Ahmedabad Plane Crash: फ्लाइट में कौन सी सीट होती है सबसे सुरक्षित? जानें कहां बैठने से बच सकती है जान

Ahmedabad Plane Crash: अहमदाबाद में हुई प्‍लेन क्रैश की घटना के बाद से सोशल मीडिया पर लोग इस तरह की घटनाओं को लेकर अधिक जानकारी तलाशने लगे हैं. इसी दौरान एक सवाल बार-बार लोगों के मन में आ रहा है कि प्‍लेन हादसे की स्थिति में किस सीट पर बैठना सबसे सुरक्षित माना जाता है? आज हम इसी सवाल का जवाब आपको देने जा रहे हैं.

Ahmedabad Plane Crash: गुरुवार 12 जून को अहमदाबाद से लंदन जा रही एयर इंडिया की एक फ्लाइट हादसे का शिकार हो गई. विमान में कुल 242 यात्री सवार थे. यह दुर्घटना इतनी भयानक थी कि इसने न केवल देश को बल्कि पूरी दुनिया को हैरान कर दिया. हादसे की गंभीरता को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि किसी का बच पाना बेहद मुश्किल रहा होगा. हालांकि इसकी असली तस्वीर समय के साथ ही सामने आएगी. इस बीच, कई लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या प्लेन क्रैश के समय कोई ऐसी खास सीट होती है, जिस पर बैठने से जान बचने की संभावना अधिक होती है?

सीट बुक करते वक्त इन बातों का रखें ध्यान  

फ्लाइट की टिकट बुक करते समय अक्सर हम यह ध्यान में रखते है कि विंडो सीट हो, यात्रा के दौरान आरामदायक अनुभव मिले और चढ़ने-उतरने में सुविधा हो. लेकिन एक अध्ययन के अनुसार, विमान की कुछ सीटें अन्य सीट���ं की तुलना में कहीं अधिक सुरक्षित मानी जाती हैं और हैरानी की बात यह है कि ये सीटें अक्सर कम कीमत पर भी उपलब्ध होती हैं.

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आंकड़े क्या कहते हैं? 

अमेरिका की नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड (NTSB) ने 1971 से अब तक हुई 20 प्रमुख विमान दुर्घटनाओं का विश्लेषण किया. इस शोध में देखा गया कि किन यात्रियों की जान बची और किन्हें जान गंवानी पड़ी. नतीजों में सामने आया कि जो यात्री विमान के पिछले हिस्से में बैठे थे, उनकी जीवित बचने की संभावना 69% तक थी. इसके मुकाबले, विमान के अगली ओर बैठे यात्रियों की बचने की संभावना केवल 49% पाई गई. वहीं, विमान के पंखों के पास वाली सीटों पर बैठे यात्रियों के लिए यह संभावना 59% थी.

Ahmedabad Plane Crash: कौन सी सीट है सबसे सुरक्षित 

साल 2015 में टाइम मैगजीन द्वारा किए गए एक विश्लेषण में एफएए (FAA) डेटा के आधार पर खुलासा हुआ कि विमान के पिछले हिस्से में बैठने वाले यात्रियों की मौत की संभावना सबसे कम होती है. रिपोर्ट के मुताबिक, जब विमान की लैंडिंग में गड़बड़ी होती है या कोई हल्का टकराव होता है, तो सबसे ज्यादा असर उसके अगले हिस्से पर पड़ता है. ऐसे में पीछे की सीटें तुलनात्मक रूप से ज्यादा सुरक्षित मानी जाती हैं. एविएशन सेफ्टी विशेषज्ञ डैनियल क्वासी अडजेकम ने भी इस बात की पुष्टि की है और बताया कि हादसों के दौरान विमान का अगला हिस्सा संरचनात्मक रूप से ज्यादा टूट-फूट का शिकार होता है.

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By Ankit anand

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अंकित आनंद टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं. वर्तमान में प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. वे स्मार्टफोन, टेलीकॉम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), कंज्यूमर टेक और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों को कवर करते हैं.

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अंकित आनंद एक टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल जर्नलिस्ट हैं, जो डिजिटल मीडिया में टेक और ऑटो सेक्टर से जुड़े विषयों पर लगातार लिखते हैं. वर्तमान में वे प्रभात खबर डिजिटल में कंटेंट राइटर के रूप में काम कर रहे हैं. टेक्नोलॉजी सेक्टर में उनकी रुचि स्मार्टफोन लॉन्च, मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम, टेलीकॉम अपडेट्स, इंटरनेट सेवाओं, AI टूल्स, ऐप्स, गैजेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स और कंज्यूमर टेक्नोलॉजी से जुड़े विषयों में है. वहीं ऑटोमोबाइल सेक्टर में वे नई कारों और बाइक्स की लॉन्चिंग, फीचर्स, कीमत, सेफ्टी, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (EV), फ्लेक्स-फ्यूल टेक्नोलॉजी और ऑटो इंडस्ट्री के बदलते ट्रेंड्स पर रेगुलर लिखते हैं.

उनकी कोशिश रहती है कि हर खबर में सिर्फ फीचर्स, कीमत या लॉन्च की जानकारी ही न हो, बल्कि यह भी बताया जाए कि वह टेक्नोलॉजी आम लोगों के कितने काम की है, उसे इस्तेमाल करने का एक्सपीरियंस कैसा होगा और उसे खरीदना सही रहेगा या नहीं.

पढ़ाई और करियर

बिहार में जन्मे अंकित आनंद की शुरुआती शिक्षा सीबीएसई बोर्ड से हुई है. इसके बाद उन्होंने साल 2024 में गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (GGSIPU) के कस्तूरी राम कॉलेज ऑफ हायर एजुकेशन से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में ग्रेजुएशन डिग्री हासिल की. पढ़ाई के दौरान ही अंकित की रुचि डिजिटल मीडिया और न्यूज लिखने में बढ़ने लगी. इसी दौरान उन्होंने टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरों पर काम करना शुरू किया और आगे चलकर उन्होंने इन्हीं विषयों को अपने काम का हिस्सा बना लिया.

प्रभात खबर डिजिटल से पहले अंकित ने Zee News में करीब एक साल तक काम किया. यहां उन्होंने टीवी न्यूज प्रोडक्शन, आउटपुट डेस्क, कंटेंट रिसर्च, फैक्ट वेरिफिकेशन और न्यूज राइटिंग के अलग-अलग पहलुओं पर काम किया.

विजन

अंकित का मानना है कि टेक्नोलॉजी और ऑटोमोबाइल से जुड़ी खबरें केवल नए प्रोडक्ट्स की जानकारी नहीं होतीं, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी, खरीदारी के फैसलों और डिजिटल एक्सपीरियंस पर भी असर डालती हैं.

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