बेंगलुरु रेलवे स्टेशन पर उतरने के बाद एक यात्री के सामने कुछ ऐसा हुआ, जिसने ऑनलाइन कैब बुकिंग और लोकल ऑटो किराए के बीच बड़ा फर्क दिखा दिया. स्टेशन के बाहर ऑटो चालक ने छोटी दूरी के लिए 300 रुपये मांगे, लेकिन यात्री ने तुरंत बुकिंग करने के बजाय एक राइड कंपैरिजन टूल पर किराया चेक किया. वहां उसी रूट के लिए उबर गो की राइड 179 रुपये में दिखाई गई. यानी स्क्रीन पर दिख रहे किराए के हिसाब से यात्री करीब 121 रुपये बचा सकता था. इस अनुभव को लेकर सोशल मीडिया पर पोस्ट वायरल हुई तो लोगों के बीच ऑनलाइन कैब के किराए, ड्राइवर कैंसिलेशन और राइड कंपैरिजन ऐप्स को लेकर अलग-अलग दावे सामने आने लगे.
300 रुपये का ऑटो और 179 रुपये की कैब ने खींचा ध्यान
शुभम शर्मा नाम के एक यूजर ने एक्स पर अपना अनुभव साझा किया. उनके मुताबिक, बेंगलुरु रेलवे स्टेशन पर पहुंचने के बाद ऑटो चालक ने 300 रुपये का किराया बताया. इसके बाद उन्होंने तुरंत ऑटो लेने के बजाय बायहटके के कंपेयर राइड्स फीचर पर अलग-अलग राइड विकल्पों का किराया देखा.
कंपैरिजन में उसी रूट के लिए उबर गो का किराया 179 रुपये दिखाई दिया. किराए में करीब 121 रुपये का अंतर देखकर यात्री ने ऑनलाइन कैब विकल्प चुन लिया. इस तरह एक ही यात्रा के लिए अलग-अलग माध्यमों में दिखने वाले किराए का फर्क सोशल मीडिया चर्चा का विषय बन गया.
हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि ऐप पर दिखने वाला किराया किसी खास समय की स्थिति को दर्शाता है. राइड की डिमांड, ट्रैफिक, पिकअप लोकेशन और सर्ज प्राइसिंग के कारण किराया कुछ ही मिनटों में बदल सकता है.
वायरल पोस्ट के बाद शुरू हुई अलग तरह की बहस
पोस्ट वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स की प्रतिक्रियाएं भी सामने आईं. कुछ लोगों ने इसे राइड कंपैरिजन टूल के फायदे से जोड़कर देखा. वहीं, कुछ यूजर्स ने दावा किया कि ऐसे पोस्ट के जरिए ऐप का प्रमोशन किया जा सकता है और एफिलिएट लिंक का इस्तेमाल भी संभव है.
एक अन्य यूजर ने वायरल अनुभव से अलग दावा किया. उसके मुताबिक, राइड बुक करने के बाद करीब 30 मिनट तक उबर ड्राइवर्स कैंसिलेशन करते रहे. आखिरकार यात्री को 300 रुपये देकर ऑटो से जाना पड़ा. हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है.
यही वजह है कि वायरल सोशल मीडिया पोस्ट को पूरी तरह जमीनी स्थिति मानने के बजाय इसे एक यूजर एक्सपीरियंस के तौर पर देखना ज्यादा उचित है.
पोस्ट यहां देखें
एक ही रूट पर अलग-अलग किराया क्यों दिखता है
कैब और ऑटो ऐप्स में किराया कई चीजों के आधार पर तय होता है. एक ही रूट पर उबर, ओला, रैपिडो या दूसरे प्लेटफॉर्म अलग-अलग किराया दिखा सकते हैं. बुकिंग के समय डिमांड और उपलब्ध ड्राइवर्स की संख्या भी कीमत को प्रभावित करती है.
स्टेशन, एयरपोर्ट और बड़े ट्रांजिट प्वाइंट्स पर यह अंतर ज्यादा नजर आ सकता है. खासकर बारिश, ऑफिस टाइम या किसी बड़े इवेंट के दौरान राइड की मांग बढ़ने पर कुछ प्लेटफॉर्म पर सर्ज प्राइसिंग लागू हो सकती है. ऐसे में कुछ मिनटों के अंतर से भी किराया बदल सकता है.
राइड कंपैरिजन ऐप्स कैसे करते हैं काम
बायहटके का कंपेयर राइड्स फीचर अलग-अलग राइड प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध विकल्पों की तुलना एक जगह दिखाने के लिए बनाया गया है. इसका फायदा यह है कि यूजर को हर ऐप खोलकर अलग-अलग किराया चेक नहीं करना पड़ता.
अगर किसी समय एक प्लेटफॉर्म पर किराया ज्यादा है और दूसरे पर कम, तो यूजर उपलब्ध विकल्पों को देखकर फैसला कर सकता है. इससे खासकर उन यात्रियों को फायदा हो सकता है जो स्टेशन या एयरपोर्ट जैसी जगहों पर जल्दी में होते हैं और अलग-अलग ऐप्स के बीच किराया जांचने में समय नहीं गंवाना चाहते.
हालांकि, कंपैरिजन टूल में दिखाई देने वाला किराया अंतिम कीमत की गारंटी नहीं है. वास्तविक बुकिंग के समय किराया बदल सकता है. इसी तरह कैब की उपलब्धता और ड्राइवर की ओर से राइड स्वीकार किए जाने की स्थिति भी अलग हो सकती है.
स्टेशन पर कैब बुक करते समय इन बातों का रखें ध्यान
रेलवे स्टेशन से ऑनलाइन कैब बुक करते समय पिकअप लोकेशन सही चुनना काफी जरूरी है. कई स्टेशनों पर सामान्य सड़क के बजाय अलग कैब पिकअप जोन निर्धारित होता है. गलत लोकेशन चुनने पर ड्राइवर को यात्री तक पहुंचने में परेशानी हो सकती है और कैंसिलेशन की स्थिति बन सकती है.
यात्रियों को बुकिंग से पहले एक से ज्यादा ऐप पर किराया देखने की आदत भी डालनी चाहिए. अगर किसी एक प्लेटफॉर्म पर सर्ज बहुत ज्यादा है, तो दूसरे विकल्प में कम किराया मिल सकता है. लेकिन सिर्फ सबसे कम किराया देखकर बुकिंग करने के बजाय कैब की उपलब्धता, अनुमानित पिकअप टाइम और पिकअप लोकेशन भी देखना जरूरी है.
FAQs.
Q1. क्या राइड कंपैरिजन ऐप से सीधे कैब बुक की जा सकती है? ▼
अधिकांश कंपैरिजन टूल अलग-अलग राइड प्लेटफॉर्म के किराए और उपलब्ध विकल्पों की तुलना दिखाते हैं. इसके बाद यूजर चुने गए विकल्प से संबंधित कैब ऐप पर जाकर बुकिंग पूरी कर सकता है.
Q2. क्या स्टेशन पर ऑनलाइन कैब हमेशा ऑटो से सस्ती होती है? ▼
नहीं. इसका कोई तय नियम नहीं है. किराया डिमांड, समय, दूरी, ट्रैफिक और सर्ज प्राइसिंग के आधार पर बदलता है. कुछ परिस्थितियों में ऑनलाइन कैब सस्ती हो सकती है, जबकि दूसरी स्थिति में ऑटो या कोई दूसरा विकल्प बेहतर पड़ सकता है.
Q3. कैब बुक करने के बाद ड्राइवर राइड कैंसिल करे तो क्या करें? ▼
ऐसी स्थिति में पहले ऐप पर उपलब्ध दूसरे ड्राइवर या राइड विकल्प को चेक करें. पिकअप लोकेशन को आधिकारिक कैब पिकअप प्वाइंट पर सेट करने से भी परेशानी कम हो सकती है. जरूरत पड़ने पर किसी दूसरे राइड प्लेटफॉर्म पर किराया और उपलब्धता की तुलना की जा सकती है.
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