बीच गांव में गिरा वायुसेना का जिंदा बम, एयरफोर्स की खास टीम बम निष्क्रिय करने मौके पर पहुंची

कलाईकुंडा के वायुसेना स्टेशन पर वायुसेना के जवान प्रतिदिन की तरह गुरुवार को भी लड़ाकू विमान पर सवार होकर युद्ध का अभ्यास करने निकले थे. बम फेंकते समय वायुसेना का टार्गेट प्वाइंट फेल हो गया, जिंदा बम टार्गेट प्वाइंट से एक किलोमीटर दूर एक खेत में जा गिरा. जिससे ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गयी.

खड़गपुर : कलाईकुंडा के वायुसेना स्टेशन पर वायुसेना के जवान प्रतिदिन की तरह गुरुवार को भी लड़ाकू विमान पर सवार होकर युद्ध का अभ्यास करने निकले थे. बम फेंकते समय वायुसेना का टार्गेट प्वाइंट फेल हो गया, जिंदा बम टार्गेट प्वाइंट से एक किलोमीटर दूर एक खेत में जा गिरा. जिससे ग्रामीणों में अफरा-तफरी मच गयी.

गौरतलब है कि झाड़ग्राम जिला अंतर्गत सांकराईल थाना के दुतकुंडी इलाके में कलाईकुंडा वायुसेना के अभ्यास के दौरान बम फेंकने के लिए टार्गेट प्वाइंट चिन्हित किया गया है. लेकिन गुरुवार को अभ्यास के दौरान बम को टार्गेट प्वाइंट पर फेंकने के दौरान चूक हो गयी. जिंदा बम टार्गेट प्वाइंट से करीबन एक किलोमीटर दूर राजाबांध गांव के एक खेत में जा गिरा.

मालूम हो कि बम के गिरने के दौरान खेत के आसपास कोई भी व्यक्ति मौजूद नहीं था. बम खेत के जिस जगह पर गिरा वहां एक बड़ा सा गड्ढा हो गया. बताया जा रहा है कि जमीन गीली होने के कारण बम जमीन के काफी नीचे चला गया है. घटना के बाद कलाईकुंडा के वायुसेना के अधिकारी औरर बम निरोधक दस्‍ते की टीम जमीन के अंदर घुसे जिंदा बम को सुरक्षित निकालने या निष्क्रिय करने की कोशिश में जुटे हैं.

कलाईकुंडा वायुसेना के जवान और स्थानीय पुलिस ने बम गिरने वाले जगह को घेर रखा है. जिससे ग्रामीण उस इलाके में पहुंच ना सकें और किसी भी तरह के जोखिम में ना पड़ें. इधर खेत में बम गिरने और बम के खेत के अंदर मौजूद रहने के कारण ग्रामीणों में काफी दहशत है. ग्रामीणों का कहना है कि जब तक खेत से बम नहीं निकलता या फिर निष्क्रिय नहीं होता तबतक उन्हें चैन नहीं मिलेगा.

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By AmleshNandan Sinha

अमलेश नंदन सिन्हा प्रभात खबर डिजिटल में वरिष्ठ पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता में 20 से अधिक वर्षों का अनुभव है. रांची विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की पढ़ाई करने के बाद से इन्होंने कई समाचार पत्रों के साथ काम किया. इन्होंने पत्रकारिता की शुरुआत रांची एक्सप्रेस से की, जो अपने समय में झारखंड के विश्वसनीय अखबारों में से एक था. एक दशक से ज्यादा समय से ये डिजिटल के लिए काम कर रहे हैं. झारखंड की खबरों के अलावा, समसामयिक विषयों के बारे में भी लिखने में रुचि रखते हैं. विज्ञान और आधुनिक चिकित्सा के बारे में देखना, पढ़ना और नई जानकारियां प्राप्त करना इन्हें पसंद है.

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