72 Hoorain ही नहीं, बॉलीवुड की इन 5 फिल्मों को लेकर भी मचा था भयंकर बवाल, बैन करने तक की उठी थी मांग

Bollywood Films Who Create Controversies: बॉलीवुड इंडस्ट्री में कई ऐसी फिल्में बनी है, जिसको लेकर काफी ज्यादा विरोध हुआ है. कई पर तो बैन लगाने तक की मांग की गई है. इनमें 72 हूरें, द केरल स्टोरी, द कश्मीर फाइल्स से लेकर पद्मावत और आदिपुरुष शामिल है.

Bollywood Films Who Create Controversies: बॉलीवुड इंडस्ट्री में न जानें कितनी ही ऐसी फिल्में बनती है, जो दर्शकों को फुल ऑन एंटरटेन करती है. हालांकि कई फिल्में सच्ची घटनाओं पर भी आधारित होती है, जो समाज को आईना दिखाने का काम करती है, हालांकि इसको लेकर विवाद भी काफी होता है. कई लोग फिल्म को बैन करने की मांग करते हैं, तो कई पुलिस थानों में जाकर मेकर्स के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाते हैं. हमारे फिल्म जगत में भी कई ऐसी फिल्में बनी है, जिसने रिलीज से पहले काफी विवाद खड़ा किया है, इसमें 72 हूरें, द केरल स्टोरी, द कश्मीर फाइल्स से लेकर पद्मावत और आदिपुरुष शामिल है.

72 हूरें को लेकर चल रहा है विवाद

संजय पूरन सिंह चौहान की 72 हुरें बीते दिनों सिनेमाघरों में रिलीज हुई. फिल्म को लेकर दर्शकों में खास उत्साह नहीं देखा गया. मूवी हिंदी के साथ-साथ अंग्रेजी, असमिया, बंगाली, भोजपुरी, कन्नड़, कश्मीरी, मलयालम, मराठी, पंजाबी, तमिल और तेलुगु सहित 10 स्थानीय भाषाओं में आई. इसमें दिखाया गया है कि कैसे आतंकवादी बनाए जाने के लिए किसी आदमी का ब्रेनवॉश किया जाता है. फिल्म की कहानी ब‍िलाल (आमिर बशीर) और हाकिम (पवन मल्होत्रा) पर आधारित है, जो गेट वे ऑफ इंड‍िया पर आत्‍मघाती हमला करने आते हैं. उन्हें ये बताया जाता है कि ये सब करने से उन्हें जन्नत नसीब होगी और उसमें उन्हें 72 हूरें मिलेगी. किसी हमले में ये मर जाते हैं और 72 हूरें का इंतजार करते हैं. वो दोनों खोई हुई आत्माओं के रूप में पृथ्वी पर घूमते हैं और 72 हुरें के आने और उन्हें स्वर्ग ले जाने का इंतजार कर रहे हैं.

द केरल स्टोरी

सुदीप्तो सेन के डायरेक्शन में बनी फिल्म ‘द केरल स्टोरी’ 5 मई को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी. फिल्म में अदा शर्मा, सोनिया बलानी और योगिता बिहानी हैं. फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर धुआंधार कमाई की थी. हालांकि इसको लेकर काफी विवाद हुआ था. लोगों ने सिनेमाघरों के बाहर आग लगा दी थी. द केरल स्टोरी की कहानी एक हिंदू महिला के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे इस्लाम अपनाने के लिए उकसाया जाता है और बाद में सीरिया भेज दिया जाता है. इस विदेशी भूमि में, उसे आईएसआईएस आतंकवादी संगठन का सदस्य बनने के लिए मजबूर किया जाता है और क्रूर यातनाओं दी जाती है. विपुल अमृतलाल शाह फिल्म के निर्माता हैं.

द कश्मीर फाइल्स को कहा गया था प्रोपगेंडा

विवेक अग्निहोत्री द्वारा निर्देशित, द कश्मीर फाइल्स को लेकर काफी ज्यादा विवाद हुआ था. फिल्म 1990 में कश्मीरी पंडितों की ओर से कश्मीर विद्रोह के दौरान सहे गए क्रूर कष्टों की सच्ची कहानी बताती है. यह कहानी कश्मीरी पंडित समुदाय के कश्मीर नरसंहार की पहली पीढ़ी के पीड़ितों के वीडियो साक्षात्कार पर आधारित है. मूवी कश्मीरी पंडितों के दर्द, पीड़ा, संघर्ष और आघात का दिल दहला देने वाला आख्यान है और लोकतंत्र, धर्म, राजनीति और मानवता के बारे में आंखें खोलने वाले तथ्यों पर सवाल उठाता है. अनुपम खेर, मिथुन चक्रवर्ती, दर्शन कुमार और पल्लवी जोशी जैसे दिग्गज कलाकारों द्वारा अभिनीत यह फिल्म बॉक्स-ऑफिस पर सफल रही थी.

आदिपुरष के डायलॉग्स पर हुआ था काफी विवाद

श्रीराम पर बनी फिल्म आदिपुरुष (Adipurush) जबसे थियेटर्स में रिलीज हुई, इसको लेकर विवाद खड़े हो गये थे. कई लोगों ने डायलॉग्स को लेकर सवाल उठाये थे. यही नहीं नेपाल ने भारतीय फिल्मों को काठमांडू में बैन तक कर दिया था. इसमें हाईकोर्ट को भी हस्ताक्षेप करना पड़ा था. हालांकि कुछ दिनों बाद मेकर्स ने वीएफएक्स के साथ डायलॉग बदल दिये थे. इसके बावजूद जनता ने फिल्म को नहीं देखा और धार्मिक भावनाओं पर प्रहार करने के लिए मेकर्स को जमकर खरी-खोटी सुनाई.

पद्मावत को लेकर हुआ था विवाद

संजय लीला भंसाली के निर्देशन में बनी पद्मावत से दीपिका पादुकोण ने अपने करियर में एक नया मुकाम हासिल किया था. एतिहासिक सेट और राजा-रानी के भव्य लुक के बावजूद फिल्म कुछ राजनीतिक समूहों के रडार पर आ गई. राजपूत करणी सेना और उनके सदस्यों सहित कई राजपूत जाति संगठनों ने फिल्म का विरोध किया था और बाद में फिल्म के सेट पर यह दावा करते हुए तोड़फोड़ की थी कि फिल्म में राजपूत रानी पद्मावती का खराब चित्रण किया गया है. उन्होंने फिल्म सेट पर भंसाली के साथ मारपीट भी की थी. भंसाली और दीपिका पादुकोण को हिंसा और जान से मारने की धमकियां मिली थीं. भारत भर में प्रमुख राजनीतिक दलों ने परस्पर विरोधी रुख अपनाया. भारतीय जनता पार्टी के कई सदस्यों और नेताओं ने फिल्म पर प्रतिबंध लगाने की मांग की.

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Author: Ashish Lata

आशीष लता डिजिटल मीडिया की अनुभवी पत्रकार हैं और वर्तमान में प्रभात खबर में सीनियर कंटेंट राइटर के साथ एंटरटेनमेंट हेड के रूप में कार्यरत हैं. मीडिया इंडस्ट्री में करीब 7 साल का अनुभव रखने वाली आशीष ने एंटरटेनमेंट से लेकर देश-दुनिया और विभिन्न राज्यों की खबरों पर गहराई से काम किया है. बिहार, मध्यप्रदेश और राजस्थान जैसे राज्यों से जुड़ी खबरों के कंटेंट प्रोडक्शन में भी उनकी मजबूत पकड़ रही है. वह खबरों को आसान, रोचक और पाठकों की रुचि के अनुसार पेश करने के लिए जानी जाती हैं. एंटरटेनमेंट जर्नलिज्म में आशीष की खास दिलचस्पी सिनेमा और सितारों की दुनिया से जुड़ी खबरों में रही है. वह बॉलीवुड और टीवी इंडस्ट्री की थ्रोबैक स्टोरीज, BTS अपडेट्स, सेलेब्रिटी गॉसिप, बॉक्स ऑफिस रिपोर्ट, टीवी शोज, वेब सीरीज और स्टार इंटरव्यू जैसे विषयों पर लगातार लिखती रही हैं. इसके अलावा स्पेशल और प्रीमियम न्यूज कंटेंट तैयार करने में भी उनकी खास विशेषज्ञता मानी जाती है. उनकी राइटिंग स्टाइल में फैक्ट्स, एंटरटेनमेंट वैल्यू और रीडर्स फर्स्ट अप्रोच का अच्छा संतुलन देखने को मिलता है. आशीष लता ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत प्लस न्यूज से की थी. यहां उन्होंने बिहार में एंकर और रिपोर्टर के रूप में काम करते हुए कई महत्वपूर्ण ग्राउंड रिपोर्ट्स कीं. इस दौरान उन्होंने अशोक चौधरी और नगर निगम अध्यक्ष जैसे कई प्रमुख नेताओं के इंटरव्यू भी किए. शुरुआती दौर में रिपोर्टिंग और फील्ड जर्नलिज्म के अनुभव ने उनकी लेखन शैली और न्यूज प्रेजेंटेशन को और मजबूत बनाया. इसके बाद आशीष ने एबीपी न्यूज और ईटीवी भारत जैसे प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में काम किया। इन संस्थानों में रहते हुए उन्होंने न्यूज कवरेज, डिजिटल कंटेंट और एंटरटेनमेंट रिपोर्टिंग के कई अलग-अलग फॉर्मेट्स पर काम किया. लगातार बदलते डिजिटल मीडिया ट्रेंड्स को समझते हुए उन्होंने अपने कंटेंट को हमेशा ऑडियंस फ्रेंडली और SEO ऑप्टिमाइज्ड बनाए रखा. पटना में जन्मी आशीष लता की शुरुआती पढ़ाई पटना सेंट्रल स्कूल, सीबीएसी से हुई. इसके बाद उन्होंने पटना विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ मास कम्युनिकेशन की डिग्री हासिल की. आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय से मास्टर्स ऑफ इलेक्ट्रॉनिक मीडिया किया. उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि और मीडिया अनुभव उन्हें हिंदी पत्रकारिता के उन मूल सिद्धांतों की मजबूत समझ प्रदान करते हैं, जो जर्नलिज्म के बेसिक प्रिंसिपल 5Ws+1H यानी पर आधारित न्यूज राइटिंग के लिए बेहद जरूरी माने जाते हैं.

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