ओमू दा की मौत से उड़ी माकपा नेताओं की नींद

सिलीगुड़ी: सिलीगुड़ी नगर निगम के 15 नंबर वार्ड के पार्षद अरविंद घोष उर्फ ओमू दा के निधन ने माकपा नेताओं की रात की नींद उड़ा दी है. ओमू दा के समर्थन पर ही सिलीगुड़ी नगर निगम में वाम मोरचा ने बोर्ड का गठन किया था.उनके निधन ने नगर निगम का पूरा सियासी समीकरण ही बदल […]

सिलीगुड़ी: सिलीगुड़ी नगर निगम के 15 नंबर वार्ड के पार्षद अरविंद घोष उर्फ ओमू दा के निधन ने माकपा नेताओं की रात की नींद उड़ा दी है. ओमू दा के समर्थन पर ही सिलीगुड़ी नगर निगम में वाम मोरचा ने बोर्ड का गठन किया था.उनके निधन ने नगर निगम का पूरा सियासी समीकरण ही बदल दिया है. ओमू दा की मौत पर भले ही माकपा के साथ-साथ तृणमूल कांग्रेस के नेता शोक प्रकट कर रहे हों,लेकिन वास्तविकता यह है कि दोनों ही दलों के नेताओं की नजर सिलीगुड़ी नगर निगम बोर्ड पर टिकी है.
माकपा के लोग जहां अपने बोर्ड को बचाए रखना चाहते हैं,वहीं तृणमूल कांग्रेस किसी भी कीमत पर बोर्ड पर अपना कब्जा करना चाहती है.अगर आंकड़ों पर गौर करें तो वाम मोरचा बोर्ड फिलहाल अल्पमत में है. पिछले चुनाव में 47 सदस्यों वाली नगर निगम में वाम मोरचा ने 23 सीटों पर कब्जा किया था और माकपा नेता तथा पूर्व मंत्री अशोक भट‍्टाचार्य के नेतृत्च में बोर्ड का गठन हुआ.बहुमत के लिए 24 सीटों की आवश्यकता थी जो ओमू दा के समर्थन से पूरी हो गयी थी.पिछले महीने वाम मोरचा के घटक दल फारवर्ड ब्लॉक की पांच नंबर वार्ड की पार्षद दुर्गा सिंह ने पार्टी छोड़ दी और तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गयी. स्वभाविक तौर पर वामो पार्षदों की संख्या घटकर 23 से 22 हो गयी. अब ओमू दा का भी निधन हो गया है. निगम में बहुमत के लिए वामों को 24 पार्षदों की आवश्यकता है जबकि उनके पास 22 पार्षद ही है. नगर निगम में वामो बोर्ड पूरी तरह से अल्पमत में है और इसी वजह से मेयर अशोक भट्टाचार्य सहित तमाम माकपा नेताओं की नींद उड़ी हुयी है.उनके सामने नगर निगम बोर्ड बचाना सबसे बड़ी चुनौती है.हांलाकि उपरी तौर पर माकपा नेता ऐसा दिखा रहे हैं जैसे कि बोर्ड को कोइ खतरा ही नहीं हो.

मेयर अशोक भट्टाचार्य का साफ-साफ कहना है बोर्ड को कोइ खतरा नहीं है.नगर निगम में वाम बोर्ड को बहुमत हासिल है.माकपा के जिला कन्वेनर जीवेश सरकार भी कुछ इसी प्रकार का दावा कर रहे हैं. जिवेश सरकार ने भी कहा है कि वाम बोर्ड को कोइ खतरा नहीं है और मेयर अशोक भट्टाचार्य अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करेंगे.


उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि तृणमूल की ओर से उनके पार्षदों को तोड़ने की कोशिश हो रही है,लेकिन उनका कोइ भी पार्षद नहीं टूटने वाला है.इसबीच,सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार वाम बोर्ड के लिए कांग्रेस के चार पार्षद तारणहार साबित होंगे. इन्हीं के दम पर माकपा नेता बोर्ड में बहुमत होने का दावा कर रहे हैं. सूत्रों ने बताया कि दुर्गा सिंह के जाने के बाद से ही अशोक भट‍्टाचार्य कांग्रेस के जिला अध्यक्ष तथा विधायक शंकर मालाकार के साथ संपर्क में हैं.दोनों नेताओं के बीच इस मुद्दे को लेकर बैठक भी हो चुकी है.इतना ही नहीं माकपा नेता कांग्रेस के चारों पार्षदों के साथ भी शंकर बनाये हुए है. दूसरी तरफ ओमू दा निधन के बाद से तृणमूल कांग्रेस की सक्रियता भी अचानका बढ़ गयी है. सूत्रों का कहना है कि तृणमूल के निशाने पर माकपा पार्षद के साथ ही कांग्रेस के चारों पार्षद भी हैं. इनको तोड़ने की कोशिश की जा रही है. इसकी भनक माकपा और कांग्रेस दोनों को है.

यही वजह है कि दोनों ही दल अपने पार्षदों को टिकाये रखने के लिए एंड़ी चोटी का जोर लगा रहे हैं. दोनों ही पार्टियों की ओर से अपने-अपने पार्षदों पर नजर रखी जा रही है.सूत्रों के अनुसार माकपा अपने कइ पार्षदों को उपकृत करेगी. जिन पार्षदों के पार्टी छोड़ने की आशंका है,उन्हें मनाया जा रहा है और नगर निगम मे मेयर पार्षद बनाने की बात कही जा रही है.

इसबीच,इस सियासी घमासान के बीच कल गुरूवार को तृणमूल पार्षदों की बैठक होने वाली है. इसी बैठक में आगे की रणनीति पर विचार किया जायेगा. तृणमूल नेता तथा नगर निगम में विरोधी दल के नेता नांटू पाल का कहना है कि वाम बोर्ड अल्पमत में है और उनको सत्ता में रहने का कोइ अधिकार नहीं है.श्री पाल ने कहा कि वह कल अपने सभी पार्षदों को लेकर बैठक करेंगे.यहां बता दें कि तृणमूल पार्षदों की संख्या 17 है. दुर्गा सिंह के इनके खेमे में आ जाने से तृणमूल पार्षदों की संख्या बढ़कर अब 18 हो गयी है. बोर्ड बनाने के लिए तृणमूल को अभी और 6 पार्षदों की आवश्यकता है.

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