AI सर्च ने बिगाड़ा इंटरनेट का खेल, जानिए सर्च करना क्यों हो रहा है मुश्किल?

आरएमआईटी विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के अनुसार, एआई टूल्स द्वारा बिना क्रेडिट दिए डेटा खंगालने से इंटरनेट का आर्थिक ढांचा टूट रहा है. वेबसाइट्स द्वारा एआई को ब्लॉक करने से गलत और एआई-जनरेटेड जानकारी का खतरा बढ़ गया है.

पिछले 30 सालों से इंटरनेट जिस एक अघोषित नियम पर काम कर रहा था, अब कृत्रिम मेधा यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस दौर में वह ढांचा पूरी तरह चरमराने लगा है. ऑस्ट्रेलिया के आरएमआईटी विश्वविद्यालय (RMIT University) के शोधकर्ताओं डाना मैके (Dana McKay) और डेमियानो स्पिना (Damiano Spina) द्वारा 'द कन्वरसेशन' (The Conversation) में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, जब हम इंटरनेट पर कुछ खोजते हैं, तो हमें सही और भरोसेमंद जानकारी मिलने की संभावना पहले से काफी कम हो सकती है.

सर्च इंजन और वेबसाइट्स का पुराना सामाजिक अनुबंध

वर्ल्ड वाइड वेब की शुरुआत से ही एक अनकही सहमति बनी हुई थी. गूगल जैसे पारंपरिक सर्च इंजन वेबसाइट्स की सामग्री को मुफ्त में क्रॉल (खंगालना) करते थे और उन्हें इंडेक्स करके खोज परिणामों में दिखाते थे. इसके बदले में, जब यूजर्स किसी लिंक पर क्लिक करते थे, तो मूल वेबसाइट को ट्रैफिक और विज्ञापन से आय मिलती थी. अगर कोई प्रकाशक नहीं चाहता था कि उसकी सामग्री खंगाली जाए, तो वह 'robots.txt' फाइल के जरिए इसे रोक सकता था.

एआई टूल ने कैसे बदला पूरा खेल?

अब चैटजीपीटी (ChatGPT) और गूगल के 'एआई ओवरव्यू' (AI Overview) जैसे आधुनिक एआई टूल यूजर्स को सीधे जवाब दे रहे हैं. इससे यूजर्स का मूल वेबसाइट पर जाना बंद या बेहद कम हो गया है.

  • वेबसाइटों का आर्थिक नुकसान: एआई बॉट्स वेबसाइटों की सामग्री को खंगालने में सर्वर पर भारी दबाव डालते हैं जिससे लागत बढ़ती है, लेकिन बदले में वेबसाइटों को ट्रैफिक या विज्ञापन आय नहीं मिल रही.
  • वेब ट्रैफिक पर एआई बॉट्स का कब्जा: इंटरनेट इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी क्लाउडफ्लेयर (Cloudflare) के अनुसार, आज वेब के कुल ट्रैफिक में आधे से ज्यादा हिस्सा एआई बॉट्स का है.

'गूगल जीरो' की आहट और 'मॉडल कोलैप्स' का खतरा

इंटरनेट विशेषज्ञ अब उस स्थिति की ओर इशारा कर रहे हैं जिसे 'गूगल जीरो' (Google Zero) कहा जा रहा है- यानी वह समय जब गूगल से वेबसाइट्स पर मिलने वाला ट्रैफिक शून्य के करीब पहुंच जाएगा. विकिपीडिया पर हुए एक हालिया अध्ययन से भी यह पुष्टि हुई है कि एआई ओवरव्यू के आने के बाद यूजर्स का जुड़ाव और क्लिक तेजी से घटे हैं.

इस नुकसान से बचने के लिए क्लाउडफ्लेयर नेटवर्क पर मौजूद करीब 30% शीर्ष वेबसाइट्स एआई क्रॉलर्स को ब्लॉक कर रही हैं. इसका सबसे बड़ा दुष्परिणाम यह हो रहा है:

  1. गुणवत्ताहीन डेटा पर निर्भरता: अच्छी और प्रामाणिक वेबसाइट्स एआई को रोक रही हैं, जबकि फर्जी या कम गुणवत्ता वाली वेबसाइट्स एआई को नहीं रोकतीं.
  2. मॉडल कोलैप्स (Model Collapse): जब एआई मॉडल को ट्रेंड करने के लिए एआई द्वारा ही तैयार की गई घटिया सामग्री का इस्तेमाल होगा, तो उनके जवाबों का स्तर और भी गिर जाएगा. एक अध्ययन में पाया गया है कि एआई सर्च टूल द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले 6 में से 1 स्रोत खुद एआई द्वारा ही लिखा गया होता है.

यूजर्स के लिए इसका क्या मतलब है?

यदि आप सटीक और प्रामाणिक जानकारी चाहते हैं, तो केवल एआई के संक्षिप्त उत्तरों पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है. शोधकर्ताओं की सलाह है कि जानकारी की पुष्टि करने के लिए नीचे दिए गए मूल वेबसाइट्स के लिंक्स पर क्लिक करके मुख्य स्रोत पर जाएं. इसके अलावा, ऐसे स्वतंत्र सर्च इंजन का इस्तेमाल किया जा सकता है जो एआई आधारित क्रॉलिंग पर कम निर्भर हैं.

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एआई क्रॉलर्स से वेबसाइट मालिकों को क्या आर्थिक नुकसान हो रहा है?

एआई क्रॉलर्स वेबसाइट्स की सामग्री को बहुत तेजी से खंगालते हैं, जिससे सर्वर कॉस्ट बढ़ती है. चूंकि यूजर्स एआई के संक्षिप्त जवाब पढ़कर ही संतुष्ट हो जाते हैं, इसलिए मूल वेबसाइट को ट्रैफिक और विज्ञापन से होने वाली आय नहीं मिल पाती.

2. एआई सर्च में 'मॉडल कोलैप्स' (Model Collapse) क्या होता है?

जब एआई मॉडल भविष्य में खुद को प्रशिक्षित (Train) करने के लिए इंसानी लेखकों की जगह एआई द्वारा ही तैयार की गई सामग्री का उपयोग करने लगते हैं, तो जानकारी की गुणवत्ता और सटीकता तेजी से गिरने लगती है, इसे 'मॉडल कोलैप्स' कहते हैं.

3. 'गूगल जीरो' (Google Zero) स्थिति क्या है?

गूगल जीरो उस संभावित स्थिति को कहा जाता है जब सर्च इंजन के जरिए मूल वेबसाइट्स तक पहुंचने वाला इंसानी वेब ट्रैफिक पूरी तरह या काफी हद तक खत्म हो जाएगा.

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By राजीव कुमार

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