World Wide Web Day 2025: 36 साल का हुआ WWW, जानिए क्यों मनाया जाता है यह दिन और इससे जुड़े रोचक किस्से

World Wide Web Day 2025: हर साल 1 अगस्त को वर्ल्ड वाइड वेब डे के तौर पर मनाया जाता है. यह दिन उस ऐतिहासिक तकनीकी नवाचार को समर्पित है, जिसने न सिर्फ हमारे बातचीत के तरीके को बदला, बल्कि पूरी दुनिया के साथ हमारे जुड़ाव और जीवनशैली में क्रांतिकारी बदलाव ला दिया. वर्ल्ड वाइड वेब की नींव रखने का श्रेय ब्रिटेन के वैज्ञानिक सर टिम बर्नर्स-ली को दिया जाता है.

World Wide Web Day 2025: जरा सोचिए, एक ऐसी दुनिया में सुबह उठना जहां आप अपने दोस्तों को मैसेज नहीं कर सकते, इंस्टाग्राम रील्स नहीं स्क्रोल कर सकते, तरह-तरह के वीडियो नहीं देख सकते, होमवर्क में मदद नहीं पा सकते या दुनिया के किसी भी कोने में बैठे किसी व्यक्ति के साथ ऑनलाइन गेम नहीं खेल सकते, सोच पाना मुश्किल है ना? लेकिन कुछ दशक पहले तक यह सब मुमकिन नहीं था. न ही उस समय कोई मीम्स थे, न वायरल डांस ट्रेंड, न ही दिन भर स्क्रॉलिंग करना.

आज ये तमाम सुविधाएं हमारे जीवन का हिस्सा हैं, और इसका श्रेय उस तकनीक को जाता है, जिसका हम रोजाना इस्तेमाल तो करते हैं, लेकिन उसके महत्व पर शायद ही हम कभी गौर करते हैं. वह है वर्ल्ड वाइड वेब (World wide web) जिसे शॉर्ट में हम www भी बोलते हैं. आइए इस www की कहानी आज आपको बताते हैं. 

वर्ल्ड वाइड वेब की शुरुआत

वर्ल्ड वाइड वेब की शुरुवात वर्ष 1989 में रखी गई थी, जब ब्रिटेन के वैज्ञानिक सर टिम बर्नर्स-ली (Sir Tim Berners-Lee) ने यूरोपीय परमाणु अनुसंधान संगठन (CERN) में काम करते हुए एक सूचना प्रबंधन प्रणाली (Information Management System) का प्रस्ताव पेश किया. उनका उद्देश्य एक ऐसा नेटवर्क बनाना था, जिससे दुनिया भर के शोधकर्ता जानकारी को आसानी से एक्सेस और शेयर कर सकें. यह आईडिया समय के साथ विकसित होकर वर्ल्ड वाइड वेब के रूप में सामने आया. वर्ल्ड वाइड वेब एक ऐसा प्लेटफॉर्म है, जहां यूजर्स इंटरनेट के माध्यम से आपस में जुड़े हाइपरटेक्स्ट डॉक्यूमेंट्स को एक्सेस कर सकते हैं.

WWW क्या है?

WWW यानी वर्ल्ड वाइड वेब, इंटरनेट पर मौजूद एक ऐसा सिस्टम है जिसके जरिए हम वेब ब्राउजर की मदद से ऑनलाइन जानकारी तक पहुंच पाते हैं. जब आप इंटरनेट पर किसी वेबसाइट या कंटेंट को खोलते हैं, तो वह वर्ल्ड वाइड वेब के तहत ही आता है. तकनीकी दृष्टि से देखा जाए तो यह HTML (हाइपरटेक्स्ट मार्कअप लैंग्वेज) पर बेस्ड एक नेटवर्क होता है, जिसे HTTP (हाइपरटेक्स्ट ट्रांसफर प्रोटोकॉल) की सहायता से एक्सेस किया जाता है.

यह वेबपेजों को जोड़ने और यूजर्स को इनफार्मेशन तक पहुंचाने का एक प्रमुख माध्यम है. आपको बताते चलें कि आज इंटरनेट पर करीब 1.1 अरब से ज्यादा वेबसाइट्स मौजूद हैं, लेकिन इनमें से ज्यादातर वेबसाइट्स पर कभी कोई विजिटर नहीं पहुंचता. कई वेबसाइट्स सिर्फ टेस्टिंग या अभ्यास के लिए बनाई जाती हैं.

1991 में लॉन्च हुई थी पहली वेबसाइट

1 अगस्त 1991 को टिम बर्नर्स-ली और उनकी टीम ने पहली वेबसाइट को सार्वजनिक रूप से पेश किया था. इसी के साथ वर्ल्ड वाइड वेब की शुरुआत हुई, जो आम लोगों के लिए उपलब्ध एक नई डिजिटल सर्विस थी. इस नवाचार ने यूजर्स को हाइपरलिंक्स के जरिए एक डॉक्यूमेंट से दूसरे डॉक्यूमेंट तक आसानी से पहुंचने की सुविधा दी. अब जानकारी तक पहुंचना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया था, क्योंकि वेबपेज आपस में जुड़े हुए थे. यह घटना तकनीकी इतिहास में एक नए दौर की शुरुआत थी, जिसने इंटरनेट को केवल स्थिर फाइलों के संग्रह से बदलकर एक अधिक इंटरैक्टिव और गतिशील माध्यम बना दिया.

इंटरनेट और वर्ल्ड वाइड वेब में क्या अंतर है?

इंटरनेट और वर्ल्ड वाइड वेब को अक्सर एक ही समझ लिया जाता है, लेकिन दोनों अलग-अलग चीजें हैं. वास्तव में, वर्ल्ड वाइड वेब वेबपेजों का एक समूह है, जिसे हम ब्राउजर के जरिए एक्सेस करते हैं. दूसरी ओर, इंटरनेट एक बहुत बड़ा नेटवर्क है, जो दुनियाभर के कंप्यूटरों और डिवाइसेज को आपस में जोड़ता है. सरल शब्दों में कहें तो इंटरनेट एक आधारभूत ढांचा है, जबकि वर्ल्ड वाइड वेब उस ढांचे पर मौजूद जानकारी तक पहुंचने का माध्यम है.

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Author: Ankit Anand

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