Microsoft अब Windows 11 की सबसे बड़ी शिकायतों में शामिल स्लो परफॉर्मेंस को सुधारने की तैयारी में है. कंपनी एक नए फीचर की टेस्टिंग कर रही है, जो ऐप खोलते समय या Start Menu इस्तेमाल करते वक्त प्रोसेसर की स्पीड को कुछ सेकंड के लिए अचानक बढ़ा देगा. दावा किया जा रहा है कि इससे Windows 11 पहले से काफी ज्यादा फास्ट और रिस्पॉन्सिव महसूस हो सकता है. खास बात यह है कि इसी तरह की तकनीक को Apple अपने macOS में लंबे समय से इस्तेमाल करता आ रहा है.
क्या है नया Low Latency Profile फीचर?
Microsoft जिस फीचर पर काम कर रहा है, उसका नाम Low Latency Profile बताया जा रहा है. इसका काम सिस्टम में किसी महत्वपूर्ण गतिविधि के दौरान CPU की फ्रीक्वेंसी को थोड़े समय के लिए अधिकतम स्तर तक पहुंचाना है.
उदाहरण के तौर पर जब यूजर कोई ऐप खोलता है, Start Menu पर क्लिक करता है या Context Menu इस्तेमाल करता है, तब सिस्टम 1 से 3 सेकंड तक प्रोसेसर की ताकत बढ़ा देगा. इसके बाद CPU सामान्य स्थिति में लौट आएगा. इसका मकसद यूजर को तुरंत प्रतिक्रिया वाला अनुभव देना है ताकि सिस्टम धीमा महसूस न हो.
ऐप ओपनिंग स्पीड में बड़ा सुधार
रिपोर्ट्स के मुताबिक इस फीचर से Edge, Outlook और दूसरे बिल्ट-इन ऐप्स की लॉन्चिंग स्पीड में करीब 40 प्रतिशत तक सुधार देखा गया है. वहीं Start Menu और Context Menu जैसे हिस्से पहले के मुकाबले 70 प्रतिशत तक तेजी से खुलते दिखाई दिए.
Microsoft का कहना है कि यह बदलाव केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आम यूजर्स रोजमर्रा के इस्तेमाल में इसका फर्क महसूस कर पाएंगे. खासकर पुराने या कम पावर वाले लैपटॉप्स में इसका असर ज्यादा देखने को मिल सकता है.
Apple और Android में पहले से मौजूद है ऐसी तकनीक
Microsoft के इस कदम पर कुछ लोगों ने सवाल उठाए कि क्या यह सिर्फ Windows की कमजोरी छिपाने का तरीका है. इस पर Microsoft के वाइस प्रेसिडेंट Scott Hanselman ने जवाब देते हुए कहा कि Apple लंबे समय से यही तकनीक इस्तेमाल करता है और लोगों को उससे कोई परेशानी नहीं होती.
दरअसल macOS में QualityOfService सिस्टम और Android में Dynamic Performance Framework इसी तरह काम करते हैं. यानी जरूरत पड़ने पर सिस्टम थोड़े समय के लिए हार्डवेयर की ताकत बढ़ाकर यूजर अनुभव बेहतर बनाता है.
कमजोर लैपटॉप्स को मिल सकता है सबसे ज्यादा फायदा
शुरुआती टेस्टिंग में यह फीचर खासकर लो-एंड सिस्टम्स पर काफी असरदार नजर आया. रिपोर्ट्स के अनुसार केवल 2 CPU कोर और 4GB RAM वाले कमजोर वर्चुअल सिस्टम में भी ऐप्स पहले की तुलना में कहीं ज्यादा तेजी से खुलने लगे.
अच्छी बात यह है कि यह फीचर पूरी तरह ऑटोमैटिक होगा. यूजर को अलग से कोई सेटिंग ऑन करने की जरूरत नहीं पड़ेगी. साथ ही कम समय के लिए CPU स्पीड बढ़ने की वजह से बैटरी और हीटिंग पर असर भी सीमित रहने की बात कही जा रही है.
अभी टेस्टिंग में है नया फीचर
फिलहाल Low Latency Profile Windows Insider प्रोग्राम के जरिए टेस्ट किया जा रहा है. कंपनी ने इसकी आधिकारिक रिलीज डेट की घोषणा नहीं की है, लेकिन यदि शुरुआती टेस्ट सफल रहे तो आने वाले अपडेट्स में यह फीचर Windows 11 यूजर्स तक पहुंच सकता है.
यदि ऐसा होता है, तो यह Windows 11 के लिए सबसे उपयोगी परफॉर्मेंस अपग्रेड्स में से एक माना जा सकता है, क्योंकि इसका असर सीधे रोजमर्रा के इस्तेमाल पर दिखाई देगा.
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