USB-C लैपटॉप चार्जर से फोन चार्ज किया तो क्या होगा? लगाने से पहले जान लें जरूरी बातें

USB-C Charger: क्या आपने कभी सोचा है कि जो बड़ा चार्जर आपके लैपटॉप को पावर देता है, क्या वही आपके फोन की बैटरी भी चार्ज कर सकता है? और अगर आप ऐसा करते हैं, तो क्या यह तरीका वाकई सेफ है या फिर फोन की बैटरी को नुकसान पहुंचा सकता है? आइए आसान भाषा में इसे समझते हैं.

USB-C Charger: एक बार जरूर हम खुद को ऐसी हालत में पाए होंगे जब फोन की बैटरी खत्म होने लगती है, मोबाइल चार्जर कहीं नहीं दिख रहा है लेकिन लैपटॉप का चार्जर पास में है. दोनों में वही USB-C पोर्ट और वही केबल है. आप इसे लगाते हैं और थोड़ा सावधान रहते हुए देखते हैं कि सब ठीक रहेगा या नहीं. ज्यादातर समय कुछ भी गलत नहीं होता. फोन चार्ज होने लगता है. जो चीजें हमें खुशकिस्मती लगती है, वो असल में USB-C और पावर नेगोशिएशन के सालों के स्टैण्डर्डाइजेशन का नतीजा है.

लेकिन क्या कभी आपने सोचा कि आखिर लैपटॉप वाले चार्जर से फोन कैसे चार्ज हो जाता है? क्या ऐसा करना सेफ है भी या नहीं? आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं.

आखिर लैपटॉप चार्जर से फोन कैसे चार्ज हो जाता है?

आमतौर पर ऐसा इसलिए काम करता है क्योंकि USB-C सिर्फ एक नॉर्मल कनेक्टर नहीं है. इसके पीछे USB Power Delivery नाम का एक सिस्टम होता है, जो पावर आने से पहले ही डिवाइसों को आपस में बात करने देता है. चार्जर बिना सोचे-समझे बिजली नहीं भेजता. फोन पहले बताता है कि वह कितनी पावर संभाल सकता है, और चार्जर उसी हिसाब से सेफ ऑप्शन चुनकर सप्लाई करता है.

USB Implementers Forum के मुताबिक, पावर डिलीवरी की मदद से एक ही चार्जर अलग-अलग वोल्टेज और करंट को सपोर्ट कर सकता है. यही वजह है कि 65W का लैपटॉप चार्जर, कम पावर लेने वाले फोन को नुकसान नहीं पहुंचाता. चार्जर खुद पावर कम कर लेता है और फोन पूरी तरह सेफ रहता है.

इसी वजह से आजकल के स्मार्टफोन बड़े पावर एडॉप्टर से भी बिना किसी खास सेटिंग के आसानी से चार्ज हो जाते हैं. अगर फोन और चार्जर दोनों में USB Power Delivery का सपोर्ट होता है, तो चार्जिंग पूरी तरह कंट्रोल में रहती है.

हर USB-C चार्जर और केबल एक जैसे नहीं होते

मामला तब उलझता है जब लोग कुछ बातें अपने-आप मान लेते हैं. जैसे हर USB-C चार्जर Power Delivery को सही तरीके से सपोर्ट नहीं करता और न ही हर केबल ज्यादा पावर सेफ तरीके से ले जाने लायक होती है. Anker और Belkin जैसी कंपनियों के मुताबिक, केबल की अहमियत लगभग चार्जर जितनी ही होती है. सस्ती या खराब केबल चार्जिंग की स्पीड कम कर सकती है या फोन गर्म होने जैसी दिक्कत पैदा कर सकती है.

लैपटॉप चार्जर से फोन स्लो क्यों चार्ज होता है?

फोन भी इस मामले में एक जैसे नहीं होते. कई ब्रांड USB-C के ऊपर अपने अलग फास्ट चार्जिंग स्टैंडर्ड इस्तेमाल करते हैं. अगर चार्जर और फोन का स्टैंडर्ड आपस में मैच नहीं करता, तो फोन नॉर्मल चार्जिंग मोड में चला जाता है. ऐसे में यूजर्स को लगता है कि लैपटॉप चार्जर उम्मीद से ज्यादा स्लो है. इसमें डिजाइन का फैसला भी शामिल है.

जैसे Apple जानबूझकर iPhone में चार्जिंग स्पीड को लिमिट करता है ताकि बैटरी ज्यादा समय तक ठीक रहे. वहीं Samsung ज्यादा फास्ट चार्जिंग देता है, लेकिन हीट को अलग तरीके से मैनेज करता है. दोनों ही तरीके सोच-समझकर अपनाए गए हैं, ये कोई गलती नहीं है.

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By Ankit anand

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अंकित आनंद टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. वे स्मार्टफोन, टेलीकॉम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कंज्यूमर टेक और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं.

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अंकित आनंद एक टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं, जो डिजिटल मीडिया में टेक और ऑटो सेक्टर से जुड़े विषयों पर लगातार लिखते हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. टेक्नोलॉजी सेक्टर में उनकी रुचि स्मार्टफोन लॉन्च, मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम, टेलीकॉम अपडेट्स, इंटरनेट सेवाओं, AI टूल्स, ऐप्स, गैजेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स और कंज्यूमर टेक्नोलॉजी से जुड़े विषयों में है. वहीं ऑटोमोबाइल सेक्टर में वे नई कारों और बाइक्स की लॉन्चिंग, फीचर्स, कीमत, सेफ्टी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्री के बदलते ट्रेंड्स पर रेगुलर लिखते हैं.

उनकी कोशिश रहती है कि हर खबर में सिर्फ फीचर्स, कीमत या लॉन्च की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी बताया जाए कि वह टेक्नोलॉजी आम लोगों के कितने काम की है, उसे इस्तेमाल करने का एक्सपीरियंस कैसा होगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

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बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई बोर्ड से हुई है. इसके बाद उन्होंने साल 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. पढ़ाई के दौरान ही अंकित की रुचि डिजिटल मीडिया और न्यूज लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर उन्होंने इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया.

प्रभात खबर डिजिटल से पहले अंकित ने Zee News में करीब एक साल तक काम किया. यहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क, कंटेंट रिसर्च, फैक्ट वेरिफिकेशन और न्यूज राइटिंग के अलग-अलग पहलुओं पर काम किया.

विजन

अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नए प्रोडक्ट्स की जानकारी नहीं होतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारी के फैसलों और डिजिटल एक्सपीरियंस पर भी असर डालती हैं.

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