चार्जर नकली निकला तो फोन की बैटरी हो सकती है खराब, जानें पहचानने का आसान तरीका

Fake Smartphone Charger: फोन की बैटरी जल्दी खराब होने के पीछे हमेशा बैटरी ही जिम्मेदार नहीं होती. कई बार चार्जर भी असली दोषी निकलता है. अगर फोन चार्ज करते समय जरूरत से ज्यादा गर्म हो रहा है या चार्जिंग पैटर्न में कुछ गड़बड़ी लग रही हो, तो कुछ आसान संकेत देखकर आप घर बैठे ही इसका पता लगा सकते हैं.

Fake Smartphone Charger: खराब चार्जर आपके स्मार्टफोन की बैटरी को धीरे-धीरे नुकसान पहुंचा सकता है. अक्सर लोगों को इसका पता तब चलता है जब बैटरी जल्दी खत्म होने लगती है या फोन जरूरत से ज्यादा गर्म होने लगता है. आज का यह छोटा सा टिप आपके बहुत काम आ सकता है. इससे आप आसानी से पहचान सकते हैं कि कहीं आपका चार्जर ही तो आपके फोन की बैटरी खराब नहीं कर रहा है. अच्छी बात यह है कि इसके कुछ संकेत ऐसे हैं जिन्हें आप बिना किसी टेक्निकल जानकारी के भी आसानी से नोटिस कर सकते हैं. आइए जानते हैं.

चार्जर को छूकर देखें की वो कहीं गर्म तो नहीं हो रहा

चार्जर सही काम कर रहा है या नहीं, इसका सबसे आसान तरीका काफी सिंपल है. बस उसे छूकर देखिए. फोन चार्ज करते समय चार्जर या केबल का थोड़ा गर्म होना बिल्कुल नॉर्मल बात है. ये चीज फास्ट चार्जिंग के केस में ज्यादा देखने को मिलता है. लेकिन अगर 20-30 मिनट बाद चार्जर, केबल या फोन का पिछला हिस्सा जरूरत से ज्यादा गर्म महसूस होने लगे, तो इसे नजरअंदाज न करें. 

अक्सर ज्यादा गर्मी ही बैटरी की लाइफ जल्दी खराब होने की बड़ी वजह बनती है, क्योंकि लिथियम-आयन बैटरियां हीट को ज्यादा सहन नहीं कर पातीं. साथ ही, सस्ते या खराब क्वालिटी वाले चार्जर कई बार फोन को अस्थिर पावर सप्लाई देते हैं. इससे बैटरी पर एक्स्ट्रा लोड पड़ता है और उसकी हेल्थ तेजी से गिर सकती है.

चार्जिंग बिहेवियर नोटिस करें 

कई बार फोन की बैटरी खराब होने से पहले कुछ छोटे-छोटे संकेत देने लगती है. जैसे अगर आपका फोन बार-बार चार्जिंग पकड़ता और छोड़ता है, बैटरी परसेंटेज अचानक ऊपर-नीचे होने लगता है, या चार्जिंग का आइकन बार-बार झिलमिल करता है. इसका मतलब हर बार ये नहीं होता कि बैटरी खराब हो चुकी है. कई मामलों में असली परेशानी चार्जर या केबल की होती है.

एक और आसान तरीका है इसे जांचने का. किसी दोस्त का भरोसेमंद चार्जर लेकर ट्राई करें या फिर वही ओरिजिनल चार्जर यूज करें जो फोन के साथ मिला था. अगर उससे फोन सही से चार्ज होने लगे, गर्म होना कम हो जाए या बैटरी जल्दी खत्म होना रुक जाए, तो समझ जाइए कि दिक्कत आपके मौजूदा चार्जर में है.

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By Ankit anand

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अंकित आनंद टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. वे स्मार्टफोन, टेलीकॉम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कंज्यूमर टेक और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं.

काम के बारे में

अंकित आनंद एक टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं, जो डिजिटल मीडिया में टेक और ऑटो सेक्टर से जुड़े विषयों पर लगातार लिखते हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. टेक्नोलॉजी सेक्टर में उनकी रुचि स्मार्टफोन लॉन्च, मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम, टेलीकॉम अपडेट्स, इंटरनेट सेवाओं, AI टूल्स, ऐप्स, गैजेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स और कंज्यूमर टेक्नोलॉजी से जुड़े विषयों में है. वहीं ऑटोमोबाइल सेक्टर में वे नई कारों और बाइक्स की लॉन्चिंग, फीचर्स, कीमत, सेफ्टी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्री के बदलते ट्रेंड्स पर रेगुलर लिखते हैं.

उनकी कोशिश रहती है कि हर खबर में सिर्फ फीचर्स, कीमत या लॉन्च की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी बताया जाए कि वह टेक्नोलॉजी आम लोगों के कितने काम की है, उसे इस्तेमाल करने का एक्सपीरियंस कैसा होगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई और करियर

बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई बोर्ड से हुई है. इसके बाद उन्होंने साल 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. पढ़ाई के दौरान ही अंकित की रुचि डिजिटल मीडिया और न्यूज लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर उन्होंने इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया.

प्रभात खबर डिजिटल से पहले अंकित ने Zee News में करीब एक साल तक काम किया. यहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क, कंटेंट रिसर्च, फैक्ट वेरिफिकेशन और न्यूज राइटिंग के अलग-अलग पहलुओं पर काम किया.

विजन

अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नए प्रोडक्ट्स की जानकारी नहीं होतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारी के फैसलों और डिजिटल एक्सपीरियंस पर भी असर डालती हैं.

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