UPI New Feature: अब AI खुद करेगा छोटी UPI पेमेंट्स, बिना पिन और OTP के होंगे बिल पेमेंट

एनपीसीआई 'यूनिफाइड एजेंट प्रोटोकॉल' तैयार कर रहा है, जिससे एआई एजेंट्स उपभोक्ता द्वारा तय सीमा में ऑटोमैटिक छोटे यूपीआई भुगतान कर सकेंगे। जानिए कैसे काम करेगी यह नई तकनीक.

डिजिटल वित्तीय लेनदेन के क्षेत्र में भारत एक और नया इतिहास रचने की दहलीज पर खड़ा है. नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) एक ऐसी क्रांतिकारी प्रणाली पर काम कर रहा है, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI एजेंट्स को आपके लिए छोटे UPI भुगतान स्वचालित रूप से करने की अनुमति दे सकती है. इस व्यवस्था के लागू होने के बाद उपयोगकर्ताओं को रोजमर्रा की छोटी-मोटी खरीदारी के लिए हर बार पिन या ओटीपी दर्ज करने की झंझट से मुक्ति मिल जाएगी. 'एजेंटिक पेमेंट्स' (Agentic Payments) नाम की यह तकनीक भारतीय फिनटेक जगत में लेनदेन के तरीके को पूरी तरह बदलकर रख देगी.

यूनिफाइड एजेंट प्रोटोकॉल: कैसे काम करेगी यह नई तकनीक

न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, एनपीसीआई इस नई सुविधा के लिए 'यूनिफाइड एजेंट प्रोटोकॉल' (Unified Agent Protocol - UAP) नामक एक व्यापक ढांचा तैयार कर रहा है. इसके तहत यूजर अपने एआई एजेंट के लिए पहले से ही नियम और खर्च की सीमा तय कर सकेंगे. उदाहरण के तौर पर, आप यह निर्धारित कर सकते हैं कि आपका एआई असिस्टेंट किराने का सामान, दूध, या नियमित ई-कॉमर्स ऑर्डर के लिए एक निश्चित राशि तक का भुगतान खुद-ब-खुद कर दे. इसमें उपभोक्ता की वित्तीय सुरक्षा का विशेष ध्यान रखते हुए ट्रांजेक्शन लिमिट और मर्चेंट गाइडलाइंस भी तय की जाएंगी.

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मौजूदा यूपीआई फीचर्स पर आधारित होगी नई प्रणाली

यह नई ऑटोमैटिक पेमेंट व्यवस्था पूरी तरह से नए सिर से बनाने के बजाय यूपीआई के मौजूदा फीचर्स का इस्तेमाल करेगी. इसमें मुख्य रूप से 'UPI Circle' और 'Reserve Pay' जैसे टूल्स की मदद ली जाएगी. यूपीआई सर्कल की मदद से मुख्य खाताधारक किसी द्वितीयक यूजर या एआई एजेंट को भुगतान अधिकार सौंप सकता है. वहीं रिजर्व पे के जरिए निश्चित अवधि और राशि के लिए फंड ब्लॉक किया जा सकता है. इन्हीं तकनीकों के तालमेल से एआई बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के पूर्व-निर्धारित सीमा के भीतर छोटे भुगतान निपटा सकेगा.

सुरक्षा और जवाबदेही के कड़े नियम

एआई एजेंट्स को आर्थिक लेनदेन का अधिकार देने से जुड़ी सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए व्यापक फ्रेमवर्क पर काम जारी है. प्रणाली में यूजर की पहचान की पुष्टि, खर्च की सीमा, और लेनदेन का पूरा रिकॉर्ड (ऑडिट ट्रेल) शामिल होगा. यदि कोई एआई एजेंट गलती से गलत भुगतान कर देता है या निर्धारित सीमा से अधिक खर्च कर देता है, तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी- इसे तय करने के लिए एक अलग 'लायबिलिटी फ्रेमवर्क' भी तैयार किया जा रहा है.

ग्लोबल फिनटेक फेस्ट में हो सकती है घोषणा

हालांकि एनपीसीआई की ओर से अभी तक इस सर्विस के आधिकारिक लॉन्च या समयसीमा की औपचारिक पुष्टि नहीं की गई है. लेकिन सूत्रों और रिपोर्टों का दावा है कि मुंबई में आयोजित होने वाले 'ग्लोबल फिनटेक फेस्ट' (Global Fintech Fest) के दौरान इस महत्वाकांक्षी यूनिफाइड एजेंट प्रोटोकॉल का अनावरण किया जा सकता है. अगर यह व्यवस्था लागू होती है, तो वैश्विक स्तर पर राष्ट्रीय स्तर के पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर में एआई पेमेंट्स को एकीकृत करने वाला भारत दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल हो जाएगा.

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. क्या एआई एजेंट मेरे बैंक खाते से मनचाहा पैसा खर्च कर सकता है?

जी नहीं, उपभोक्ता स्वयं एआई एजेंट के लिए खर्च करने की अधिकतम सीमा, मर्चेंट श्रेणी और नियम निर्धारित करेंगे। एआई केवल उन्हीं शर्तों के अनुसार छोटे भुगतान कर सकेगा.

2. ऑटोमैटिक यूपीआई पेमेंट्स के लिए किस तकनीक का इस्तेमाल होगा?

यह सुविधा एनपीसीआई के प्रस्तावित 'यूनिफाइड एजेंट प्रोटोकॉल' (UAP) पर काम करेगी, जो यूपीआई सर्कल और रिजर्व पे जैसे मौजूदा तंत्रों का उपयोग करती है.

3. क्या यह सुविधा अभी सभी यूपीआई यूजर्स के लिए लाइव हो चुकी है?

नहीं, यह सुविधा अभी योजना और विकास के चरण में है. एनपीसीआई की आधिकारिक घोषणा और दिशानिर्देश जारी होने के बाद ही यह आम जनता के लिए उपलब्ध होगी.

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By राजीव कुमार

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