कंटेंट के पीछे इंसानी दिमाग या ChatGPT का हाथ! मिनटों में चलेगा पता, जानिए कैसे कर सकते हैं वेरिफाई

आज के समय में ChatGPT का इस्तेमाल कुछ ज्यादा ही बढ़ गया है. हर काम के लिए लोग ChatGPT की मदद ले रहे हैं. स्टूडेंट्स हो या फिर ऑफिस में काम करने वाले इंप्लॉइस सभी ChatGPT की मदद से काम को निपटा रहे हैं. ऐसे में कई लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि ChatGPT से लिखे कंटेंट की पहचान कैसे की जाए. आज हम आपको इससे जुड़ी कुछ आसान टिप्स देने वाले हैं. जिससे आप मिनटों में पता कर सकेंगे कि कंटेंट ChatGPT का है या इंसानी दिमाग का.

आज के समय में हर कोई अपना काम ChatGPT से करवा रहा है. फिर चाहे स्टूडेंट हो या कोई इंप्लॉइ हर कोई ChatGPT की मदद ले रहा है. ज्यादातर ChatGPT की मदद से लोग लिखने वाले काम करवा रहे हैं. स्टूडेंट्स अपना पूरा का पूरा असाइनमेंट ChatGPT से करवा रहे हैं तो वहीं इंप्लॉइस भी बढ़िया कंटेंट के लिए AI कंटेंट जनरेटिंग टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं. हालांकि, इससे समय और मेहनत दोनों की ही बचत होती है. लेकिन इससे एक परेशानी भी है. AI कंटेंट जनरेटिंग टूल्स के इस्तेमाल से काम तो पूरे हो जा रहे हैं. लेकिन इससे इंसान का क्रिएटिव माइंड कहीं छुप जा रहा है. जिससे इंसान कि काबिलियत सामने नहीं आ पा रही है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ChatGPT से लिखे गए कंटेंट का पता लगाया जा सकता है? अगर हां, तो कैसे?

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ChatGPT दे रहा समाधान

जैसा कि आप जानते हैं ChatGPT हर समस्या का समाधान चुटकियों में दे देता है. ऐसे में इस समस्या का समाधान भी ChatGPT ही दे रहा है. जी हां, अब कई सारे AI टूल्स ऐसे हैं, जो कंटेंट को पहचान कर बता रहे हैं कि आखिर कंटेंट किसने लिखा है. कंटेंट के पीछे ChatGPT का दिमाग है या इंसान का.

कंटेंट पहचानने के ये AI टूल्स करें इस्तेमाल

AI टूल्स जैसे GPTZero, Sapling AI Detector, Copyleaks AI Content Detector, Originality.ai और Writer.com जैसे टूल्स कंटेंट को गहराई से जांचते हैं. जिसके बाद यह बता देते हैं कि कंटेंट के पीछे इंसान की मेहनत है या AI की. इसके लिए आपको बस इन AI प्लेटफॉर्म्स पर जाना है और अपने कंटेंट कॉपी कर वहां पेस्ट कर देना है. जिसके बाद जांच कर यह आपको बता देगा कि कंटेंट लिखने के लिए किसका दिमाग लगा है. ध्यान रहे कि इन प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करने के लिए आपको सब्सक्रिप्शन लेना पड़ सकता है. या फिर कभी-कभी आपको किसी इंसान के लिखे कंटेंट में भी AI से लिखा हुआ दिखा सकता है.

डेटा और फैक्ट्स भी जांचना जरूरी

कई बार AI ChatGPT गलत जानकारी भी दे देता है. ये बातें खुद ChatGPT के फाउंडर सैम ऑल्टमैन ने कही थी. ऐसे में ChatGPT द्वारा दिए गए कंटेंट पर पूरी तरह से भरोसा करना भी सही नहीं है. क्योंकि, कई बार यह फैक्ट्स को गलत तरीके से भी पेश कर देता है. ऐसे में इस तरह के कंटेंट को क्रॉस-चेक करना जरूरी है. इसके अलावा कंटेंट में प्लेजरिज्म चेक करना भी उतना ही जरूरी है. क्योंकि, AI कई बार किसी साइट में दी गई जानकारी को भी कॉपी कर दे देता है. ऐसे में प्लेजरिज्म जांचने के लिए Quetext, Turnitin और Grammarly टूल्स का इस्तेमाल कर सकते हैं.

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लेखक के बारे में

By Shivani shah

शिवानी शाह टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में वह कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रही हैं. वह स्मार्टफोन्स, टेलीकॉम अपडेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), गैजेट्स, बायर्स गाइड और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों को कवर करती हैं.

टेक्नोलॉजी सेक्टर में शिवानी शाह की मजबूत पकड़ स्मार्टफोन लॉन्च/रिव्यूज, गैजेट रिव्यूज, टिप्स एंड ट्रिक्स, बायर्स गाइड, टेलीकॉम अपडेट्स, AI टूल्स/फीचर्स और ट्रेंडिंग टेक टॉपिक्स से जुड़े विषयों में है. ऑटोमोबाइल सेक्टर में वह नई कार/बाइक/स्कूटर्स की लॉन्चिंग, गाड़ियों के फीचर्स, बायर्स गाइड, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), ट्रेंडिंग ऑटो टॉपिक्स और अपडेट्स पर रिसर्च-बेस्ड कंटेंट लिखती हैं. उनकी कोशिश रहती है कि हर खबर सिर्फ लॉन्च और फीचर्स की जानकारी तक सीमित न रहे, बल्कि पाठकों को यह भी समझ आए कि वह उनके लिए कितनी काम की है.

शिवानी शाह ने साल 2020 में करीम सिटी कॉलेज, जमशेदपुर से पत्रकारिता में ग्रेजुएशन और साल 2024 में अपेक्स यूनिवर्सिटी, जयपुर से मास्टर्स की पढ़ाई पूरी की. पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने मीडिया और डिजिटल स्टोरीटेलिंग की बारीकियों को समझा और धीरे-धीरे टेक और ऑटो जर्नलिज्म की ओर अपना फोकस बढ़ाया.

अपने करियर की शुरुआत शिवानी शाह ने झारखंड के डिजिटल न्यूज पोर्टल Lagatar.com से की, जहां करीब एक साल तक उन्होंने काम किया. इसके बाद जयपुर में पढ़ाई के दौरान Hamara Samachar यूट्यूब चैनल में वह न्यूज एंकर रहीं. मास्टर्स पूरी करने के बाद उन्होंने झारखंड डिजिटल न्यूज पोर्टल The News Post में करीब एक साल तक काम किया. इन संस्थानों में काम करने के दौरान उन्होंने लोगों तक सही, भरोसेमंद और आसान भाषा में जानकारी पहुंचाने का अनुभव हासिल किया.

शिवानी का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी और खरीदारी के फैसलों को प्रभावित करती हैं. इसलिए वह हर खबर को अच्छी तरह रिसर्च करके, आसान भाषा में और सही जानकारी के साथ लिखती हैं, ताकि हर उम्र के पाठक उसे आसानी से समझ सकें.

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