सिलीगुड़ी कॉलेज में प्रदर्शनी का आयोजन

सिलीगुड़ी. प्रदर्शनी जन-जुड़ाव का अन्यतम साधन है. सामाजिक, शैक्षणिक, पारिवेशिक सन्दर्भ में आमलोगों के साथ जुड़ाव समय की मांग है. इसी धारणा के तहत सिलीगुड़ी कॉलेज के प्राचार्य ने प्रत्येक विभाग को प्रदर्शनी आयोजित करने का सुझाव दिया था. इसी सुझाव के तहत हिंदी विभाग की ओर से एक प्रदर्शनी का आयोजन कॉलेज में किया […]

सिलीगुड़ी. प्रदर्शनी जन-जुड़ाव का अन्यतम साधन है. सामाजिक, शैक्षणिक, पारिवेशिक सन्दर्भ में आमलोगों के साथ जुड़ाव समय की मांग है. इसी धारणा के तहत सिलीगुड़ी कॉलेज के प्राचार्य ने प्रत्येक विभाग को प्रदर्शनी आयोजित करने का सुझाव दिया था. इसी सुझाव के तहत हिंदी विभाग की ओर से एक प्रदर्शनी का आयोजन कॉलेज में किया गया. इस प्रदर्शनी में माध्यम भाषा के रूप में हिंदी को लेकर विद्यार्थी,छात्र संघ,प्राचार्य,परीक्षा नियंत्रक,मीडिया के बीच असमंजस की जो स्थिति है,उसे बखूबी दर्शाया गया. इस मौके पर उपस्थित सारे अतिथियों व अन्य विभाग के शिक्षकों ने माध्यम भाषा के रूप में हिंदी की मांग को जायज ठहराया.

कॉलेज की ओर से हिंदी माध्यम में लिखने की व्यवस्था उपलब्ध कराने की दिशा में सकारात्मक पहल करने का आश्वासन भी मिला.प्रदर्शनी में ‘पूजा या मज़ा’ शीर्षक से लगे एक पोस्टर में सरस्वती पूजा जैसे अवसरों पर करारा व्यंग्य किया गया.

इसके अलावा यशपाल की कहानी करवा का व्रत के माध्यम से व्रत को आज औपचारिकता मात्र बताया गया.कबीर दास के दोहे की एक पंक्ति पाथर पूजे हरी मिले,तो मैं पूजूं पहाड़ के माध्यम से आज समाज मे ईश्वर के रूप को मंदिरों के आकार आंकने की अवधारणा पर व्यंग्य किया गया.पोस्टर बनाने व प्रस्तुति देने में तृतीय वर्ष से निधि गुप्ता, मनीषा गुप्ता,किशोरी मिश्रा,संतोष सिंह, द्वितीय वर्ष से रिंकू गुप्ता,दुर्गा मंडल,कीर्ति शर्मा,सिमरम गुप्ता,पूनम कामती,शिखा पाठक,काजल शर्मा ,शीला गुप्ता,दीप्ती राय,अंजना झा,सोनू शर्मा,सोनू परिक,ज्योति भट्ट एवं प्रथम वर्ष से खुशबू राउत का नाम उल्लेखनीय है.इस कार्यक्रम में हिंदी के विभागाध्यक्ष प्रो अजय साव, शिक्षिका पूनम सिंह एवं अतिथि शिक्षक ब्रजेश चौधरी भी उपस्थित थे.

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