कार्यक्रम की शुरुआत कंचनजंगा नृत्यटोली के सांस्कृतिक कार्यक्रम से हुई. इसके बाद दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे के कंप्रिहेंसिव कंजर्वेशन मैनेजमेन्ट प्लान के लिए यूनेस्को और रेलवे मंत्रालय के बीच फंड इन ट्रस्ट समझौते पर हस्ताक्षर हुआ. भारतीय रेलवे की ओर से आरके वर्मा और यूनेस्को की ओर से सिगेरू आयेगी ने हस्ताक्षर किये और समझौते के दस्तावेज एक-दूसरे को सौंपे. बाद में समारोह को संबोधित करते हुए सिगेरू आयेगी ने कहा कि दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे विश्व धरोहर है और इसकी रक्षा करना सब की जिम्मेदारी है.
इसके बाद जीटीए के प्रमुख कार्यपाल विमल गुरुंग ने समारोह को संबोधित किया और आज के दिन को ऐतिहासिक बताया. उन्होंने कहा के इस समझौते के पीछे सांसद व केन्द्रीय राज्य मंत्री सुरेन्द्र सिंह अहलुवालिया की अहम भूमिका रही. श्री अहलुवालिया ने अपने भाषण में गोरखाओं की जमकर तारीफ की और कहा कि गोरखा ईमानदारी और वफादारी की मिसाल हैं. देश आजादी के आंदोलन से लेकर आज देश की सीमाओं की सुरक्षा करते हुए गोरखाओं ने अपनी देशभक्ति का प्रमाण दिया है.
उन्होंने कहा कि गोरखाओं की इस ईमानदारी,वफादारी और जिम्मेदारी की कद्र करनी होगी. इनका हर क्षेत्र में विकास होना चाहिए. रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने भी गोरखाओं के सम्मान करने की बात कही. उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने दार्जिलिंग हिमालयन रेलवे के लिए काफी कुछ सोचा है. यहां के ट्वॉय ट्रेन के जरिये दार्जिलिंग को पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र बनाया जा सकता है. उन्होंने इस मामले में जीटीए को आइआसीटीसी से संपर्क करने की सलाह दी. इस मौके पर रेलमंत्री ने और भी कइ परियोजनाओं का उद्घाटन रिमोट के जरिये किया. उन्होंने सिक्किम की राजधानी गंगतोक तक रेल सेवा शुरू करने की भी बात कही.
