अगर आपको भी दिनभर अनजान नंबरों से कॉल आती हैं, तो आप अकेले नहीं हैं. भारत में स्पैम कॉल की समस्या तेजी से बढ़ती जा रही है और अब यह वैश्विक स्तर पर भी चिंता का विषय बन चुकी है. कॉल पहचान प्लैटफॉर्म Truecaller की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत दुनिया के उन देशों में शामिल हो गया है जहां सबसे ज्यादा स्पैम कॉल आती हैं. खास बात यह है कि इस सूची में भारत पांचवें स्थान पर है, जो स्थिति की गंभीरता को साफ दिखाता है.
किन देशों में सबसे ज्यादा स्पैम कॉल?
रिपोर्ट के अनुसार, स्पैम कॉल के मामले में इंडोनेशिया सबसे आगे है. इसके बाद चिली, वियतनाम और ब्राजील जैसे देश आते हैं. भारत इस लिस्ट में पांचवें नंबर पर है.
यह रैंकिंग इस बात का संकेत है कि भारत में मोबाइल यूजर्स को अनचाही कॉल्स का सामना लगातार बढ़ रहा है और यह समस्या अब बड़े पैमाने पर फैल चुकी है.
भारत में क्यों बढ़ रही हैं स्पैम कॉल?
भारत में स्पैम कॉल का सबसे बड़ा कारण सेल्स और टेलीमार्केटिंग कॉल्स हैं. कुल स्पैम कॉल में इनकी हिस्सेदारी करीब 36% है.
इसके अलावा, बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं से जुड़ी कॉल्स भी बड़ी संख्या में आती हैं, जिनकी हिस्सेदारी लगभग 18% है.
हालांकि सबसे चिंता की बात यह है कि करीब 12% कॉल्स सीधे धोखाधड़ी से जुड़ी होती हैं, जो लोगों के लिए बड़ा खतरा बन सकती हैं.
कितनी बड़ी है समस्या?
रिपोर्ट बताती है कि 2025 में दुनियाभर में 68 अरब से ज्यादा स्पैम और फ्रॉड कॉल्स की पहचान की गई.
भारत में स्पैम कॉल की तीव्रता 66% दर्ज की गई, यानी हर दूसरे यूजर को इस समस्या का सामना करना पड़ रहा है.
यह आंकड़ा दिखाता है कि स्पैम कॉल सिर्फ परेशानी नहीं, बल्कि एक बड़ा डिजिटल खतरा बन चुकी है.
यूजर्स पर क्या पड़ रहा असर?
लगातार आने वाली स्पैम कॉल्स से यूजर्स का समय और प्राइवेसी दोनों प्रभावित हो रहे हैं. कई बार लोग जरूरी कॉल्स भी मिस कर देते हैं क्योंकि वे अनजान नंबरों से कॉल उठाने से बचते हैं.
इसके अलावा, फ्रॉड कॉल्स के जरिए बैंक डिटेल्स और पर्सनल जानकारी चोरी होने का खतरा भी बढ़ रहा है, जिससे साइबर क्राइम के मामले तेजी से बढ़ सकते हैं.
कैसे बचें स्पैम कॉल से?
हालांकि पूरी तरह से स्पैम कॉल रोकना मुश्किल है, लेकिन कुछ सावधानियां अपनाकर जोखिम कम किया जा सकता है.
जैसे- अनजान नंबर से आई कॉल पर निजी जानकारी साझा न करें, कॉल पहचान ऐप का इस्तेमाल करें और संदिग्ध नंबरों को तुरंत ब्लॉक करें.
सरकार और टेलीकॉम कंपनियां भी इस समस्या को नियंत्रित करने के लिए नए नियम और तकनीक पर काम कर रही हैं.
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