राम भरोसे चल रहा है भारती हिंदी हाइस्कूल

सिलीगुड़ी. स्कूल में देरी से आने, नियमित रूप से कक्षा नहीं लेने को लेकर अभिभावकों, स्थानीय लोगों एवं विद्यार्थियों ने शिक्षकों के खिलाफ मोरचा खोल दिया है. यह मामला सिलीगुड़ी नगर निगम के वार्ड नंबर 47 के पत्ती कॉलोनी स्थित भारती हिंदी विद्यालय का है. स्कूल के प्रधानाध्यापक हांलाकि कि शिक्षकों को बचाने में लग्रे […]

सिलीगुड़ी. स्कूल में देरी से आने, नियमित रूप से कक्षा नहीं लेने को लेकर अभिभावकों, स्थानीय लोगों एवं विद्यार्थियों ने शिक्षकों के खिलाफ मोरचा खोल दिया है. यह मामला सिलीगुड़ी नगर निगम के वार्ड नंबर 47 के पत्ती कॉलोनी स्थित भारती हिंदी विद्यालय का है.

स्कूल के प्रधानाध्यापक हांलाकि कि शिक्षकों को बचाने में लग्रे हैं. लेकिन अभिभावकों एवं विद्यार्थियों ने शिक्षकों के इस मनमाने रवैये पर अंकुश लगाने लगाने की तैयारी कर ली है. सिलीगुड़ी भारती हिंदी स्कूल में प्राथमिक से लेकर उच्च माध्यमिक तक की पढ़ाई होती है. एक ही परिसर में प्राथमिक के लिए अलग एवं माध्यमिक व उच्च माध्यमिक के लिए अलग विभाग है. आरोप है कि इस स्कूल में ढांचागत सुविधाओं का तो अभाव है ही,उपर से शिक्षकों की लापरवाही एवं लेटलतीफी ने पठन-पाठन को पूरी तरह से चौपट कर दिया है.

सोमवार की सुबह करीब साढ़े दस बजे विद्यालय के कुछ अभिभावक विद्यालय के मुख्य द्वार पर उपस्थित हो गये. ठीक 10 बजकर 50 मिनट पर विद्यालय की घंटी लगने के साथ गेट को बंद कर दिया. मुख्य द्वार बंद होने के बाद कइ शिक्षक पहुंचे. इन शिक्षकों को अभिभावकों ने विद्यालय में प्रवेश नहीं करने दिया. कइ शिक्षक वापस लौट गये. इस दौरान मोहम्मद मुर्तजा अख्तर नामक एक शिक्षक पकड़ में आ गये. वह ठीक 11 बजकर 10 मिनट पर स्कूल पहुंचे. आंदोलनकारी अभिभावकों ने उनसे विद्यालय आने का समय पूछा. जवाब में उन्होंने कहा कि वह किशनगंज के रहने वाले हैं. शनिवार को छुट्टी होने के बाद वे अपने घर लौट गये थे और सोमवार की सुबह वापस लौटे है. फिर तैयार होकर विद्यालय पहुंचने में उन्हें तनिक देर हो गयी. अभिभावकों द्वारा इसका विरोध करने पर उन्होंने सीएल लेने की बात कही और वापस लौट गये. इसके अतिरिक्त एक शिक्षक रोहित पासवान भी 11 बजकर 15 मिनट पर पर पहुंचे. उनसे पूछने पर उन्होंने कहा कि उनकी मोटर साईकिल खराब हो गयी थी. बनाने में ही उन्हें देर हो गयी. वैसे विद्यालय के सभी शिक्षक समय पर ही विद्यालय आते हैं.
आंदोलन पर उतरे अभिभावकों का आरोप है कि विद्यालय के शिक्षक सही समय पर नहीं पहुंचते है. अधिकांश शिक्षक ग्यारह बजे के बाद पहुंचते है. कभी-कभी तो शिक्षकों को विद्यालय पहुंचनें में 12 बज जाता है. इसके बाद भी उपस्थिति रजिस्टर पर दस बजे आने का ही हस्ताक्षर करते हैं. अभिभावक राम स्वरूप यादव ने आरोप लगाते हुए कहा कि एक तो शिक्षक समय पर नहीं पहुंचते. आते भी हैं तो स्मार्ट फोन पर व्यस्त रहते हैं. पढ़ाई के नाम पर विद्यालय में सिर्फ आना-जाना ही रह गया है.
विद्यार्थियों का आरोप
उच्च माध्यमिक के विद्यार्थी राम बली पासवान, पवन कुमार सहनी और अन्य ने आरोप लगाते हुए कहा कि ढांचागत की कमी बताकर ग्यारहवीं और बारहवीं श्रेणी की पढ़ाई सप्ताह में मात्र तीन दिन ही करायी जाती है. इन तीन दिनों में प्रत्येक दिन छह विषय की पढ़ाई होनी चाहिए, लेकिन आज तक किसी भी दिन छह विषयों की पढ़ाई नहीं हुयी है. औसतन तीन विषय की ही पढ़ाई होती है. सिर्फ उपस्थिति के लिये विद्यालय आना आवश्यक है. अन्यथा यहां से अच्छी पढ़ाई अपने घर में ही कर सकते हैं. विद्यार्थियों का आरोप है कि दर्शन शास्त्र और राजनीति शास्त्र विषय की पढ़ाई नहीं के बराबर होती है.
क्या कहते हैं इलाकावासी
अभिभावक व विद्यार्थियों के बाद स्थानीय नागरिकों ने भी विद्यालय प्रबंधन पर कइ आरोप लगाये हैं. स्थानीय निवासी मीरा बरूआ ने कहा कि स्कूल प्रबंधन पूरी तरह से लापरवाह है. शिक्षक ही ठीक नहीं हैं तो भला पढ़ाइ करने वाले बच्चे कैसे ठीक रहेंगे. बच्चों को आस-पास की गली में टहलते हुए पाया जाता है. सबसे अजीब बात यह है कि इसी उम्र में इन बच्चों को प्यार मोहब्बत करते देखा गया है.
क्यों हुआ विरोध प्रदर्शन
विद्यालय प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार उच्च माध्यमिक के सभी शिक्षकों को साढ़े दस बजे व प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों को 11 बजे आना अनिवार्य है. 10 बजकर 40 मिनट पर उच्च माध्यमिक के विद्यार्थी जमा होते है. इस दौरान शिक्षकों की उपस्थिति अनिवार्य है. 10 मिनट की उपस्थिति के बाद 11 बजकर 50 मिनट पर कक्षा की घंटी बज जाती है. विद्यालय में बुनियादी सुविधाओं का अभाव नहीं है. बिजली, पानी, टेबल, कुरसी, चॉक, प्रयोगशाला आदि सभी व्यवस्था है. फिर भी पढ़ाई नहीं होती है. अभिभावक व विद्यार्थियों का आरोप है कि शिक्षक समय से नहीं आते है और आते भी हैं तो क्लास नहीं लेते.फोन पर शोसल मीडिया को लेकर व्यस्त रहते हैं. इसी मामले को लेकर अभिभावको ने विरोध प्रदर्शन शुरू किया. ग्यारह बजे के बाद आने वाले सभी शिक्षकों को प्रवेश करने से रोक दिया. अभिभावकों ने कहा कि इसके बाद भी यदि ऐसा मामला सामने आता है तो जोरदार आंदोलन किया जायेगा.
क्या कहते हैं प्रधानाध्यापक
भारती हिंदी उच्च माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक सुधीर चंद्र सिंह शिक्षकों को बचाते नजर आये. विद्यालय में समय से ना पहुंचने और क्लास ना लेने के आरोप पर उन्होंने कहा कि सभी शिक्षक नहीं कुछ शिक्षक देरी से आते है. वो भी कभी-कभी. जब उन्हें देरी होती है तो मुझे फोन पर इतल्ला कर देते है. श्री सिंह ने बताया कि शिक्षक और गैरशिक्षक मिलाकर कुल 46 कर्मचारी है. जिसमें एक वे स्वयं है और चार पैरा शिक्षक हैं. तीन नॉन टिचींग स्टाफ है. इन 45 शिक्षकों में से दो शिक्षक बीएड की शिक्षा लेने गये हैं. एक महिला शिक्षक बच्चे की देखभाल व एक प्रसव के लिये छुट्टी पर है. इसके अतिरिक्त विद्यालय के 12 शिक्षक सीएल पर हैं. बांकी बचे 26 शिक्षक विद्यालय में उपस्थित है. उपस्थिति रजिस्टर में उनका हस्ताक्षर भी है. हालांकि उन्होंने रजिस्टर दिखाने से साफ इनकार कर दिया. आश्चर्य तो इस बात का है कि एक विद्यालय के 12 शिक्षक एक साथ सीएल पर कैसे रह सकते हैं. अभिभावकों का कहना है कि क्या इन शिक्षकों का विद्यालय और विद्यार्थियों के प्रति कोई जिम्मेदारी नहीं है.

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