रस्साकशी: मालदा जिला परिषद को लेकर खींचतान जारी, कांग्रेस और माकपा एकजुट

मालदा. मालदा जिला परिषद के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने वाले सभाधिपति सहित अन्य सदस्यों की सदस्यता खारिज करने के लिये माकपा व कांग्रेस ने कमर कस ली है. कांग्रेस द्वारा संचालित मालदा जिला परिषद अब तृणमूल के कब्जे में है. कांग्रेस के सभाधिपति सहित 5 सदस्य और माकपा के 10 […]

मालदा. मालदा जिला परिषद के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाकर तृणमूल कांग्रेस में शामिल होने वाले सभाधिपति सहित अन्य सदस्यों की सदस्यता खारिज करने के लिये माकपा व कांग्रेस ने कमर कस ली है.

कांग्रेस द्वारा संचालित मालदा जिला परिषद अब तृणमूल के कब्जे में है. कांग्रेस के सभाधिपति सहित 5 सदस्य और माकपा के 10 जिला परिषद सदस्यों के तृणमूल में शामिल होने से तृणमूल की संख्या बढ़कर 31 हो गयी है. स्वभाविक रूप से जिला परिषद पर तृणमूल का कब्जा हो गया है. जिला परिषद को अपने कब्जे में रखने के लिये तृणमूल सभी कोशिश कर रही है. दूसरी ओर पार्टी छोड़ने वालों के खिलाफ दल-बदल कानून के तहत सदस्या रद्द कराने की कोशिश कांग्रेस और माकपा कर रही है. पिछले बुधवार को 21 सदस्यों के साथ मालदा जिला परिषद की सभाधिपति सरला मुर्मू ने जिला शासक के समक्ष बहुमत होने का दावा किया है.

इसके बाद से ही तृणमूल में शामिल हुए सदस्यों की सदस्यता खारिज कराने को कोशिश कांग्रेस और माकपा कर रही है. मालदा जिला कांग्रेस अध्यक्ष व सांसद मौसम नूर ने कहा कि सत्ताधारी दल तृणमूल कांग्रेस मालदा का विकास ठप करना चाहती है. पंचायत कानून में साफ कहा गया है कि जिला परिषद में बहुमत वाली पार्टी के बिना विकास कार्य नहीं किया जायेगा. जिला परिषद को चलाने के लिये स्थायी कमिटी में भी बहुमत जरूरी है.

उन्होंने दावा किया कि तृणमूल अभी उस आंकड़े को नहीं छू पायी है और कोशिश करने पर तृणमूल को सफलता नहीं मिलेगी. मालदा जिला परिषद में स्थायी सदस्यों की संख्या 66 है. जिसमें मालदा के दो सांसद, 12 विधायक, 15 पंचायत समिति के अध्यक्ष और जिला परिषद के 31 निर्वाचित सदस्य हैं. इस कमिटी में माकपा व कांग्रेस सदस्यों की संख्या अधिक है. खाद्य विभाग के बोर्ड सदस्य सोशलिस्ट पार्टी के मिलन दास और कृषि विभाग के बोर्ड सदस्य कांग्रेस की चंदना सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिये माकपा व कांग्रेस ने कवायद तेज कर दी है. इन दोनों के खिलाफ मतदान करने के लिये कांग्रेस व माकपा अपने सदस्यों को फरमान जारी करेगी. पार्टी निर्देश की अवहेलना करने वालों पर पंचायत कानून के तहत कार्यवायी की जायेगी.

जिला परिषद के विरोधी दल नेता माकपा के खलील शेख ने कहा कि मालदा जिला परिषद में बोर्ड सदस्यों की संख्या 9 है. उनमें से दो सदस्य तृणमूल में शामिल हुए हैं. इसलिए उन दोनों के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने का प्रयास किया जा रहा है. इधर, तृणमूल कांग्रेस संविधान को अंगूठा दिखाकर जिस प्रकार जबरन दखल की नीति अपना रही है, उससे मालदा जिले का विकास रूक जायेगा. स्थायी समिति में बहुमत ना होने पर तृणमूल विकास कार्य नहीं कर पायेगी. सबसे अधिक समस्या जिला परिषद का बजट पास करने को लेकर होगी.
माकपा व कांग्रेस की इस कानूनी दलील को तृणमूल कांग्रेस नजरअंदाज कर रही है. जिला परिषद के तृणमूल सदस्य उज्जवल चौधरी ने कहा कि जिला परिषद पर हमने कब्जा कर लिया है. आगे की राह तृणमूल स्वयं तय करेगी.

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