कहीं टेक्नीशियन आपको भी तो नहीं बना रहा बेवकूफ? जानें एसी गैस रिफिल स्कैम का पूरा खेल

AC Gas Refill Scam: गर्मियों में एसी की कूलिंग कम होते ही कई लोग तुरंत गैस भरवा लेते हैं, और यहीं से शुरू होता है खेल. हर बार गैस रिफिल जरूरी नहीं होती. सही जानकारी आपको फर्जी टेक्नीशियन, बेवजह के खर्च और बार-बार होने वाली परेशानी से बचा सकती है. आइए इसके बारे में डिटेल में जानते हैं.

एसी की सही कूलिंग तभी मिलती है जब उसमें रेफ्रिजरेंट यानी गैस सही लेवल में हो. कई लोग मान लेते हैं कि हर सर्विस के दौरान AC में गैस भरवाना जरूरी है. लेकिन सच तो यह है कि ऐसा बिल्कुल नहीं है. बिना जरूरत गैस भरवाने से आपकी सिर्फ जेब ही खाली होती है. नीचे हमने एक गाइड तैयार की है कि ऐसी गैस रिफिलिंग आखिर होती क्या है, कब इसकी सच में जरूरत पड़ती है, और कैसे आप खुद पहचान सकते हैं कि एसी में लीकेज है या कूलिंग कम हो रही है. साथ ही, बाजार में होने वाले फ्रॉड और सर्विस से जुड़े घोटालों के बारे में भी हमने बताया है, ताकि आप अलर्ट रहें.

कब होती है AC की गैस लीक?

एसी की गैस पेट्रोल या डीजल की तरह खर्च नहीं होती. यह एक बंद सिस्टम में लगातार घूमती रहती है. इसलिए, अगर आपका एसी पहले जैसी कूलिंग नहीं दे रहा, तो समझ लीजिए कि कहीं न कहीं गैस लीक हो रही है. इसके अलावा, अगर आपको आउटडोर यूनिट के पास सीटी जैसी आवाज सुनाई दे या कॉपर पाइप पर बर्फ जमती दिखे, तो ये भी गैस लीक होने के संकेत हैं.

अब सवाल है कि गैस लीक होती क्यों है? इसके पीछे कई वजहें हो सकती हैं. जैसे कॉइल में दरार आ जाना, जॉइंट का ढीला होना या समय के साथ जंग लग जाना. कई बार गलत या खराब इंस्टॉलेशन भी धीरे-धीरे गैस लीक का कारण बन जाता है.

टेक्नीशियन कैसे करते हैं स्कैम?

अगर आपका एसी कमरे को ठंडा करने में जरूरत से ज्यादा समय लेने लगा है, तो समझ जाइए कि इसका रेफ्रिजरेंट यानी कूलिंग गैस कम हो गया है. यही वो गैस होती है, जो गर्मी को सोखकर बाहर निकालती है. ऐसे में किसी अच्छे टेक्नीशियन को तुरंत दिखाना चाहिए. लेकिन यहां एक बात का खास ध्यान रखें.

अगर टेक्नीशियन बिना किसी जांच-पड़ताल के सिर्फ गैस भरने की सलाह दे दे और लीकेज के बारे में एक शब्द भी न कहे, तो थोड़ा अलर्ट हो जाइए. क्योंकि एसी में गैस अपने आप खत्म नहीं होती. वह केवल लीकेज होने पर ही बाहर निकलती है. ऐसे में सिर्फ गैस भरवाना प्रॉब्लम का सॉल्यूशन नहीं है. कुछ समय बाद गैस फिर से खत्म हो जाएगी और आपको दोबारा सर्विस के लिए कॉल करना पड़ेगा.

असल समाधान है ऐसी का प्रेशर टेस्ट करवाना. इस टेस्ट से पता चलता है कि लीकेज कहां है. जब लीकेज वाली जगह मिल जाए, तो उसे ठीक से सील कराया जाना चाहिए. उसके बाद ही नई गैस भरवाना सही रहता है. वरना ये ऐसा ही है जैसे छेद वाली बाल्टी में पानी भरते रहना.

AC रिफिल स्कैम से कैसे बचें?

अगर आपका एसी टेक्नीशियन हर साल यही कहता है कि ‘गैस खत्म हो गई है’, लेकिन कभी लीकेज की बात नहीं करता, तो समझ जाइए कि मामला थोड़ा गड़बड़ है. सबसे पहले खुद यह चेक करें कि वाकई एसी में गैस कम है या नहीं. कई बार टेक्नीशियन बिना जरूरत के भी गैस रिफिल कराने की सलाह देते हैं. अगर गैस सच में कम निकले, तो टेक्नीशियन से साफ तौर पर कहें कि वह पहले लीकेज चेक करे. 

लीकेज ढूंढने के लिए आमतौर पर टेक्नीशियन साबुन वाले पानी का इस्तेमाल करते हैं. बिल्कुल वैसे ही जैसे पंचर बनाने वाले टायर में छेद ढूंढते हैं. पाइप या कॉइल पर साबुन का घोल छिड़का जाता है. अगर बुलबुले बनने लगें, तो समझिए लीकेज है. और अगर बुलबुले नहीं बनते, तो सिस्टम बिल्कुल ठीक है. सबसे जरूरी बात, हमेशा ऑथराइज्ड सर्विस सेंटर या भरोसेमंद कंपनी से ही ऐसी की सर्विस करवाएं.

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By Ankit anand

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अंकित आनंद टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. वे स्मार्टफोन, टेलीकॉम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कंज्यूमर टेक और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं.

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अंकित आनंद एक टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं, जो डिजिटल मीडिया में टेक और ऑटो सेक्टर से जुड़े विषयों पर लगातार लिखते हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. टेक्नोलॉजी सेक्टर में उनकी रुचि स्मार्टफोन लॉन्च, मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम, टेलीकॉम अपडेट्स, इंटरनेट सेवाओं, AI टूल्स, ऐप्स, गैजेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स और कंज्यूमर टेक्नोलॉजी से जुड़े विषयों में है. वहीं ऑटोमोबाइल सेक्टर में वे नई कारों और बाइक्स की लॉन्चिंग, फीचर्स, कीमत, सेफ्टी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्री के बदलते ट्रेंड्स पर रेगुलर लिखते हैं.

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बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई बोर्ड से हुई है. इसके बाद उन्होंने साल 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. पढ़ाई के दौरान ही अंकित की रुचि डिजिटल मीडिया और न्यूज लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर उन्होंने इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया.

प्रभात खबर डिजिटल से पहले अंकित ने Zee News में करीब एक साल तक काम किया. यहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क, कंटेंट रिसर्च, फैक्ट वेरिफिकेशन और न्यूज राइटिंग के अलग-अलग पहलुओं पर काम किया.

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