कोलकाता. कलकत्ता हाइकोर्ट के न्यायाधीश अनिरुद्ध रॉय की एकल पीठ ने एक याचिका पर फैसला सुनाते कहा कि राज्य सरकार जनहित और जवाबदेही का बहाना बनाकर कर्मचारियों की पेंशन जारी करने में अनिश्चितकाल तक देरी नहीं कर सकती. बताया गया है कि कुणाल चंद्र सेन (याचिकाकर्ता) को 20 दिसंबर, 2004 को अस्थायी आधार पर चंद्रनगर बंग विद्यालय का प्रधानाध्यापक नियुक्त किया गया. बाद में उन्हें एक फरवरी, 2005 को स्थायी प्रधानाध्यापक नियुक्त किया गया. याचिकाकर्ता 31 जुलाई, 2015 को सेवानिवृत्त हुए. इसी बीच, नौ जुलाई, 2015 को स्थानीय विधायक अशोक कुमार साह ने याचिकाकर्ता के खिलाफ धन के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज करायी. 15 अक्तूबर, 2015 को सहायक विद्यालय निरीक्षक, माध्यमिक शिक्षा द्वारा की गयी प्रारंभिक जांच में याचिकाकर्ता को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया गया. सहायक विद्यालय निरीक्षक (माध्यमिक शिक्षा) द्वारा नौ दिसंबर, 2015 को पेश की गयी जांच रिपोर्ट में भी आरोपों का कोई आधार नहीं पाया गया. इन रिपोर्टों के बावजूद, चंद्रनगर नगरपालिका 22 दिसंबर, 2015 को नयी जांच करने के लिए एक तथ्य-खोज समिति का गठन किया. याचिकाकर्ता ने नो लायबिलिटी सर्टिफिकेट के लिए आवेदन किया, लेकिन पिछली जांचों से मंजूरी मिलने के बावजूद उनकी पेंशन और ग्रेच्युटी जारी नहीं की गयी. इस मामले की सुनवाई करते हुए न्यायालय ने पाया कि याचिकाकर्ता को पहले ही दो अलग-अलग जांच रिपोर्टों द्वारा दोषमुक्त कर दिया गया, जिसमें उसकी ओर से कोई गलत काम नहीं पाया गया, इसलिए राज्य सरकार द्वारा याचिकाकर्ता की पेंशन और ग्रेच्युटी के वितरण में देरी करना अनुचित था. न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि याचिकाकर्ता नो लायबिलिटी सर्टिफिकेट का हकदार था, क्योंकि जांचों में उसे दोषमुक्त कर दिया गया. साथ ही अदालत ने कहा कि प्रतिवादियों द्वारा इस सर्टिफिकेट को रोकना अनुचित है. न्यायालय ने प्रतिवादियों को याचिकाकर्ता की पेंशन और ग्रेच्युटी जारी करने का निर्देश दिया और साथ ही याचिकाकर्ता को नो लायबिलिटी सर्टिफिकेट जारी करने का भी आदेश दिया, जिससे उसके सेवानिवृत्ति लाभों के प्रसंस्करण का रास्ता साफ हो गया है.
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