सिलीगुड़ी. सिलीगुड़ी नगर निगम के साथ ही उत्तर बंगाल विकास मंत्रालय (एनबीडीडी) और सिलीगुड़ी-जलपाईगुड़ी विकास प्राधिकरण (एसजेडीए) भी अब कर्मचारी भविष्यनिधि संगठन (इपीएफओ) के निशाने पर हैं. इनके अलावा सिलीगुड़ी महकमा परिषद, हिमुल, पीडब्ल्यूडी, सीपीडब्लूडी व अन्य सभी सरकारी संस्थानों एवं दफ्तरों के भी कर्मचारियों की सूची के अब-तक का ब्यौरा खंगाला जा रहा है. यह जानकारी इपीएफओ के उत्तर बंगाल-सिक्किम इकाई के सहायक आयुक्त विकास आनंद ने मीडिया को दी. उन्होंने बताया कि इस जांच-पड़ताल के तहत कर्मचारियों से जुड़े सही तथ्यों का जुगाड़ किया जा रहा है.
इसके तहत किस स्तर के कितने कर्मचारियों का प्रत्येक महीने पीएफ जमा नहीं हो रहा है,इस पर नजर रहेगी. साथ ही ऐसे किस स्तर के और कितने कर्मचारी हैं जिनका पीएफ अब-तक जमा नहीं हुआ,उसकी भी जांच की जायेगी. इन तथ्यों के जांच-पड़ताल में अगर किसी भी तरह की गड़बड़ी पायी गयी तो इपीएफ कानून के तहत सख्त कार्यवाही भी होगी. उन्होंने बताया कि दुग्ध उत्पादन कंपनी हिमुल जो अब मदर डेयरी के नाम से प्रचलित है इस सरकारी उपक्रम पर भी अपने कर्मचारियों के पीएफ का 1.14 करोड़ रूपये जमा न करने और गड़बड़ी करने का मामला सामने आया है.
चाय बागानों पर 52 सौ करोड़ बकाया: सहायक आयुक्त (पीएफ) आनंद कुमार ने बताया कि पीएफ के अधिकार से सबसे अधिक वंचित व सर्वाधिक खराब स्थिति चाय बागानों के श्रमिक और कर्मचारियों की है. उत्तर बंगाल के करीब 50 बागानों के श्रमिकों और कर्मचारियों के पीएफ का तकरीबन 52 सौ करोड़ रूपये बकाया पड़ा है. फिलहाल पानीघट्टा चाय बागान, बेलगाछी चाय बागान, गयागंगा चाय बागान, कमलपुर चाय बागान समेत कुल पांच बागानों के प्रबंधन के विरूद्ध इपीएफ में करोड़ों की गड़बड़ी करने का मामला चल रहा है.
