सूचना तकनीक के इस जमाने में हर चीज आज हमारी ऊंगलियों की एक क्लिक पर मौजूद हैं, फिर भी हमें इंटरनेट यूज करते समय बेहद सावधान रहने की जरूरत है, वरना इंटरनेट हैकर्स हमारे देखते-ही-देखते हमारा सारा डेटा उड़ा सकते हैं. इस के लिए वे फिशिंग तकनीक का सहारा लेते हैं. हमें फर्जी इमेल्स के माध्यम से नकली बेवसाइट्स के लिंक भेजते हैं. अब मुश्किल है कि ऐसे इमेल्स को पहचानें कैसे?
– ऐसे इमेल में अधिकतर लुभावने ऑफर दिये जाते हैं.
– ऐसे मेल्स में यूजर्स को एक फॉर्म भरने के लिए कहा जाता है, जिसमें उन्हें अपनी निजी जानकारियां देनी होती हैं.
– कई बार किसी प्रतिष्ठित सरकारी या निजी संस्थान का लोगो यूज किया जाता है, जिसे असली समझ कर यूजर मांगी गयी जानकारियां शेयर करने की भूल कर बैठते हैं.
– ज्यादातर फर्जी इमेल्स में पंक्चुएशन मार्क्स का यूज होता है. ढ़ेर सारे स्पेलिंग्स मिस्टेक्स या अन्य दूसरी गलतियां होती हैं. लोगो कुछ अजीब-सा या कटा-फटा सा दिखता है. ऐसे इमेल का एड्रेस देख कर ही आपको उनके फर्जी होने का पता चल जायेगा. चाहें तो इमेल भेजनेवाले के नाम पर टैप या क्लिक करके आप उसकी पूरी जानकारी पढ़ सकती हैं. अगर इमेल में दिये गये लिंक्स पर माउस ले जाकर छोड़ दें, क्लिक ना करें, उनकी जानकारी आपको दिख जायेगी.
– ध्यान रखें कि बैंक या अन्य सरकारी संस्थान किसी भी तरह की कानूनी या व्यवसायिक जानकारी आपको डाक से भेजते हैं या फिर इसके लिए आपको उनके निजी साइट्स पर जाना पड़ता है. ऐसा हो तो तुरंत उन संस्थान को सूचित करें.
