मालदा की युवती संग दिल्ली में हैवानियत

मालदा : मालदा जिले की एक युवती दिल्ली में बर्बरता का शिकार हो गयी. रविवार को हबीबपुर थाने के आदिवासी बहुल पलाश गांव में ताबूत में बंद 23 वर्षीय आदिवासी युवती का शव दिल्ली से पहुंचा. यह युवती भयावह यौन अत्याचार का शिकार हुई थी. उसे दिल्ली के राममनोहर लोहिया अस्पताल में भरती कराया गया […]

मालदा : मालदा जिले की एक युवती दिल्ली में बर्बरता का शिकार हो गयी. रविवार को हबीबपुर थाने के आदिवासी बहुल पलाश गांव में ताबूत में बंद 23 वर्षीय आदिवासी युवती का शव दिल्ली से पहुंचा. यह युवती भयावह यौन अत्याचार का शिकार हुई थी. उसे दिल्ली के राममनोहर लोहिया अस्पताल में भरती कराया गया था, जहां 17 दिनों तक मौत से लड़ने के बाद उसने दम तोड़ दिया. युवती को परिचारिका की नौकरी के नाम पर तीन साल पहले हबीबपुर थाने की आकतैल ग्राम पंचायत के पलाश गांव से दिल्ली ले जाया गया था.
वहां ले जाने के बाद उसके ऊपर अमानवीय अत्याचार शुरू कर दिया गया. गत 19 दिसंबर की सुबह उसे बेहोशी की हालत में दिल्ली के मुखर्जी नगर इलाके में सड़क के किनारे फेंक दिया गया. इसके बाद दिल्ली पुलिस और एक एनजीओ शक्तिवाहिनी ने उसे अस्पताल में भरती कराया. दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाती मालीवाल के पास युवती के दर्ज बयान से पता चला है कि उसके साथ जो अत्याचार हुआ, वह दिल्ली के निर्भया कांड से कम नहीं है.
युवती का शव गांव में पहुंचने के बाद परिवार और पास-पड़ोस के लोग रो पड़े. जिला अधिकारी शरद द्विवेदी के निर्देश पर जिला प्रशासन का एक दल पलाश गांव पहुंचा. युवती के पिता नहीं हैं. उसकी मां, बहन और भाई चाहते हैं कि दोषियों को फांसी की सजा हो. उनकी इस मांग के साथ गांव और जिले के लोग भी हैं.
मालदा की इस निर्भया का शव लेकर एनजीओ शक्तिवाहिनी के जिला प्रभारी सईदुल इस्लाम ने बताया कि मृत युवती के पिता की मौत दस साल पहले हो गयी थी. परिवार में 60 साल की बूढ़ी मां है. इसके अलावा एक भाई और बहन है. ये लोग गांव में मेहनत मजदूरी का काम करते हैं.
तीन साल पहले उत्तर दिनाजपुर जिले की एक महिला मरियम सिंह के साथ उसका परिचय हुआ था. वही महिला इस युवती को दिल्ली में काम दिलाने के नाम पर साथ ले गयी थी. दिल्ली जाने के बाद से युवती का अपने घर से कोई संपर्क नहीं था. गत 19 दिसंबर को उसे सड़क के किनारे मरणासन्न अवस्था में पाया गया. अस्पताल ले जाने पर उसके साथ हुए पाशविक और शारीरिक अत्याचार का पता चला.
दिल्ली महिला आयोग और शक्तिवाहिनी को दिये गये बयान में युवती ने बताया था कि दिल्ली ले जाकर मरियम सिंह ने उसे मुखर्जी नगर इलाके में एक दंपती के हाथों बेच दिया था. इसके बाद से उसे ठीक से भोजन-पानी नहीं दिया जाता था और तरह-तरह से उसका उत्पीड़न किया जाता था. रात में अनजान पुरुषों के साथ उसे जबरन भेजा जाता था.
मना करने पर उसे बुरी तरह मारा-पीटा जाता था. उसके शरीर के नाजुक अंगों समेत विभिन्न हिस्सों में जख्म के अनेक निशान थे. उसे कैद करके रखा जाता था. यहां तक कि सूरज की रोशनी भी वह ठीक तरह से नहीं देख पाती थी. लगातार हो रहे शारीरिक अत्याचार और अंधेरे में रहने की वजह से वह कई तरह की बीमारियों का शिकार हो गयी थी. आखिरकार 17 दिनों तक अस्पताल में रहने के बाद उसकी मौत हो गयी. गत 4 जनवरी दिन बुधवार को सुबह 11 बजे उसने आखिरी सांस ली. इसके बाद उसका शव दिल्ली से मालदा के लिए रवाना किया गया.
स्थानीय पंचायत सदस्य पार्वती मूर्मू ने बताया कि इस तरह की घटना को कतई बरदाश्त नहीं किया जा सकता. हमलोग दोषियों के खिलाफ फांसी की मांग कर रहे हैं. पूरे गांव की यही इच्छा है.
मामले में पांच लोग गिरफ्तार
शक्तिवाहिनी के सईदुल इस्लाम ने बताया कि इस घटना के संबंध में दिल्ली पुलिस ने मानव तस्करी में संलिप्त मरियम सिंह और मुखर्जी नगर इलाके के चार लोगों को गिरफ्तार किया है. मृतका की मां ने कहा कि मेरी बेटी रोजगार की उम्मीद में दिल्ली गयी थी और अब मुझे उसकी लाश देखनी पड़ रही है. रो-रोकर मां बार-बार बेहोश हो जा रही थी.
जिला प्रशासन की टीम दिल्ली गयी थी
जिला अधिकारी शरद द्विवेदी ने कहा कि बुधवार को युवती की मौत दिल्ली में हुई. गुरुवार को मुझे इस बारे में जानकारी मिली. इसके बाद जिला प्रशासन का एक दल दिल्ली गया और वहां से युवती का शव लेकर आया. जिला प्रशासन अब यह देखेगा कि हबीबपुर के और कितने लोग बाहर काम करने गये थे और अब लापता हैं. इस दौरान कोई भी शिकायत मिलने पर सभी जरूरी कदम उठाये जायेंगे.

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