स्कूल की पढ़ाई बीच में छोड़ दी, 8 हजार की नौकरी की और फिर खड़ी कर दी Zerodha, जानिए निखिल कामथ की कहानी

प्रभात खबर की इस खास सीरीज ‘टेक टाइकून्स की कहानी’ में आज हम जानेंगे निखिल कामथ के बारे में. ये वही भारतीय बिजनेसमैन हैं, जिन्होंने स्कूल की पढ़ाई बीच में छोड़ दी, कॉल सेंटर में 8-9 हजार रुपये महीने की नौकरी की और फिर अपने भाई नितिन कामथ के साथ मिलकर Zerodha की शुरुआत की.

आज भारत में बिजनेस और शेयर बाजार की बात होती है, तो निखिल कामथ का नाम जरूर आता है. वह Zerodha नाम की बड़ी कंपनी के को-फाउंडर हैं. इसके अलावा वह बिजनेस में निवेश भी करते हैं और अपना WTF पॉडकास्ट भी चलाते हैं. इस पॉडकास्ट में वह बिजनेस, टेक्नोलॉजी, राजनीति और दूसरे कई मुद्दों पर बड़े लोगों से बात करते हैं.

लेकिन निखिल की कहानी किसी बड़े कॉलेज या यूनिवर्सिटी से शुरू नहीं हुई थी. उन्होंने स्कूल की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी थी. इसके बाद उन्होंने एक कॉल सेंटर में करीब 8-9 हजार रुपये महीने की नौकरी की. आज निखिल कामथ भारत के बड़े बिजनेसमैन और निवेशकों में गिने जाते हैं. उनकी कहानी खास है क्योंकि उन्होंने सफलता पाने के लिए आम लोगों से अलग रास्ता चुना और अपनी मेहनत से बड़ी पहचान बनाई.

‘टेक टाइकून्स की कहानी’ सीरीज की इस कड़ी में आइए जानते हैं निखिल कामथ के बारे में, जिन्होंने कभी स्कूल की पढ़ाई को छोड़ दी थी, लेकिन सीखना कभी नहीं छोड़ा. शतरंज से लेकर शेयर बाजार, Zerodha से लेकर निवेश और अब पॉडकास्टिंग तक, उनका करियर लगातार नए मोड़ लेता रहा है.

बचपन से ही स्कूल से नहीं बन पाई दोस्ती

निखिल कामथ ने LinkedIn के CEO Ryan Roslansky के साथ बातचीत में अपने बचपन के बारे में खुलकर बताया था. उन्होंने कहा था कि उन्हें स्कूल जाना कभी ज्यादा पसंद नहीं था. वह बचपन से ही दूसरों के बताए रास्ते पर चलने के बजाय अपनी मर्जी से काम करना पसंद करते थे. निखिल करीब 15-16 साल की उम्र तक स्कूल गए और फिर पढ़ाई छोड़ दी. हालांकि, बाद में उन्होंने माना कि स्कूल छोड़ने को लेकर उन्हें थोड़ा पछतावा भी है. 

उनका कहना है कि कॉलेज सिर्फ पढ़ाई के लिए नहीं होता, वहां नए लोगों से मिलने और दोस्त बनाने का भी मौका मिलता है. लेकिन उस समय निखिल का मन पढ़ाई में नहीं लगता था. वह कुछ नया करना चाहते थे और अपने दम पर पैसे कमाना चाहते थे. शायद यहीं से उनके अलग सफर की शुरुआत हुई.

नौवीं क्लास में शुरू किया मोबाइल फोन बेचने का काम

निखिल कामथ के शुरुआती दिनों से जुड़ा एक किस्सा काफी दिलचस्प है. उन्होंने Ryan Roslansky के साथ बातचीत में बताया था कि जब वह नौवीं क्लास में थे, तब उनके हाथ एक मोबाइल फोन लगा. उन्होंने उस फोन को बेच दिया और उन्हें कुछ फायदा हुआ. इसके बाद उनके मन में एक आइडिया आया. उन्होंने सोचा कि अगर एक फोन बेचकर पैसे कमाए जा सकते हैं, तो ऐसे और फोन खरीदकर और बेचकर भी फायदा कमाया जा सकता है.

धीरे-धीरे उन्होंने इसे छोटा सा काम बना लिया. वह फोन खरीदते और फिर उन्हें बेच देते थे. लेकिन यह काम ज्यादा दिनों तक नहीं चल पाया. जब उनकी मां को इसके बारे में पता चला तो उन्होंने निखिल के पास रखे फोन टॉयलेट में फ्लश कर दिए. यह किस्सा काफी अनोखा है. उस समय निखिल स्कूल में पढ़ रहे थे, लेकिन साथ ही कम उम्र में चीजें खरीदकर और बेचकर पैसे कमाना भी सीख रहे थे.

17 साल की उम्र में कॉल सेंटर पहुंचे

स्कूल छोड़ने के बाद निखिल ने एक कॉल सेंटर में नौकरी शुरू की. वह रात की शिफ्ट में काम करते थे. यही नौकरी उनकी जिंदगी का एक बड़ा मोड़ साबित हुई. नौकरी करने के साथ-साथ निखिल को शेयर बाजार में दिलचस्पी होने लगी. वह खाली समय में शेयर बाजार को समझने और उसके बारे में सीखने की कोशिश करते थे. उन्होंने फाइनेंस की पढ़ाई किसी बड़े कॉलेज से नहीं की थी, इसलिए उन्होंने किताबें पढ़कर और अपने अनुभव से शेयर बाजार को समझना शुरू किया.

निखिल ने बताया है कि उस समय उनके कई दोस्त कॉलेज में पढ़ रहे थे और डॉक्टर, इंजीनियर जैसे बड़े करियर की तैयारी कर रहे थे. इसे देखकर निखिल को कभी-कभी चिंता होती थी कि उन्होंने स्कूल छोड़कर सही फैसला लिया या नहीं. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. वह लगातार नई चीजें सीखते रहे और ज्यादा किताबें पढ़ने लगे. उन्हें खासकर यह जानने में दिलचस्पी थी कि लोग अपने पैसे को कहां और कैसे लगाते हैं.

बड़े भाई नितिन के साथ शुरू हुआ Zerodha का सफर

करीब 20 साल की उम्र के आसपास निखिल ने कॉल सेंटर की नौकरी छोड़ दी. तब तक वह ट्रेडिंग से कुछ पैसे कमाने लगे थे. इसके बाद उन्होंने अपने बड़े भाई नितिन कामथ के साथ काम करना शुरू किया. दोनों को ट्रेडिंग और ब्रोकिंग इंडस्ट्री का एक्सपीरियंस था. साल 2010 में दोनों भाइयों ने Zerodha की शुरुआत की.

उस समय भारत में शेयर बाजार में ट्रेडिंग करना कई लोगों के लिए महंगा और जटिल माना जाता था. Zerodha ने कम लागत और टेक्नोलॉजी बेस्ड ब्रोकिंग मॉडल के साथ इस बाजार में एंट्री की. धीरे-धीरे Zerodha भारत के सबसे बड़े रिटेल ब्रोकिंग प्लेटफॉर्म्स में शामिल हो गया. Zerodha की अपनी ऑफिशियल वेबसाइट के मुताबिक, निखिल कंपनी में फाइनेंसियल प्लानिंग को लीड करते हैं.

Zerodha के बाद भी नहीं रुके निखिल

Zerodha को सफलता मिलने के बाद निखिल कामथ ने सिर्फ ब्रोकिंग बिजनेस तक खुद को सीमित नहीं रखा. उन्होंने True Beacon नाम की कंपनी भी शुरू की, जो लोगों के पैसे को निवेश करने और उसे मैनेज करने का काम करती है. यहां निखिल और उनकी टीम निवेश के अलग तरीके अपनाने पर फोकस करती है.

निखिल की दिलचस्पी धीरे-धीरे नए स्टार्टअप्स और बिजनेस में भी बढ़ने लगी. उन्होंने कई नई कंपनियों और अलग-अलग सेक्टर्स में निवेश करना शुरू किया. पिछले कुछ सालों में निखिल की एक नई पहचान पॉडकास्टर के रूप में भी बनी है. वह WTF is with Nikhil Kamath नाम से पॉडकास्ट करते हैं. इसमें वह बिजनेस, टेक्नोलॉजी, निवेश, राजनीति और समाज जैसे कई मुद्दों पर बड़े और मशहूर लोगों से बातचीत करते हैं.

सफलता से ज्यादा गलतियों से सीखने में भरोसा

निखिल कामथ की सोच का एक दिलचस्प पहलू यह है कि वह सफलता को सबसे बड़ा शिक्षक नहीं मानते. Ryan Roslansky के साथ बातचीत में उन्होंने कहा था कि उन्होंने जो कुछ सीखा है, वह ज्यादातर अपनी गलतियों और असफलताओं से सीखा है. उनके मुताबिक, सफलता हमेशा ज्यादा सिखाती नहीं है. यह सोच उनकी पूरी जर्नी में भी दिखाई देती है. 

स्कूल छोड़ना, कॉल सेंटर में नौकरी करना, शेयर बाजार में खुद सीखना और फिर एक ऐसी कंपनी बनाना जिसने भारतीय ब्रोकिंग इंडस्ट्री को बदल दिया, निखिल का करियर किसी पहले से तैयार प्लान के हिसाब से नहीं चला. उन्होंने रास्ते में फैसले लिए, गलतियां कीं और उनसे सीखा.

नोट: यह लेख प्रभात खबर की ‘टेक टायकून्स की कहानी’ सीरीज का हिस्सा है. इस सीरीज के जरिए हम टेक जगत की अलग-अलग दिग्गज हस्तियों की कहानी आपके सामने ला रहे हैं. जानेंगे कि उन्होंने अपने करियर की शुरुआत कैसे की, किन चुनौतियों का सामना किया और किस तरह अपनी मेहनत और काबिलियत के दम पर सफलता की ऊंचाइयों तक पहुंचे. इस सीरीज की अगली कड़ी में हम 11 सितंबर को टेक इंडस्ट्री के एक और बड़े नाम की कहानी आपके सामने लेकर आएंगे. तब तक जुड़े रहिए हमारे साथ.

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लेखक के बारे में

By अंकित आनंद

शॉर्ट बायो

अंकित आनंद टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. वे स्मार्टफोन, टेलीकॉम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कंज्यूमर टेक और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं.

काम के बारे में

अंकित आनंद एक टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं, जो डिजिटल मीडिया में टेक और ऑटो सेक्टर से जुड़े विषयों पर लगातार लिखते हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. टेक्नोलॉजी सेक्टर में उनकी रुचि स्मार्टफोन लॉन्च, मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम, टेलीकॉम अपडेट्स, इंटरनेट सेवाओं, AI टूल्स, ऐप्स, गैजेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स और कंज्यूमर टेक्नोलॉजी से जुड़े विषयों में है. वहीं ऑटोमोबाइल सेक्टर में वे नई कारों और बाइक्स की लॉन्चिंग, फीचर्स, कीमत, सेफ्टी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्री के बदलते ट्रेंड्स पर रेगुलर लिखते हैं.

उनकी कोशिश रहती है कि हर खबर में सिर्फ फीचर्स, कीमत या लॉन्च की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी बताया जाए कि वह टेक्नोलॉजी आम लोगों के कितने काम की है, उसे इस्तेमाल करने का एक्सपीरियंस कैसा होगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई और करियर

बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई बोर्ड से हुई है. इसके बाद उन्होंने साल 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. पढ़ाई के दौरान ही अंकित की रुचि डिजिटल मीडिया और न्यूज लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर उन्होंने इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया.

प्रभात खबर डिजिटल से पहले अंकित ने Zee News में करीब एक साल तक काम किया. यहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क, कंटेंट रिसर्च, फैक्ट वेरिफिकेशन और न्यूज राइटिंग के अलग-अलग पहलुओं पर काम किया.

विजन

अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नए प्रोडक्ट्स की जानकारी नहीं होतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारी के फैसलों और डिजिटल एक्सपीरियंस पर भी असर डालती हैं.

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