मान-सम्मान बढ़ा, लेकिन कम वेतन से परेशान

सिलीगुड़ी. शिक्षक के पद से बिना वेतन की छुट्टी लेना सिलीगुड़ी महकमा परिषद के सभाधिपति को अब मंहगा महसूस हो रहा है. पहले महीने के अंत में वेतन के रूप में जहां 70 हजार रुपये जेब में पहुंचते थे, सभाधिपति बनने के बाद अब महज पांच हजार रुपये मिल रहे हैं. वेतन में अचानक इतनी […]

सिलीगुड़ी. शिक्षक के पद से बिना वेतन की छुट्टी लेना सिलीगुड़ी महकमा परिषद के सभाधिपति को अब मंहगा महसूस हो रहा है. पहले महीने के अंत में वेतन के रूप में जहां 70 हजार रुपये जेब में पहुंचते थे, सभाधिपति बनने के बाद अब महज पांच हजार रुपये मिल रहे हैं. वेतन में अचानक इतनी कमी से सभाधिपति परेशान हैं. राज्य के सभी महकमा परिषद सभाधिपतियों के वेतन में वृद्धि की मांग को लेकर उन्होंने राज्य के पंचायत मंत्री को एक पत्र भेजा है. अध्यापक से सभाधिपति बनने पर मान- सम्मान व सरकारी सुविधाओं में तो वृद्धि हुयी है, लेकिन मासिक आमदनी कम हो गयी है.
महकमा परिषद के सभाधिपति जिले के विकास में नीति-निर्धारक की भूमिका निभाते हैं. जिले के विकास कार्यों को लेकर बड़ी जिम्मेदारी उन पर रहती है. इस पद की जिम्मेदारी तो राज्य के राज्यमंत्री के समान है, लेकिन वेतन सरकारी कार्यालयों के ग्रुप ‘डी’ कर्मचारियों से भी कम है. राज्य के सभी महकमा परिषद सभाधिपतियों का मासिक वेतन पांच हजार रुपये है. सभाधिपति के वेतन में वृद्धि की मांग को लेकर सिलीगुड़ी महकमा परिषद के सभाधिपति तापस सरकार ने आवाज बुलंद की है. इसके लिए उन्होंने राज्य के पंचायत मंत्री को एक पत्र भी भेजा है, लेकिन उसका जवाब अभी तक नहीं आया है.
तापस सरकार उत्तरबंग विश्वविद्यालय के अंतर्गत बागडोगरा स्थित कालीपद घोष तराई महाविद्यालय में इतिहास के अध्यापक हैं. वर्ष 2015 के त्रिस्तरीय महकमा परिषद चुनाव में उन्हें माकपा की ओर से उम्मीदवारी मिली. जनादेश के बाद पार्टी के निर्देशानुसार उन्होंने सभाधिपति का दायित्व ग्रहण किया. सभाधिपति का पद संभालने पर उन्होंने महाविद्यालय से छुट्टी ले ली है.

नियमानुसार सभाधिपति के पद पर बने रहने तक उन्हें अध्यापक का वेतन मुहैया नहीं कराया जायेगा. एक अध्यापक के तौर पर उनका मासिक वेतन करीब 70 हजार रुपया है, जबकि एक सभाधिपति के रूप में उन्हें मात्र 5 हजार रुपया मासिक वेतन मिलता है. महकमा परिषद का सभाधिपति बनने से श्री सरकार के मान-सम्मान में काफी वृद्धि हुई है, लेकिन उनकी मासिक आय काफी कम हो गयी है. श्री सरकार का कहना है कि 70 हजार का 14वां हिस्सा वर्तमान में उनकी मासिक आय है. मान-सम्मान के साथ सरकारी गाड़ी व अन्य सुविधाएं तो मिली हैं, लेकिन परिवार चलाना मुश्किल हो गया है. पांच हजार रुपये की सीमित आमदनी से आज के समय में परिवार कैसे चलेगा.

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