गलसी विधानसभा में तृणमूल, भाजपा व फारवर्ड ब्लॉक के बीच है कड़ी टक्कर

बंगाल विधानसभा में फॉरवर्ड ब्लॉक वर्ष 1977 से ही यहां की जनता का प्रतिनिधित्व करता रहा है. देश में आपातकाल लागू होने के बाद यहां केवल वर्ष 2016 में ही किसी गैर-वामपंथी दल को चुनाव में सफलता मिली थी.

By Prabhat Khabar Digital Desk | April 20, 2021 8:40 PM

पानागढ़ (मुकेश तिवारी) : पूर्वी बर्दवान (Purba Bardhaman) जिला में अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित 274 नंबर गलसी (Galsi (SC) Assembly Seat) विधानसभा क्षेत्र में इस बार तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच कड़ी टक्कर की बात सुनी जा रही है. फॉरवर्ड ब्लॉक भी इस बार पूरी ताकत के साथ चुनाव को त्रिकोणीय मुकाबला बनाने में जुटा हुआ है.

राज्य विधानसभा में फॉरवर्ड ब्लॉक वर्ष 1977 से ही यहां की जनता का प्रतिनिधित्व करता रहा है. देश में आपातकाल लागू होने के बाद यहां केवल वर्ष 2016 में ही किसी गैर-वामपंथी दल को चुनाव में सफलता मिली थी. इस बार यहां छठे चरण में 22 अप्रैल को मतदान होना है.

जहां तक 2021 के विधानसभा चुनाव का मामला है, तो यहां के मतदाताओं की बड़ी आबादी पर दशकों से पकड़ रखने वाले फॉरवर्ड ब्लॉक की पिछले चुनाव में हार के बावजूद लोगों में उसकी विजयी छवि अब भी बनी हुई है. वाम मोर्चा की इस सहयोगी पार्टी को भले ही पिछली बार इस सीट पर दूसरे स्थान पर रह कर संतोष करना पड़ा हो, उसकी जड़ें अब भी यहां मजबूत बतायी जा रही हैं.

Also Read: बंगाल चुनाव 2021 : कर्ज में डूबे हैं छठे चरण का चुनाव लड़ रहे 306 में 113 उम्मीदवार

पिछली बार यानी 2016 में हुए विधानसभा चुनाव में इस सीट पर तृणमूल के प्रार्थी आलोक कुमार मांझी जीते थे. उन्होंने फॉरवर्ड ब्लॉक के अपने प्रतिद्वंदी नंदलाल पंडित को 10,771 वोटों से पराजित किया था. पर, स्थानीय राजनीति की समझ रखनेवालों का कहना है कि इस बार गलसी में मुकाबला त्रिकोणीय होगा.

इस बार यहां पिछली बार जीते तृणमूल कांग्रेस प्रार्थी आलोक कुमार मांझी को उनकी पार्टी ने जमालपुर विधानसभा सीट पर भेज दिया है. गलसी की लड़ाई के लिए तृणमूल ने राईना सीट से पिछली बार के विधायक नेपाल घोरुई को यहां मैदान में उतारा है. वहीं, फॉरवर्ड ब्लॉक ने इस सीट पर पुन: अपने पुराने उम्मीदवार नंदलाल पंडित को ही उतारा है.

Also Read: West Bengal Chunav 2021: हत्या और बलात्कार के आरोपी भी छठे चरण में लड़ रहे चुनाव

भाजपा ने पिछले चुनाव में यहां जिस सुंदर पासवान को लड़ाया था, उनकी जगह इस बार रनडीहा गांव के तपन बागदी को प्रार्थी बनाया गया है. नंदलाल पंडित और नेपाल घोरुई के साथ तपन बागदी की लड़ाई को लेकर स्थानीय लोगों में जोर-शोर से चर्चा हो रही है. लोगों का कहना है कि नंदलाल पंडित और नेपाल घोरुई, दोनों से स्थानीय लोग अधिक परिचित हैं.

गलसी में जबर्दस्त टक्कर की उम्मीद

तपन बागदी क्षेत्र के लिए नये हैं. इसके बावजूद भाजपा ने पूरी तरह से इस सीट को फतह करने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रखा है. लोकसभा चुनाव में बर्दवान-दुर्गापुर सीट से एसएस अहलूवालिया ने भाजपा प्रार्थी के रूप में जीत दर्ज की थी. भाजपा के नेताओं का कहना है कि इस बार गलसी विधानसभा चुनाव पर होने वाले मुकाबले में भाजपा की जीत निश्चित है, भले ही टक्कर जबर्दस्त हो.


तृणमूल की नाराजगी का लाभ भाजपा को मिलेगा

अरिंदम सील कहते हैं कि गलसी के विधायक आलोक कुमार मांझी को यहां से हटाने के चलते उनके समर्थकों में रोष-आक्रोश दिख रहा है. चुनाव का हिसाब समझने की कोशिश में लगे अन्य लोगों का भी कहना है कि उम्मीदवार बदले जाने से तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में नाराजगी का लाभ फॉरवर्ड ब्लॉक से ज्यादा भाजपा को मिलेगा.

Also Read: बैरकपुर की 7 विधानसभा सीट को चुनाव आयोग ने रेड अलर्ट क्षेत्र घोषित किया

Posted By : Mithilesh Jha

Next Article

Exit mobile version