हाल ही में Air Canada Express Flight AC8646 न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर एक फायर ट्रक से टकरा गई, जिसमें कई यात्रियों को चोटें आईं. ऐसे हादसे हमें याद दिलाते हैं कि आधुनिक एविएशन सिर्फ पायलट की स्किल पर नहीं, बल्कि उन टेक्नोलॉजी सिस्टम्स पर भी निर्भर करता है जो हर उड़ान को सुरक्षित बनाने के लिए काम करते हैं. आइए जानते हैं वो तकनीकें जो ऐसे हादसों को रोकने और जान बचाने में मदद करती हैं.
ATC Radar और ADS-B सिस्टम
एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) रडार लगातार प्लेन की लोकेशन और स्पीड ट्रैक करता है और पायलट को सुरक्षित लैंडिंग के लिए गाइड करता है. वहीं ADS-B सिस्टम प्लेन की लोकेशन खुद कंट्रोल रूम तक भेजता है, जिससे एयर ट्रैफिक कंट्रोलर को हमेशा पता रहता है कि विमान कहां पर है.
रनवे लाइट्स और Surface Radar
एयरपोर्ट पर लगी रनवे लाइट्स पायलट को दिशा और चेतावनी देती हैं. रेड लाइट का मतलब खतरा होता है और पायलट तुरंत अलर्ट हो जाता है. इसके अलावा Surface Radar ग्राउंड पर मौजूद प्लेन और गाड़ियों को ट्रैक करता है, खासकर फॉग या कम विजिबिलिटी में, जिससे टकराव रोका जा सके.
Emergency टीमें और EMAS सिस्टम
हर एयरपोर्ट पर स्पेशल फायर और रेस्क्यू टीमें मौजूद रहती हैं, जो तुरंत एक्शन लेकर आग और खतरे को कंट्रोल करती हैं. वहीं, रनवे के आखिर में लगा EMAS सिस्टम (Engineered Materials Arresting System) नरम सतह से बने बैरियर की तरह काम करता है. अगर कोई प्लेन कंट्रोल से बाहर हो जाए तो यह उसे रोककर बड़े हादसे से बचा लेता है.
No-Fly Zones और गवर्नेंस
कुछ जगहों पर No-Fly Zones बनाये जाते हैं ताकि शहरों और संवेदनशील इलाकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके. यह नियम एयर ट्रैफिक को सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभाते हैं.
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