एसी रेंट पर लेने का प्लान है? पहले जान लीजिए क्या-क्या चेक करना जरूरी है

AC Rent Guide: अगर आपको भी गर्मी से राहत चाहिए, लेकिन नया AC नहीं खरीदना चाह रहे, तो रेंट पर लेना बजट-फ्रेंडली ऑप्शन है. लेकिन AC रेंट पर लेने में जल्दबाजी करना सही नहीं है. सही वेंडर चुनें, AC की कंडीशन जांचें, कमरे के हिसाब से कैपेसिटी चुनें और मेंटेनेंस, डिपॉजिट व इंस्टॉलेशन की शर्तें पहले ही समझ लें.

देश के कई हिस्सों में टेम्परेचर 40 डिग्री के करीब पहुंच चुका है. ऐसे में घर का कमरा जब तंदूर जैसा लगने लगे, तो AC लेना मजबूरी बन जाता है. हालांकि, हर बार नया AC खरीदना समझदारी नहीं होती. एक अच्छा AC 30,000 से 50,000 रुपये या उससे भी ज्यादा का पड़ सकता है. लेकिन अगर आप किराए के घर में रहते हैं, जल्द ही शहर बदलने वाले हैं या लंबे समय तक एक ही जगह रहने का प्लान नहीं है, तो खरीदने से बेहतर ऑप्शन किराए (रेंट) पर लेना हो सकता है.

लेकिन यहां एक बात समझना जरूरी है. गलत AC चुनने पर बिजली का बिल बढ़ सकता है, और अगर बीच गर्मी में मशीन खराब हो जाए, तो परेशानी अलग है. इसलिए, किसी भी रेंटल एग्रीमेंट पर साइन करने से पहले कुछ जरूरी बातों को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है. आइए जानते हैं कौन सी हैं वो बातें.

गलत वेंडर चुनने से बचें

किराए पर कुछ भी लेने से पहले ज्यादातर लोग सबसे पहले उसका मासिक किराया देखते हैं. लेकिन सिर्फ कुछ रुपये बचाने के चक्कर में गलत वेंडर चुनना भारी पड़ सकता है. असली गेम कीमत का नहीं, भरोसे का होता है. एक भरोसेमंद वेंडर आपको अच्छी तरह सर्विस की हुई यूनिट देता है, जरूरत पड़ने पर तुरंत मदद करता है और सिक्योरिटी डिपॉजिट लेने के बाद गायब नहीं होता. इसलिए फैसला करने से पहले अपने पड़ोसियों या सोसाइटी के लोगों से जरूर पूछें कि उनका एक्सपीरियंस कैसा रहा है.

AC यूनिट को अच्छे से चेक करें

AC घर लाने से पहले उसे अच्छी तरह चेक करना बेहद जरूरी है. पेमेंट करने से पहले वेंडर से कहें कि वह AC आपके सामने चलाकर दिखाए. रिमोट सही से काम कर रहा है या नहीं, AC कितनी जल्दी ठंडा करता है और चलने के दौरान कोई अजीब आवाज तो नहीं आ रही, ये जरूर चेक करें. यह भी पूछें कि क्या AC की गैस हाल ही में चेक की गई है? अगर रेफ्रिजरेंट कम होगा, तो AC हवा तो देगा लेकिन कमरे को सही से ठंडा नहीं कर पाएगा. इससे बिजली का बिल भी बढ़ सकता है.

रूम साइज के हिसाब से ही AC की कैपेसिटी चुनें

AC रेंट पर लेते समय सबसे जरूरी बात है कि उसकी कैपेसिटी आपके कमरे के हिसाब से हो. अगर AC कमरे के मुकाबले कम कैपेसिटी का हुआ, तो वह लगातार चलता रहेगा, फिर भी सही कूलिंग नहीं दे पाएगा. वहीं, जरूरत से ज्यादा बड़ा AC बार-बार ऑन-ऑफ होगा, जिससे बिजली की खपत बढ़ेगी.

वेंडर से मेंटेनेंस पॉलिसी अच्छे से क्लियर कर लें

AC किराए पर लेने से पहले एक बात अच्छी तरह साफ कर लें कि मेंटेनेंस की जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी? यही वो हिस्सा है, जहां बाद में सबसे ज्यादा परेशानी होती है. इसलिए कॉन्ट्रैक्ट साइन करने से पहले पूछ लें कि रेगुलर सर्विस, पेट्रोल भरवाना, किसी खराबी की मरम्मत या पार्ट्स बदलने का खर्च कौन उठाएगा. कई वेंडर्स ये सारी सुविधाएं मासिक किराए में ही शामिल कर देते हैं, जबकि कुछ सिर्फ बेसिक मेंटेनेंस देते हैं और बाकी चीजों के लिए अलग से चार्ज लेते हैं.

सिक्योरिटी डिपॉजिट और इंस्टॉलेशन का पता कर लें

फाइनल करने से पहले सिक्योरिटी डिपॉजिट और इंस्टॉलेशन की पूरी जानकारी जरूर लें. ज्यादातर रेंटल कंपनियां रिफंडेबल सिक्योरिटी डिपॉजिट लेती हैं, लेकिन जो रकम पहले बताई जाए, उसे अंतिम मानने की गलती न करें. कई बार बातचीत करने पर इसे कम भी कराया जा सकता है. इसके साथ ही, इंस्टॉलेशन पैकेज में शामिल है या नहीं, यह पहले ही साफ कर लें. आमतौर पर कंपनियां इंस्टॉलेशन की सुविधा देती हैं, लेकिन कन्फर्म करना हमेशा बेहतर रहता है.

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लेखक के बारे में

By Ankit Anand

अंकित आनंद, प्रभात खबर डिजिटल में जूनियर कंटेंट राइटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वह पिछले डेढ़ साल से अधिक समय से पत्रकारिता के क्षेत्र में हैं. टेक जर्नलिस्ट के तौर पर अंकित स्मार्टफोन लॉन्च, टेलीकॉम अपडेट्स, टिप्स एंड ट्रिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) न्यूज, गैजेट्स रिव्यू और कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स से जुड़ी खबरें कवर करते हैं. इसके अलावा, वह ऑटोमोबाइल सेक्टर से जुड़ी अहम खबरों पर भी लिखते हैं. अंकित ने GGSIP यूनिवर्सिटी से जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन में ग्रेजुएशन की है.

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