
नवरात्रि पूजा में अलग-अलग तरह की पूजा सामग्री का विशेष महत्व है. पूजन विधि तभी पूरी होती है जब पूजा की सभी सामग्री मौजूद हो. इसके लिए जरूरी है पहले यह जानना कि पूजा की क्या-क्या सामग्री होती है.
5:15 PM. 12 Apr 215:15 PM. 12 Apr
चैत्र नवरात्रि में मां दुर्गा घोड़े पर सवार होकर आएंगी
नवरात्रि में प्रतिपदा (Navratri First Day) के दिन प्रातः जौ-बोने , कलश स्थापना और दिया प्रज्वलित करने के साथ मां नव दुर्गा की पूजा का शुभारम्भ होता है. इस बार चैत्र नवरात्रि में मां दुर्गा घोड़े पर सवार होकर आएंगी.
5:15 PM. 12 Apr 215:15 PM. 12 Apr
इन चीजों का खुद करना होगा जुगाड़
आम के पत्ते , पानी वाला जटायुक्त नारियल, हवन के लिए आम की लकड़ी, पुष्प, फूलों का हार
5:15 PM. 12 Apr 215:15 PM. 12 Apr
चैत्र नवरात्र पूजा में लगने वाली पूजन सामग्री
मां दुर्गा की प्रतिमा या फोटो, सिंदूर, केसर, कपूर, धूप,वस्त्र, दर्पण, कंघी, कंगन-चूड़ी, सुगंधित तेल, चौकी, चौकी के लिए लाल कपड़ा, पानी वाला जटायुक्त नारियल, दुर्गासप्तशती किताब, बंदनवार आम के पत्तों का, पुष्प, दूर्वा, मेंहदी, बिंदी, सुपारी साबुत, हल्दी की गांठ और पिसी हुई हल्दी, पटरा, आसन, पांच मेवा, घी, लोबान,गुग्गुल, लौंग, कमल गट्टा,सुपारी, कपूर. और हवन कुंड, चौकी, रोली, मौली, पुष्पहार, बेलपत्र, कमलगट्टा, दीपक, दीपबत्ती, नैवेद्य, शहद, शक्कर, पंचमेवा, जायफल, लाल रंग की गोटेदार चुनरीलाल रेशमी चूड़ियां, सिंदूर, आम के पत्ते, लाल वस्त्र, लंबी बत्ती के लिए रुई या बत्ती, धूप, अगरबत्ती, माचिस, कलश, साफ चावल, कुमकुम,मौली, श्रृंगार का सामान, दीपक, घी/ तेल ,फूल, फूलों का हार, पान, सुपारी, लाल झंडा, लौंग, इलायची, बताशे या मिसरी, असली कपूर, उपले, फल व मिठाई, दुर्गा चालीसा व आरती की किताब,कलावा, मेवे, हवन के लिए आम की लकड़ी, जौ आदि.
5:15 PM. 12 Apr 215:15 PM. 12 Apr
नवरात्रि घटस्थापना पूजा विधि
सबसे मिट्टी को चौड़े मुंह वाले बर्तन में रखें और उसमें सप्तधान्य बोएं
अब उसके ऊपर कलश में जल भरें और उसके ऊपरी भाग (गर्दन) में कलावा बांधें
आम या अशोक के पत्तों को कलश के ऊपर रखें
नारियल में कलावा लपेटे
उसके बाद नारियल को लाल कपड़े में लपेटकर कलश के ऊपर और पत्तों के मध्य रखें
घटस्थापना पूरी होने के पश्चात् मां दुर्गा का आह्वान करते हैं
घटस्थापना का दूसरा शुभ मुहूर्त- सुबह 11 बजकर 56 मिनट से दोपहर 12 बजकर 47 मिनट तक।
11:34 AM. 12 Apr 2111:34 AM. 12 Apr
गर्मी में रख रहें नवरात्रि का व्रत तो इन फलों का जरूर करें सेवन
यदि गर्मी में आप भी रख रहें नवरात्रि का व्रत तो जिसमें फूड पदार्थ या फल में पानी की मात्रा अधिक होती है उसका सेवन जरूर करें. ऐसा करने से नौ दिनों तक आपका शरीर व्रत के बावजूद ज्यादा कमजोर नहीं होगा. ये फल आपके बॉडी में कम हो रही पानी की मात्रा को बनाएं रखने में मददगार साबित हो सकते हैं. अत: चैत्र नवरात्रि के दौरान इन फलों का करें सेवन…
तरबूज
लौकी
पपीता
केला
सिंघाड़े फलों का जरूर करें सेवन
11:34 AM. 12 Apr 2111:34 AM. 12 Apr
कब है नवमी की तिथि
13 अप्रैल दिन मंगलवार को चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा की तिथि से नवरात्रि प्रारंभ हो रहा है. वहीं, पंचांग के अनुसार नवमी की तिथि 21 अप्रैल को शुरू हो रही है और व्रत का पारण दशमी तिथि 22 अप्रैल को होगा.
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कलश स्थापना विधि (Kalash Sthapana Vidhi)
सुबह जल्दी उठें
स्नानादि करें, स्वच्छ वस्त्र पहनें
घर के मंदिर को अच्छे से साफ करें, गंगा जल से शुद्ध कर लें
एक लकड़ी का पाटा लेकर, उसपर लाल या सफेद रंग का कपड़ा बिछा दें
फिर कपड़े पर अक्षत रखें और मिट्टी के बर्तन में जौ बोएं
इसके बाद बर्तन के ऊपर कलश रख दें
इसमें स्वास्तिक बनाएं
कलावा या मौली बांधें
कलश में सुपाड़ी, सिक्का और अक्षत डाल दें
ऊपर अशोक के पत्ते या आम के पत्ते रखें
एक नारियल लें और उसे चुनरी से लपेट दें
फिर इसमें भी कलावा या मौली बांधें
अब मां दुर्गा के सभी स्वरूपों का आव्हान करें
दीप जलाएं और कलश के आगे अगरबत्ती जलाएं और मंत्र पढ़ें
9:38 AM. 12 Apr 219:38 AM. 12 Apr
देवी ब्रह्मचारिणी मंत्र
ॐ देवी ब्रह्मचारिण्यै नमः॥
(Om Devi Brahmacharinyai Namah)
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नवरात्रि पूजा से पूर्व जरूर करें ये पांच काम
मन और शारिरीक स्वच्छता के अलावा घर की स्वच्छता भी जरूरी
पूजा स्थान को गंगा जल से करें शुद्ध
घर या मंदिर के मुख्य द्वार पर बनाएं स्वास्तिक का चिन्ह
पूजा से पूर्व मौन धारण कर बुरे विचार को करें समाप्त
मांस-मछली और लहसुन-प्याज का सेवन बिल्कुल भी न करें
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देवी ब्रह्मचारिणी का स्वरूप
देवी ब्रह्मचारिणी को नंगे पांव दर्शाया गया है.
उनकी दो भुजाएं है
दाहिने हाथ में जपने वाली माला है
तो बाएं हाथ में कमंडल धारण करती हैं.
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घटस्थापना के दौरान बन रहे ये दो योग
घटस्थापना के दौरान बन रहा है सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग. जिसके कारण कलश स्थापना का महत्व और बढ़ जाएगा.
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ब्रह्मचारिणी पूजा का महत्व
यदि जातक के कुंडली में मंगल खराब या कमजोर हो तो विवाह समेत कई समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं. ऐसे में देवी ब्रह्मचारिणी की विधिपूर्वक पूजा उन्हें अवश्य करनी चाहिए.
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मां ब्रह्मचारिणी का इतिहास
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां कुष्मांडा रूप के पश्चात देवी पार्वती ने दक्ष प्रजापति के घर में एक नए रूप में जन्म लिया. यह स्वरूप ही मां ब्रह्मचारिणी के नाम से प्रसिद्ध हुआ. इन्हें सती के रूप में भी जाना जाता है.
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चैत्र नवरात्रि में कब होगी देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा
चैत्र नवरात्रि के दूसरे दिन देवी ब्रह्मचारिणी की पूजा होगी. इस बार यह तिथि 14 अप्रैल को पड़ेगी.
नवरात्रि के पहले दिन मां शैलपुत्री पूजा
नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना के साथ मां शैलपुत्री पूजा करने की परंपरा होती है. इन्हें हिमालय पुत्री भी कहा जाता है. जिन्हें पूजने से चंद्र दोष दूर होता है. उनके दाएं हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल होता है.
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आज का पंचांग, 12 अप्रैल 2021, सोमवार
चैत्र कृष्ण पक्ष अमावस्या दिन 06 बजकर 58 मिनट के उपरांत प्रतिपदा
मेंहदी, हल्दी की गांठ और पिसी हुई हल्दी, सुपारी साबुत, पटरा, आसन,
पुष्प, दूर्वा, बंदनवार आम के पत्तों का, पुष्पहार,
वस्त्र, दर्पण, कंघी, कंगन-चूड़ी, बिंदी, लाल रंग की गोटेदार चुनरीलाल, रेशमी चूड़ियां, सिंदूर,
मधु, शक्कर, पंचमेवा, जायफल, आदि
12:14 PM. 11 Apr 2112:14 PM. 11 Apr
पहले दिन होगी मां शैलपुत्री की पूजा (Maa Shailputri Puja Vidhi)
नवरात्रि के पहले दिन घटस्थापना करने की विधि होती है. इसी के साथ मां शैलपुत्री के स्वरूप की पूजा भी शुरू हो जाती है. शैलपुत्री देवी को दुर्गा के नौ स्वरूपों में प्रथम रूप माना गया है. हिमालय पुत्री देवी शैलपुत्री को पूजने से चंद्र दोष दूर होता है. उनके दाएं हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथ में कमल होता है.
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मां दुर्गा का वाहन (Maa Durga Vahan)
इस चैत्र नवरात्रि पर मां दुर्गा घोड़े की सवारी करके आयेंगी और नर वाहन पर सवार होकर विदा हो जायेंगी.
12:14 PM. 11 Apr 2112:14 PM. 11 Apr
चैत्र अमावस्या या सोमवती अमावस्या आज (Chaitra Amavasya 2021, Somwati Amavasya 2021)
चैत्र नवरात्रि 2021 से एक दिन पहले चैत्र अमावस्या या सोमवती अमावस्या पूजा की जायेगी. हिंदू धर्म में इस पर्व का खासा महत्व होता है. चैत्र अमावस्या का शुभ मुहूर्त 11 अप्रैल से ही शुरू हो रहा है 12 अप्रैल तक रहेगी. इस दिन पीपल के वृक्ष और चंद्रमा की पूजा का महत्व होता है.
12:14 PM. 11 Apr 2112:14 PM. 11 Apr
कब कौन से स्वरूप की होगी पूजा (Chaitra Navratri 2021 Dates)
प्रतिपदा तिथि: मां शैल पुत्री की पूजा और घटस्थापना
द्वितीया तिथि: मां ब्रह्मचारिणी पूजा
तृतीया तिथि: मां चंद्रघंटा पूजा
चतुर्थी तिथि: मां कुष्मांडा पूजा
पंचमी तिथि: मां स्कंदमाता पूजा
षष्ठी तिथि: मां कात्यायनी पूजा
सप्तमी तिथि: मां कालरात्रि पूजा
अष्टमी तिथि: मां महागौरी
नवमी तिथि: मां सिद्धिदात्री और रामनवमी पूजा
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कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त (Kalash Sthapana Shubh Muhurat 2021)
कलश स्थापना का पहला शुभ मुहूर्त: 13 अप्रैल की सुबह 5 बजकर 58 मिनट से सुबह 10 बजकर 14 मिनट तक
कलश स्थापना का दूसरा शुभ (अभिजित) मुहूर्त: सुबह 11 बजकर 56 मिनट से 12 बजकर 47 मिनट तक
Posted By: Sumit Kumar Verma
मुख्य बातें
Chaitra Navratri 2021, Ma Durga Puja Vidhi, Kalash Sthapana Vidhi, Samagri List: हिंदू पंचांग के मुताबिक इस बार नौ दिनों का चैत्र नवरात्र 13 अप्रैल, मंगलवार से शुरू हो रहा है. हर वर्ष चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से बासंतिक या चैत्र नवरात्रि के आरंभ होने की परंपरा है. इस दौरान मां दुर्गा के सभी नौ स्वरूपों का नौ दिनों तक व्रत रखा जाता है. पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा से पहले घटस्थापना या कलश स्थापना होता है. ऐसे में आइये जानते है. कलश स्थापना विधि, शुभ मुहूर्त, मंत्र, सभी स्वरूपों की तिथि, व पूजन विधि व अन्य डिटेल्स…