आधार पहचान पर एआई स्कैमर्स का हमला, सोशल मीडिया फोटो से बने डीपफेक

अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने एआई डीपफेक वीडियो से आधार पहचान हाइजैक करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया. मोबाइल नंबर बदलकर अपराधियों ने बैंकिंग सेवाओं तक पहुंच बनाई और लाखों रुपये के लोन ठगे.

भारत में डिजिटल पहचान की सुरक्षा पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है. अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया है, जो एआई-जेनरेटेड डीपफेक वीडियो का इस्तेमाल कर आधार से जुड़ी पहचानें हाइजैक कर रहा था. इस हाई-टेक धोखाधड़ी ने न केवल आम लोगों बल्कि अनुभवी साइबर विशेषज्ञों को भी चौंका दिया है.

कैसे हुआ आधार डेटा का दुरुपयोग

पुलिस के अनुसार, गिरोह ने पहले ऑनलाइन प्लैटफॉर्म्स से आर्थिक रूप से सक्षम व्यक्तियों की पहचान की. इसके बाद Telegram बॉट्स और डिजिटल टूल्स के जरिए आधार से जुड़ी जानकारी और सोशल मीडिया से तस्वीरें जुटाईं. इन्हीं तस्वीरों को एआई सॉफ्टवेयर से ब्लिंकिंग डीपफेक वीडियो में बदला गया, जो असली इंसानी भाव-भंगिमा की तरह दिखते थे. इन वीडियो का इस्तेमाल कर अपराधियों ने आधार वेरिफिकेशन सिस्टम को धोखा दिया और पीड़ितों के मोबाइल नंबर बदल दिए.

मोबाइल नंबर बदलकर मिली पूरी डिजिटल पहुंच

जैसे ही आधार से जुड़ा मोबाइल नंबर बदला गया, अपराधियों को बैंकिंग अलर्ट, डिजिटल लॉकर और अन्य सेवाओं तक पहुंच मिल गई. इसके बाद उन्होंने नए सिम कार्ड और बैंक अकाउंट खोलकर ₹25,000 से ₹50,000 तक के त्वरित पर्सनल लोन हासिल किए. पैसे को कई खातों में घुमाकर ट्रैकिंग से बचने की कोशिश की गई.

कैसे खुला राज

यह धोखाधड़ी तब सामने आई जब अहमदाबाद के एक बिजनेसमैन को अपने आधार-लिंक्ड ट्रांजैक्शंस के लिए OTP मिलना बंद हो गया. जांच में पता चला कि उनका मोबाइल नंबर और बायोमेट्रिक डेटा बिना किसी OTP वेरिफिकेशन के बदल दिया गया था और उनके नाम पर लोन भी ले लिया गया था.

जांच और गिरफ्तारियां

अब तक सात लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि असम का मुख्य आरोपी ओली उल्लाह फरार है. पुलिस ने बताया कि गिरोह ने Common Service Centres (CSCs) का इस्तेमाल कर आधार मोबाइल नंबर में बदलाव किया. तकनीकी हेड रब्बुल हुसैन को भी पकड़ा गया है, जो एआई रिसोर्सेज और आइडेंटिटी थेफ्ट ऑपरेशंस संभाल रहा था.

डिजिटल पहचान पर खतरे की घंटी

यह केस भारत की डिजिटल पहचान प्रणाली में मौजूद गंभीर कमजोरियों को उजागर करता है. अधिकारियों ने UIDAI को इन खामियों के बारे में सतर्क किया है. विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया पर साझा की गई तस्वीरें अब साइबर अपराधियों के लिए सबसे आसान हथियार बन चुकी हैं. ऐसे में डिजिटल सुरक्षा को और मजबूत करना बेहद जरूरी हो गया है.

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By Rajeev Kumar

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