Tech Tips: फोन पर आ रहे कॉल्स और मैसेज असली हैं या फर्जी? जानिए कैसे करें पहचान और रिपोर्ट

Tech Tips: हमारे फोन में कई कॉल्स और मैसेज आते हैं लेकिन कभी-कभी हमें पता नहीं चल पाता कि वो असली हैं या फर्जी. इसका तोड़ निकलने के लिए सरकार ने संचार साथी पोर्टल और ऐप लॉन्च किया है. इस ऐप की मदद से अगर आपको कोई फ्रॉड जैसा कॉल या मैसेज मिलता है, तो पोर्टल या ऐप के “चक्षु” सेक्शन में जाकर रिपोर्ट कर सकते हैं.

Tech Tips: दिनभर में हमारे फोन पर कई कॉल्स और मैसेज आते रहते हैं. अब इनमें से कभी-कभी हमें ये पता नहीं चल पता कि कौन असली है और कौन फर्जी. लेकिन अब अपने स्मार्टफोन पर फ्रॉड कॉल्स और मैसेज को पहचानना और उसे रिपोर्ट करना काफी आसान हो गया है. इसके लिए भारतीय सरकार ने संचार साथी पोर्टल और ऐप लॉन्च किया है.

इस ऐप की मदद से अगर आपको कोई फ्रॉड जैसा कॉल या मैसेज मिलता है, तो पोर्टल या ऐप के “चक्षु” सेक्शन में जाकर उसकी शिकायत कर सकते हैं. रिपोर्ट होते ही उस नंबर को ब्लॉक कर दिया जाएगा, जिससे कॉल या मैसेज आया था. अब सवाल ये आता है कि आखिर हमें कैसे पता चलेगा वो कॉल्स और मैसेज असली हैं या फर्जी? आइए आपको बताते हैं इसकी पहचान कैसे करें?

फ्रॉड कॉल्स कैसे पहचानें?

सरकार ने बैंकिंग, इंश्योरेंस और फाइनेंशियल सर्विस से जुड़ी असली कॉल्स के लिए नया 160 सीरीज नंबर जारी किया है. अगर आपको कोई कॉल बैंक या फाइनेंशियल सर्विस के नाम पर आती है, लेकिन उसका नंबर 160 से शुरू नहीं होता, तो समझ लें वो कॉल फ्रॉड या फर्जी हो सकती है.

असली और नकली मैसेज में फर्क कैसे करें?

किसी भी असली या फर्जी SMS को पहचानने के लिए सबसे पहले उसके सेंडर कोड पर ध्यान दें. ये कोड आपको ठगी से बचा सकता है. अगर मैसेज असली है तो उसके सेंडर आईडी (जो मैसेज की शुरुआत में दिखती है) के आखिर में एक डैश (-) के बाद कोई खास अक्षर होता है, जैसे -S, -G या -P. ऐसे कोड वाले मैसेज असली होते हैं. वहीं अगर मैसेज किसी अनजान या बिना नाम वाले नंबर से आया है, तो उसे शक के नजरिए से देखें क्यूंकि वो फर्जी भी हो सकते हैं.

इन कोड्स का मतलब क्या होता है?

S (Service): इसका मतलब है ऐसे मैसेज जो बैंकिंग सर्विस, ट्रांजैक्शन या उन टेलिकॉम सर्विस से जुड़े हों, जिनका आप पहले से इस्तेमाल कर रहे हैं.

G (Government): इसका मतलब है सरकारी योजनाओं या किसी सरकारी विभाग की ओर से आने वाले जरूरी अलर्ट या जानकारी वाले मैसेज.

P (Promotion): इसका मतलब है ऐसे प्रमोशनल मैसेज जो किसी कंपनी की ओर से भेजे गए हों और जिन्हें दूरसंचार विभाग (DoT) ने मंजूरी दी हो.

FAQ

फेक कॉल या फ्रॉड मैसेज की शिकायत कहां कर सकते हैं?

इसके लिए सरकार ने संचार साथी पोर्टल और ऐप बनाया है. आप इसमें ‘चक्षु (Chakshu)’ सेक्शन में जाकर शिकायत दर्ज कर सकते हैं.

असली बैंक या फाइनेंशियल सर्विस कॉल्स कैसे पहचानें?

अगर कॉल 160 सीरीज नंबर से आ रही है, तो वो असली है. अगर नंबर 160 से शुरू नहीं होता, तो वो कॉल फर्जी हो सकती है.

SMS के आखिर में आने वाले S, G और P का मतलब क्या है?

S (Service): बैंकिंग या सर्विस से जुड़ा मैसेज
G (Government): सरकारी योजनाओं या अलर्ट वाला मैसेज
P (Promotion): किसी कंपनी का प्रमोशनल मैसेज

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By Ankit anand

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अंकित आनंद टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. वे स्मार्टफोन, टेलीकॉम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कंज्यूमर टेक और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं.

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अंकित आनंद एक टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं, जो डिजिटल मीडिया में टेक और ऑटो सेक्टर से जुड़े विषयों पर लगातार लिखते हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. टेक्नोलॉजी सेक्टर में उनकी रुचि स्मार्टफोन लॉन्च, मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम, टेलीकॉम अपडेट्स, इंटरनेट सेवाओं, AI टूल्स, ऐप्स, गैजेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स और कंज्यूमर टेक्नोलॉजी से जुड़े विषयों में है. वहीं ऑटोमोबाइल सेक्टर में वे नई कारों और बाइक्स की लॉन्चिंग, फीचर्स, कीमत, सेफ्टी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्री के बदलते ट्रेंड्स पर रेगुलर लिखते हैं.

उनकी कोशिश रहती है कि हर खबर में सिर्फ फीचर्स, कीमत या लॉन्च की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी बताया जाए कि वह टेक्नोलॉजी आम लोगों के कितने काम की है, उसे इस्तेमाल करने का एक्सपीरियंस कैसा होगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई और करियर

बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई बोर्ड से हुई है. इसके बाद उन्होंने साल 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. पढ़ाई के दौरान ही अंकित की रुचि डिजिटल मीडिया और न्यूज लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर उन्होंने इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया.

प्रभात खबर डिजिटल से पहले अंकित ने Zee News में करीब एक साल तक काम किया. यहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क, कंटेंट रिसर्च, फैक्ट वेरिफिकेशन और न्यूज राइटिंग के अलग-अलग पहलुओं पर काम किया.

विजन

अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नए प्रोडक्ट्स की जानकारी नहीं होतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारी के फैसलों और डिजिटल एक्सपीरियंस पर भी असर डालती हैं.

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