बंगाल पंचायत चुनाव : नामांकन के दौरान हुई हिंसा की सीबीआई करेगी जांच, कलकत्ता हाईकोर्ट ने दिया आदेश

कलकत्ता हाईकोर्ट ने एक अहम आदेश पारित किया है, जिसमें कहा गया है कि बंगाल में पंचायत चुनाव के लिए नामांकन के दौरान हुई हिंसा की जांच सीबीआई करेगी. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस के लिए यह एक बड़ा झटका है.

पश्चिम बंगाल पंचायत चुनावों के लिए नामांकन के दौरान हुई हिंसा की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) करेगी. कलकत्ता हाईकोर्ट ने यह आदेश दिया है. कलकत्ता हाईकोर्ट ने कहा है कि पंचायत चुनावों के लिए हुए नामांकन के दौरान जितनी भी हिंसा हुई है, उन सभी की जांच केंद्रीय एजेंसी सीबीआई करेगी.

राज्य निर्वाचन आयोग ने केंद्र से मांगे 22 कंपनी सीएपीएफ

कलकत्ता हाईकोर्ट ने बुधवार को यह आदेश पारित किया. इससे पहले, मंगलवार को पश्चिम बंगाल राज्य निर्वाचन आयोग को उस वक्त तगड़ा झटका लगा था, जब सुप्रीम कोर्ट ने पंचायत चुनावों में केंद्रीय बलों को तैनात करने के कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखा था. इसके बाद स्टेट इलेक्शन कमीशन ने केंद्र से 22 कंपनी सीएपीएफ की मांग की.

बंगाल सरकार और चुनाव आयोग की याचिका खारिज

राज्य निर्वाचन आयोग ने कलकत्ता हाईकोर्ट के उस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें उसे निर्देश दिया गया था कि पंचायत चुनाव से पहले केंद्रीय बलों की तैनाती की जाये. कलकत्ता हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से दाखिल की गयी याचिका को जस्टिस बीवी नागरत्न और मनोज मिश्रा की खंडपीठ ने खारिज कर दिया.

बंगाल में चुनावों में हिंसा का है पुराना रिकॉर्ड

बंगाल में पिछले चुनावों में हिंसा के रिकॉर्ड को देखते हुए देश की सर्वोच्च अदालत ने साफ कर दिया कि स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट ने जो आदेश पारित किया है, उसमें वह किसी तरह का हस्तक्षेप नहीं करेगी. जस्टिस नागरत्न ने कहा कि चुनाव कराना हिंसा का लाइसेंस नहीं देते. हाईकोर्ट ने पहले हुई हिंसा की घटनाओं को देखा है.

स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव कहां हो रहा है : सुप्रीम कोर्ट

जस्टिस नागरत्न ने कहा कि अगर चुनाव है, तो हिंसा होगी, ऐसा नहीं होना चाहिए. यदि लोग नामांकन दाखिल नहीं कर पा रहे हैं. अगर वे नामांकन दाखिल करने के लिए जाते हैं और उन्हें मार डाला जाता है, तो फिर स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव कहां हो रहे हैं?

एससी बुडाकोटी सीएपीएफ के को-ऑर्डिनेटर बनाये गये

बाद में केंद्र सरकार ने कहा कि वह तत्काल सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) की 8 कंपनियां भेज रही है. साथ ही केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की 6 कंपनियां, सीमा सुरक्षा बल (एसएसबी) और इंडो तिब्बत बॉर्डर पुलिस (आईटीबीपी) की 4-4 कंपनियां बंगाल भेज रही है. केंद्र सरकार ने बीएसएफ के आईजी एससी बुडाकोटी को बंगाल में पंचायत चुनावों के लिए सीएपीएफ का को-ऑर्डिनेटर नियुक्त किया गया है.

Also Read: बंगाल पंचायत चुनाव: केंद्रीय बलों की तैनाती मामले में सुप्रीम कोर्ट से ममता सरकार को झटका, HC का आदेश बरकरार

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: Mithilesh jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
और पढ़ें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >