अगर आपका किचन बिना गैस सिलेंडर के भी LPG जैसा ही काम करने लगे तो कैसा रहेगा? अब यह कल्पना हकीकत बनती दिख रही है. Plasma Electric Stove एक ऐसी नई तकनीक है, जो बिना गैस के असली फ्लेम जैसा एक्सपीरियंस दे रही है. हाल ही में केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने इस तकनीक को हाइलाइट किया है, जिसके बाद यह चर्चा में आ गया है. बढ़ती LPG कीमतों और क्लीन एनर्जी की जरूरत के बीच यह नई टेक्नोलॉजी किचन का फ्यूचर बन सकती है.
क्या है प्लाज्मा इलेक्ट्रिक स्टोव?
APAPL Electric Flame Plasma Stove एक नई जेनरेशन का कुकिंग डिवाइस है, जो LPG या PNG की जगह बिजली से चलता है. खास बात यह है कि इंडक्शन की तरह बिना फ्लेम के नहीं, बल्कि यह असली आग जैसा हीट पैदा करता है. यह प्लाज्मा आर्क टेक्नोलॉजी पर काम करता है, जिसमें बिजली के जरिए हवा को आयनाइज करके बेहद गर्म फ्लेम तैयार किया जाता है. यानी इसमें न गैस लगती है, न कोई फ्यूल जलता है, सिर्फ बिजली से ही खाना बनता है.
कैसे काम करती है यह तकनीक?
यह स्टोव हवा को आयनाइज करके प्लाज्मा फ्लेम बनाता है, जो बहुत ज्यादा टेंपरेचर पैदा करता है. इसका टेंपरेचर 1200 से 1300 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है. इसमें हीटिंग तुरंत शुरू हो जाती है, ठीक LPG की तरह. इंडक्शन की तरह इंतजार नहीं करना पड़ता, जिससे यह रोटी, तड़का, फ्राई और वोक कुकिंग जैसी भारतीय कुकिंग स्टाइल के लिए काफी काम का है.
LPG जैसा अनुभव, लेकिन बिना गैस
इस स्टोव की सबसे बड़ी खासियत यह है, कि यह गैस चूल्हे जैसा ही एक्सपीरियंस देता है. इसमें फ्लेम दिखाई देती है, नॉब से कंट्रोल होता है और यह स्टील, एल्युमिनियम, आयरन या ब्रास जैसे सभी बर्तनों के साथ काम करता है. इंडक्शन कुकटॉप की तरह इसमें किसी खास बर्तन की जरूरत नहीं होती, जिससे यूजर्स को ज्यादा सुविधा मिलती है.
LPG और इंडक्शन से कितना अलग
LPG या PNG स्टोव गैस पर चलते हैं, जिनमें लीकेज का खतरा रहता है और यह कम एफिशिएंट होते हैं. साथ ही इनमें धुआं और प्रदूषण भी होता है.
इंडक्शन कुकटॉप बिजली से चलता है, लेकिन इसमें फ्लेम नहीं होती और यह हर तरह के बर्तनों के साथ काम नहीं करता. कुछ कुकिंग स्टाइल में यह धीमा भी पड़ जाता है.
वहीं प्लाज्मा इलेक्ट्रिक स्टोव सिर्फ बिजली से चलता है, फ्लेम जैसा हीट देता है, सभी बर्तनों के साथ काम करता है और इसकी एफिशिएंसी 80% से 90% से ज्यादा मानी जाती है. इसमें न धुआं होता है और न कोई उत्सर्जन (Excretion).
फीचर्स जो इसे खास बनाते हैं
यह स्टोव पूरी तरह इलेक्ट्रिक है, यानी इसमें LPG या PNG की जरूरत नहीं पड़ती. इसमें फ्लेम जैसा हीट मिलता है, जिससे कुकिंग आसान और फास्ट हो जाती है. सभी तरह के बर्तन इसमें इस्तेमाल किए जा सकते हैं.
सुरक्षा के लिहाज से इसमें गैस लीकेज का कोई खतरा नहीं है. इसमें ओवरहीट प्रोटेक्शन और ऑटो शट-ऑफ जैसे फीचर्स भी मिलते हैं. इसका ग्लास टॉप मजबूत होता है और मेटल बर्नर्स के साथ आता है. साथ ही इसे साफ करना भी आसान है, क्योंकि इसमें कालिख या गंदगी नहीं बनती.
पावर, कीमत और स्पेसिफिकेशन
यह स्टोव 2500W से 6000W तक की पावर ऑप्शन में आता है और 220V AC सपोर्ट करता है. इसका तापमान 1300 डिग्री सेल्सियस तक जा सकता है. इसका वजन करीब 10 किलो होता है.
इसकी कीमत लगभग ₹35,000 के आसपास बताई जा रही है. यह सिंगल और डबल बर्नर ऑप्शन में उपलब्ध है और घरों के साथ-साथ कमर्शियल यूज के लिए भी सूटेबल है.
कहां-कहां हो सकता है इस्तेमाल?
यह स्टोव सिर्फ घरों तक सीमित नहीं है. इसका इस्तेमाल रेस्टोरेंट, होटल, क्लाउड किचन, फूड ट्रक और इंडस्ट्रियल फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स में भी किया जा सकता है.
भारत के लिए क्यों हो सकता है गेमचेंजर?
PM सूर्य घर योजना जैसी योजनाओं के साथ मिलकर यह तकनीक LPG सिलेंडर पर डिपेंडेंसी कम कर सकती है. इससे घरों का खर्च घट सकता है और क्लीन, रिन्यूएबल एनर्जी को बढ़ावा मिलेगा.
क्या हैं चुनौतियां?
हालांकि यह तकनीक काम की है, लेकिन इसकी शुरुआती कीमत गैस स्टोव से ज्यादा है. इसके अलावा यह पूरी तरह बिजली पर निर्भर है और अभी इसकी जागरूकता भी कम है. लेकिन जैसे-जैसे इसका इस्तेमाल बढ़ेगा और लोकल मैन्युफैक्चरिंग शुरू होगी, इसकी कीमत कम हो सकती है.
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