उन्होंने कहा कि पिछले कई सालों से पहाड़ पर पंचायत चुनाव नहीं हुए हैं, जिससे पहाड़ के ग्रामीण क्षेत्रों विकास नहीं हो रहा है. उन्होंने जातीय पहचान का सवाल उठाते हुए कहा कि कुछ महीने पहले राज्य सरकार ने नेपाली आदिकवि भानुभक्त आचार्य की जन्म जयन्ती आयोजित की थी.
उस समारोह में नेपाली भाषा का प्रयोग नहीं किया गया, जबकि नेपाली भाषा को देश के संविधान ने मान्यता दी है. उन्होंने कहा कि विमल गुरूंग के साथ हमारा अपना हिसाब-किताब है, परंतु राज्य के एक मंत्री ने उन्हें पहाड़ से खदेड़ने जैसे भाषा का प्रयोग किया, जो असंवैधानिक है. लीग के उपाध्यक्ष कृष्ण छेत्री ने मोरचा पर उंगली उठाते हुए कहा कि अगर मोरचा प्रमुख विमल गुरूंग गोरखालैंड की मांग पर ईमानदार हैं, तो दार्जिलिंग के चौरस्ता पर आमरण अनशन पर बैठें. लेकिन विमल गुरूंग में यह करने का दम नहीं है. उन्होंने कहा कि गोरखा लीग जल्द ही अपने गोरखालैंड आन्दोलन का कार्यक्रम सामने रखेगी.
