अन्नपूर्णा योजना का 3000 निकालने गयी थी महिला, बैंक अकाउंट में मिले 700 करोड़ रुपए, मचा हड़कंप

पश्चिम बंगाल से एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है जहां राज्य सरकार की अन्नपूर्णा भंडार योजना के पैसे निकालने पहुंची महिलाओं के बैंक खातों में अचानक करोड़ों रुपये दिखने लगे। एक छात्रा के खाते में 759 करोड़ से ज्यादा की रकम मिली।

पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले से एक बेहद हैरान और चौंका देने वाला मामला सामने आया है. यहां राज्य सरकार की ‘अन्नपूर्णा भंडार योजना’ का पैसा और पढ़ाई के लिए मिलने वाली स्कॉलरशिप की रकम निकालने पहुंची महिलाओं के बैंक खातों में अचानक 700 करोड़ रुपए दिखने लगे. एक झटके में करोड़पति बनी इन महिलाओं के बैंक बैलेंस की खबर जैसे ही इलाके में फैली, पूरे जिले में हड़कंप मच गया.

7वीं की छात्रा के खाते में 759.69 करोड़ रुपए

पहली घटना उत्तर बंगाल के मेकलीगंज विधानसभा के दक्षिण बड़ा हल्दीबाड़ी क्षेत्र की है. यहां हल्दीबाड़ी बालिका विद्यालय की सातवीं कक्षा की छात्रा सुपूर्णा रॉय के पिता केरल में प्रवासी मजदूर हैं. सुपूर्णा को फोन पर स्कॉलरशिप के 800 रुपए क्रेडिट होने का मैसेज मिला था. उसके जूते खराब हो चुके थे. उसने नये जूते खरीदने के लिए अपने भाई के साथ शनिवार को ऑनलाइन जनसेवा केंद्र (Csp Center) जाकर 900 रुपए निकाले.

हल्दीबाड़ी थाने की पुलिस ने शुरू की जांच

जैसे ही उसने अपना बैंक बैलेंस चेक किया, उसके और सीएसपी संचालक के होश उड़ गये. छात्रा के खाते में कुल 759,69,51,951 रुपए (759 करोड़ 69 लाख 51 हजार 951 रुपए) दिख रहा था. खबर फैलते ही हल्दीबाड़ी थाने की पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी.

ये भी पढ़ें: शुभेंदु अधिकारी ने 1.10 करोड़ महिलाओं के खाते में ट्रांसफर किये अन्नपूर्णा भंडार के 3000-3000 रुपए

अन्नपूर्णा योजना की लाभार्थी के खाते में 700 करोड़

दूसरी घटना मयनागुड़ी ब्लॉक के सापटीबाड़ी ग्राम पंचायत क्षेत्र की है. यहां की गृहिणी शेफाली रॉय जब अन्नपूर्णा योजना के तहत मिलने वाली 3,000 रुपए निकालने गयीं, तो उनके बैंक खाते में भी 700 करोड़ से अधिक की रकम दिखी. महिला के बेटे द्वीपेन रॉय ने कहा- सुबह में जब मां योजना का पैसा निकालने गयी, तो यह मामला सामने आया. बैंक में 700 करोड़ रुपए दिख रहे हैं. सुरक्षा के दृष्टिकोण से हमने तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचना दी. हमें समझ नहीं आ रहा कि यह पैसा कहां से आया.

ये भी पढ़ें: अन्नपूर्णा भंडार योजना के नये नियमों का खुलासा, क्या एक ही परिवार की 2 महिलाओं को मिलेंगे 3-3 हजार रुपए?

बैंक की तकनीकी गड़बड़ी या कोई बड़ा झोल?

एक दिन पहले ही अलीपुरदुआर जिले के फालाकाटा में भी एक गरीब परिवार के बैंक खाते में करोड़ों रुपए आने का मामला सामने आया था. लगातार सामने आ रही इन घटनाओं के बाद लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या यह बैंक के सॉफ्टवेयर में आयी कोई तकनीकी खराबी (Technical Glitch) है या इसके पीछे कोई संदिग्ध लेन-देन का मामला है. स्थानीय प्रशासन और बैंक प्रबंधन पूरी स्थिति की गंभीरता से पड़ताल कर रहे हैं.


प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

Published by: Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.
और पढ़ें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >