रैली शहर के बीच मझधार से बहनेवाली महानंदा नदी के किनारे एयरव्यू मोड़ से शुरु हुई. शहर के प्रमुख मार्गों का परिभ्रमण कर रैली सिलीगुड़ी कोर्ट परिसर में पहुंची और सभी लोगों ने एसडीओ दफ्तर का घेराव किया. प्रदर्शनकारियों के अगुवा नेताओं के एक प्रतिनिधि मंडल ने एसडीओ के मारफत जिला अधिकारी (डीएम, दार्जिलिंग) को कई सूत्री मांगों का ज्ञापन भी सौंपा. ज्ञापन के जरिये श्री भट्टाचार्य ने ममता सरकार को चेताते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के निर्देश पर ही तृकां के नेता-मंत्री सिलीगुड़ी नगर निगम को लेकर असहयोग की गंदी राजनीति कर रहे हैं. सिलीगुड़ी के विकास में हमेशा तरह-तरह से रोड़ा डाला जा रहा है. निगम का सौ करोड़ से भी अधिक का बकाया राज्य सरकार के पास पड़ा है. लेकिन ममता बनर्जी के निर्देश पर ही संबंधित मंत्रालय के मंत्री यह रकम रोके हुए हैं और बार-बार मांगने के बावजूद नहीं दे रहे. श्री भट्टाचार्य ने ममता पर तंज कसते हुए कहा कि यह बकाया अशोक भट्टाचार्य या मेयर का नहीं, बल्कि सिलीगुड़ी की जनता का है.
भले ही ममता गंदी राजनीति के तहत यह बकाया सिलीगुड़ी की जनता को न दे लेकिन समय आने पर यहां की जनता को पायी-पायी का हिसाब देना ही होगा. आज के प्रदर्शन के दौरान अशोक भट्टाचार्य, जीवेश सरकार के अलावा निगम के चेयरमैन दिलीप सिंह, डिप्टी मेयर रामभजन महतो, सभी मेयर परिषद सदस्य व सभी वाम पार्षदों के अलावा भारी तादाद में वाम मोरचा के सभी घटक दलों के नेता, कार्यकर्ता व समर्थक शामिल हुए. हाल ही में विरोधियों द्वारा बंधक बनाये जाने से भड़के मेयर का कहना है कि पानी की आड़ में तृकां ने अशोक भट्टाचार्य का नहीं, बल्कि सिलीगुड़ी के पहले नागरिक मेयर, उसके पद व आम जनता का अपमान किया है.
वजह मेयर को सिलीगुड़ी की जनता ने चुना है और बहुमत से निगम में वाम बोर्ड का गठन हुआ है. इसलिए विरोधियों को जनता की राय माननी चाहिए. श्री भट्टाचार्य ने तृकां को राजनीति का पाठ पढ़ाते हुए कहा कि राजनीति करना इतना आसान नहीं है. किसी मुद्दे पर राजनीति करने से पहले उसकी वास्तविकता और इतिहास का अध्ययन करें, फिर राजनीति करें.
